अधूरी नींद और मानसिक दबाव से तेज हो सकते हैं मिर्गी के दौरे, जानिए न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह कम नींद और लगातार तनाव पहले से मिर्गी से जूझ रहे मरीजों में दौरे की आशंका को काफी बढ़ा सकते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट ने दैनिक दिनचर्या सुधारने और दौरे के वक्त सही देखभाल अपनाने की सलाह दी है। व्यस्त दिनचर्या, दफ्तर का भारी दबाव और देर रात तक जागने की आदत आज आम जीवन का हिस्सा बन चुकी है। बहुत से लोग काम और पढ़ाई के सिलसिले में पर्याप्त आराम नहीं कर पाते, जिससे शरीर लगातार थकान और चिड़चिड़ेपन की चपेट में रहता है। सामान्य तौर पर लोग इसे मामूली परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह लापरवाही गंभीर साबित हो सकती है। खासतौर पर तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए नींद की भारी कमी और मानसिक दबाव दौरों की बारंबारता को अचानक बढ़ा सकते हैं। फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डॉ. सुनील अग्रवाल के मुताबिक, जीवनशैली में आ रही यह गड़बड़ी मस्तिष्क की संवेदनशील कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। मस्तिष्क की विद्युत तरंगों पर पड़ता है सीधा असर मिर्गी वस्तुतः दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच विद्युत संकेतों का संतुलन अचानक बिगड़ जाता है। विद्युत गतिविधि में आने वाला यही असामान्य उतार-चढ़ाव मरीज को बार-बार दौरे पड़ने की वजह बनता है। इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि तनाव या नींद न मिलना खुद मिर्गी की बीमारी को सीधे पैदा नहीं करते, लेकिन जिन मरीजों को पहले से यह समस्या है, उनके लिए ये दोनों स्थितियां एक बड़े ट्रिगर का काम करती हैं। हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और संवेदनशीलता अलग होती है, इसलिए इन कारकों का असर भी प्रत्येक मरीज पर एक जैसा नहीं दिखाई देता। दिमाग के सामान्य संचालन और कोशिकाओं की मरम्मत के लिए पर्याप्त नींद लेना अनिवार्य होता है। जब किसी व्यक्ति को जरूरी आराम नहीं मिल पाता, तो मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अस्थिर होने लगती है। ऐसी संवेदनशील स्थिति में मिर्गी के मरीजों को दौरा पड़ने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, लंबे समय तक मानसिक दबाव झेलने से पूरे शरीर और स्नायुतंत्र की व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। तनाव की वजह से अक्सर लोगों की नींद का समय बिगड़ जाता है, खान-पान अनियमित हो जाता है और मरीज समय पर अपनी दवाएं लेना भूल जाते हैं। ये सभी मिली-जुली लापरवाहियां मिलकर दौरे की संभावना को तेज कर देती हैं। मरीज की नियमित देखभाल और परिवार की भूमिका मिर्गी जैसी स्थिति का सफल प्रबंधन केवल गोलियों और दवाओं पर निर्भर नहीं करता। इसमें मरीज की अपनी अनुशासित दिनचर्या और परिजनों का निरंतर सहयोग बराबरी की भूमिका निभाता है। मरीज के लिए जरूरी है कि वह सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करे, प्रतिदिन पर्याप्त नींद ले और मानसिक तनाव को कम करने वाले सकारात्मक उपाय अपनाए। डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई न्यूरोलॉजिकल दवाओं का सेवन सही वक्त पर करना अनिवार्य है। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के दवाओं को बीच में बंद करना अथवा उनकी खुराक में खुद से फेरबदल करना मरीज की सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। दौरा पड़ने पर क्या करें और किन बातों से बचें यदि परिवार में किसी सदस्य को अचानक दौरा पड़ जाए, तो घबराने या अफरा-तफरी मचाने के बजाय शांत रहकर त्वरित देखभाल करनी चाहिए। मरीज को तुरंत किसी समतल व सुरक्षित स्थान पर एक करवट लिटा देना चाहिए, जिससे सांस की नली में रुकावट न आए। उसके आसपास मौजूद नुकीले, धारदार अथवा कठोर सामान को फौरन हटा दें ताकि झटकों के दौरान उसे कोई चोट न पहुंचे। कई बार लोग अनजाने में मरीज को जबरदस्ती जकड़ने की कोशिश करते हैं या उसके मुंह में चम्मच, कपड़ा या अन्य वस्तुएं ठूंसने लगते हैं, ऐसी गलतियां बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। कुछ आपात स्थितियों में तत्काल अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी हो जाता है। यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक खिंच जाए, एक दौरा खत्म होते ही तुरंत दूसरा दौरा पड़ जाए, अथवा मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हो रही हो, तो बिना किसी देरी के नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करना चाहिए। वहीं अगर किसी इंसान को जीवन में पहली बार इस प्रकार का दौरा आया है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। ऐसे में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपूर्ण परीक्षण कराना चाहिए, क्योंकि हर प्रकार का दौरा मिर्गी का ही संकेत नहीं होता। समय रहते सटीक जांच, नियमित उपचार और स्वजनों का संवेदनशील रवैया मरीज को एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जीने में पूरी मदद करता है। इसका आप पर असर यह जानकारी मिर्गी के मरीजों और उनके परिवारों को जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने और आपात स्थिति से निपटने में सीधी मदद करती है। • मरीजों के लिए: सोने और जागने का एक सख्त समय तय करें ताकि मस्तिष्क की विद्युत तरंगें स्थिर रहें। दवाओं को हमेशा निर्धारित समय पर लें और डॉक्टर से पूछे बिना खुराक में कोई बदलाव न करें। • परिवार के सदस्यों के लिए: दौरा पड़ने पर मरीज को जबरदस्ती पकड़ने या मुंह में कुछ डालने की गलती न करें। मरीज को तुरंत सुरक्षित जगह पर करवट से लिटाएं और आसपास की कठोर चीजें हटा दें। • आपातकालीन स्थिति में: यदि दौरा 5 मिनट से अधिक समय तक खिंचे तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल ले जाएं। सांस लेने में दिक्कत होने या दोबारा दौरा पड़ने पर भी तुरंत इमरजेंसी मदद लेना जरूरी है। • पहली बार दौरे पर: यदि किसी व्यक्ति को जीवन में पहली बार दौरा पड़ा है तो उसे नजरअंदाज न करके तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं। समय पर जांच होने से यह साफ हो जाता है कि दौरा मिर्गी का है या किसी अन्य शारीरिक समस्या का। ऐसा क्यों हुआ मिर्गी से जूझ रहे लोगों में नींद न मिलने और मानसिक दबाव के चलते दौरे तेज होने के पीछे स्नायुतंत्र और दैनिक दिनचर्या से जुड़े कई प्रमुख कारण होते हैं। • मस्तिष्क की विद्युत तरंगों में अस्थिरता: नींद की गंभीर कमी दिमाग के न्यूरॉन्स के कामकाज को असंतुलित कर देती है। सामान्य विद्युत गतिविधि बाधित होने से मस्तिष्क में अनियंत्रित संकेत उत्पन्न होते हैं, जो सीधे दौरे को सक्रिय कर देते हैं। • तनाव के कारण दिनचर्या का टूटना: लगातार मानसिक चिंता रहने से खान-पान और विश्राम का चक्र पूरी तरह बिखर जाता है। इस मानसिक दबाव के बीच मरीज अक्सर अपनी नियमित दवाइयां लेना भूल जाते हैं, जिससे दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। • तंत्रिका तंत्र की अति-संवेदनशीलता: हर मरीज का शरीर तनाव और थकान के प्रति अलग प्रतिक्रिया देता है। जब तंत्रिका तंत्र लगातार दबाव में रहता है, तो दौरे की सीमा घट जाती है और छोटे से व्यवधान से भी दौरा पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. क्या तनाव और नींद की कमी सीधे तौर पर मिर्गी की बीमारी पैदा करते हैं? नहीं, तनाव और नींद की कमी अपने आप में मिर्गी का मूल कारण नहीं हैं। हालांकि, जिन लोगों को पहले से मिर्गी की समस्या है, उनमें ये दोनों कारक दौरे पड़ने की आशंका को काफी बढ़ा देते हैं। 2. नींद पूरी न होने पर दिमाग पर क्या असर पड़ता है? पर्याप्त नींद न मिलने से मस्तिष्क की सामान्य विद्युत गतिविधि प्रभावित होती है। इससे मिर्गी के मरीजों में दौरे को रोकने वाली स्थिरता कमजोर पड़ जाती है। 3. दौरा पड़ने की स्थिति में मरीज की मदद कैसे करनी चाहिए? मरीज को घबराने के बजाय सुरक्षित जगह पर एक करवट लिटा देना चाहिए और आसपास की नुकीली चीजें हटा देनी चाहिए। उसे जबरदस्ती पकड़ना या मुंह में कोई वस्तु डालना बिल्कुल नहीं चाहिए। 4. मिर्गी का दौरा आने पर तुरंत डॉक्टर या अस्पताल कब जाना चाहिए? यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक चले, सांस लेने में परेशानी हो या दोबारा दौरा पड़ जाए, तो बिना देर किए तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। 5. क्या हर तरह का दौरा मिर्गी का ही संकेत होता है? नहीं, हर दौरा मिर्गी के कारण नहीं पड़ता। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, तो सही कारण जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है। https://trendkia.com/health/adhuri-ninda-aura-manasika-dabava-se-teja-ho-sakate-hain-mirgi-ke-daure-janie-neurologist-ki-salaha-55371 TrendKia — Har trend, sabse pehle.