# फरीदाबाद की इस महिला किसान ने अमरूद के पेड़ों पर क्यों बांधी पन्नी, जानिए क्या है इसकी अनोखी वजह

> फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव की महिला किसान सुशीला ने एक एकड़ में ताइवानी पिंक वैरायटी के अमरूद उगाए हैं। बारिश के दिनों में फलों को कीड़ों से बचाने के लिए वे हर अमरूद पर पन्नी बांधती हैं, जिससे उन्हें मंडी में 50 से 60 रुपये किलो तक का बेहतरीन भाव मिल रहा है।

**Type:** article · **Category:** हरियाणा · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/haryana/why-this-woman-farmer-in-faridabad-wraps-polythene-around-300-guava-trees-31065 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमरूद की खेती, फरीदाबाद कृषि, ताइवानी पिंक अमरूद, महिला किसान, फसल सुरक्षा, बागवानी तकनीक

मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है और इस बात को हरियाणा के फरीदाबाद जिले के फतेहपुर बिल्लौच गांव में अमरूद की खेती ने पूरी तरह साबित कर दिया है। यहां एक एकड़ जमीन पर करीब 300 अमरूद के पेड़ पूरी मेहनत से उगाए गए हैं। इस खेत में खास तौर पर ताइवानी पिंक वैरायटी के अमरूद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में इन दिनों काफी अच्छी मांग और कीमत मिल रही है। खेती का काम कभी भी आसान नहीं होता है और किसानों को चिलचिलाती और तेज धूप में भी अपने खेतों की संभाल करनी पड़ती है। पेड़ों की समय पर छंटाई करना, उनकी नियमित सिंचाई करना और फलों की पूरी सुरक्षा करना एक किसान की दैनिकचर्या का अहम हिस्सा होता है।

## ताइवानी पिंक वैरायटी और बंपर पैदावार
इस पूरे खेत की मालकिन और महिला किसान सुशीला ने अपनी खेती के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने खेत में ताइवानी पिंक वैरायटी के पौधे लगा रखे हैं। वे इन पेड़ों की समय-समय पर सही तरीके से छंटाई करती हैं। टहनियों की सही कटाई करने से पेड़ पर ज्यादा संख्या में फल आते हैं और कुल पैदावार भी बहुत शानदार होती है। इस समय स्थानीय मंडी में अमरूद का भाव करीब 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। अगर बाजार में कीमतों का यह अच्छा रुख इसी तरह बना रहता है, तो उन्हें इस फसल से बहुत ही बढ़िया आमदनी हासिल हो जाती है।

## बरसात के दिनों में कीड़ों से फसल का बचाव
महिला किसान सुशीला का कहना है कि जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता है, अमरूद के फलों में कीड़े लगने की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में वे पेड़ों पर लगे हर एक अमरूद के फल को बहुत ही ध्यान से देखती हैं। यदि उन्हें किसी भी फल पर कीड़े का खतरा मंडराता हुआ नजर आता है, तो वे तुरंत उसे बचाने के पुख्ता इंतजाम करती हैं। बारिश के दिनों में खेत पर बहुत ज्यादा समय बिताना पड़ता है। थोड़ी सी भी लापरवाही बरतने से पूरी मेहनत से तैयार हुआ फल खराब हो सकता है, इसलिए वे लगातार अपनी फसल पर कड़ी निगरानी रखती हैं।

## अमरूद के फलों पर पन्नी बांधने की खास विधि
फलों को कीड़ों के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए सुशीला एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाती हैं, जिसके तहत वे अमरूद के हर फल पर पन्नी बांध देती हैं। पेड़ पर लगे हुए फल को पन्नी से ढक देने से उसे कीड़ों से बचाने में बहुत मदद मिलती है। इस काम में काफी ज्यादा समय और मेहनत लगती है, क्योंकि खेत के हर एक फल पर अलग से पूरा ध्यान देना पड़ता है। बरसात के मौसम में इस खास तरीके को अपनाने से वे फसल को कीटों के नुकसान से बचाने की पूरी कोशिश करती हैं। जब तैयार फल पूरी तरह सुरक्षित रहता है, तो किसानों की वह सारी मेहनत बेकार नहीं जाती है।

## समय पर छंटाई और पौधों की देखरेख
सुशीला का यह भी मानना है कि अमरूद के पेड़ों में छंटाई का काम हमेशा सही समय पर किया जाना बेहद जरूरी है। वे खुद खेत में जाकर सभी सूखी और जरूरत से ज्यादा बढ़ी हुई टहनियों को काट कर हटा देती हैं। इससे पेड़ पर नए और अच्छे फल आने के लिए पर्याप्त जगह बनती है और पैदावार भी ठीक बनी रहती है। खेती-किसानी के काम में हर गतिविधि का अपना एक तय समय होता है। किसी भी पेड़ को यूं ही बिना देखरेख के छोड़ देने से कभी काम नहीं चलता, इसलिए वे हमेशा मौसम और पौधे की वास्तविक जरूरत को समझकर ही उसकी देखभाल करती हैं।

## मौसम बदलने के साथ बदलती चुनौतियां
अमरूद की खेती में बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। सुशीला दोपहर के समय भी कड़ी धूप में खेत में मौजूद रहती हैं और पेड़ों की सेहत की जांच करती हैं। कभी उन्हें टहनियों की छंटाई करनी पड़ती है तो कभी फलों को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे काम करने होते हैं। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, खेत की परेशानियां और चुनौतियां भी बदल जाती हैं। खेत में नियमित रूप से समय देने पर ही पौधों की सही जरूरत समझ आती है और पूरी फसल पर लगातार नजर बनी रहती है।

## बाजार भाव और कुल कमाई का गणित
अमरूद का मौजूदा मंडी भाव 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहा है। सुशीला द्वारा उगाई जा रही ताइवानी पिंक वैरायटी से उन्हें महीने की अच्छी खासी कमाई हो जाती है। बाजार में फसल का सही दाम मिलने पर किसी भी किसान की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। हालांकि इस खेती में उत्पादन लागत के साथ-साथ भारी मेहनत भी जुड़ी होती है। यही वजह है कि वे फल पूरी तरह तैयार होने के बाद उसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देती हैं, ताकि जितना संभव हो सके फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

## सुरक्षा और पैदावार का तालमेल
अमरूद की खेती में सिर्फ अच्छी पैदावार ले लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि तैयार हो चुके फल को सुरक्षित रखना भी उतना ही अहम है। सुशीला पेड़ों की शुरुआती छंटाई से लेकर फलों को ढकने तक का सारा काम खुद अपने हाथों से करती हैं। बरसात के दिनों में कीड़ों की समस्या से निपटने के लिए वे पन्नी का इस्तेमाल करती हैं। जब मंडी में 50 से 60 रुपये किलो तक का अच्छा भाव मिल जाता है और फल कीड़ों से खराब नहीं होते, तब जाकर किसानों को उनकी मेहनत का सही और पूरा मुनाफा मिलता है।

## इसका आप पर असर
अमरूद की यह अनोखी तकनीक बागवानी से जुड़े किसानों और उपभोक्ताओं के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

- **भारत में:** अमरूद उत्पादक किसानों को अपनी फसल में कीट नियंत्रण के लिए इस तरह की पन्नी बांधने की तकनीक अपनाने से फल खराब होने से बचते हैं और पैदावार की बाजार कीमत अच्छी मिलती है।
- **फरीदाबाद में:** फतेहपुर बिल्लौच गांव और आसपास के स्थानीय बागवानों को ताइवानी पिंक वैरायटी जैसी उन्नत किस्मों की खेती से सीधे तौर पर 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक का बेहतर मंडी भाव प्राप्त करने में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बरसात के मौसम में अमरूद की फसल में होने वाले कीट हमलों से बचाव के लिए यह विधि अपनाई जाती है।

- **कीटों का प्रकोप:** मानसून के आते ही नमी और तापमान में बदलाव के कारण अमरूद के फलों में कीड़े लगने की समस्या तेजी से बढ़ जाती है।
- **फसल की सुरक्षा:** बिना किसी शारीरिक सुरक्षा आवरण के बारिश के दौरान फल बहुत जल्दी खराब होने लगते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- **आर्थिक लाभ:** ताइवानी पिंक जैसे प्रीमियम फलों को सुरक्षित रखकर किसान बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलो का उच्च मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सुशीला ने अपने खेत में कौन सी वैरायटी के अमरूद उगाए हैं?
सुशीला ने अपने खेत में ताइवानी पिंक वैरायटी के अमरूद के पेड़ उगाए हैं।

### 2. फरीदाबाद के किस गांव में अमरूद की यह खेती की जा रही है?
यह खेती फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव में एक एकड़ जमीन पर की जा रही है।

### 3. अमरूद के पेड़ों पर पन्नी क्यों बांधी जाती है?
बरसात के मौसम में फलों को कीड़ों और कीटों के खतरे से बचाने के लिए उन पर पन्नी बांधी जाती है।

### 4. वर्तमान में मंडी में अमरूद का भाव क्या चल रहा है?
मंडी में अमरूद का भाव करीब 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है।

### 5. खेत में कुल कितने अमरूद के पेड़ लगाए गए हैं?
एक एकड़ जमीन के इस खेत में करीब 300 अमरूद के पेड़ लगाए गए हैं।

## प्रेरणा और सबक
महिला किसान सुशीला की यह मेहनत और सूझबूझ किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

- **नियमित निगरानी:** फसल की सफलता के लिए खेत में लगातार समय बिताना और हर पौधे की जरूरत को समझना बेहद जरूरी है।
- **नवाचार अपनाना:** बरसात के मौसम में फलों पर पन्नी बांधने जैसे छोटे लेकिन प्रभावी उपाय बड़े नुकसान को रोक सकते हैं।
- **कड़ी मेहनत:** चिलचिलाती धूप और कठिन परिस्थितियों में भी खुद मेहनत करके खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._