# एम्स के डॉक्टर की चेतावनी: पटाखे से स्किन जलने पर भूलकर भी न लगाएं तेल या टूथपेस्ट, जानें क्या है सही तरीका

> दिवाली पर पटाखों से जलने की दुर्घटनाओं पर एम्स के डॉक्टर ने जरूरी सलाह दी है। जली हुई त्वचा पर घरेलू नुस्खे आजमाने से घाव गहरा हो सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/aiims-ke-doctor-ki-chetavani-patakhe-se-skin-jalane-para-bhulakara-bhi-na-lagaen-tela-ya-toothpaste-57843 · **Language:** Hindi
**Tags:** एम्स डॉक्टर, दिवाली स्वास्थ्य, बर्न इंजरी, पटाखे सुरक्षा, प्राथमिक उपचार

दीपावली का पावन पर्व अपने साथ रोशनी और खुशियां लेकर आता है, लेकिन इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस उत्सव में आतिशबाजी और मिठाइयों का विशेष महत्व होता है, विशेषकर बच्चे पटाखों के प्रति बेहद उत्साहित रहते हैं। हालांकि, इन्हें जलाने के दौरान बरती जाने वाली छोटी सी चूक भी सीधे अस्पताल का रास्ता दिखा सकती है। गलत तरीके से पटाखे चलाने के कारण हर साल सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल होकर चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचते हैं। आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं में सल्फर, बारूद और कई भारी धातुएं जैसे हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं, जो न केवल हमारे पर्यावरण और संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि यदि इसकी चिंगारी से त्वचा झुलस जाए तो स्थिति और भी अधिक गंभीर हो जाती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की आपात स्थिति में लोग अक्सर ऐसे घरेलू उपाय अपना लेते हैं जो समस्या को और ज्यादा बढ़ा देते हैं।

आम तौर पर शरीर का कोई हिस्सा जलने पर लोग तुरंत उस पर शहद, चीनी, क्रीम, बर्नल या अन्य घरेलू सामग्रियां लगा देते हैं। इसके अलावा लोग टूथपेस्ट, तेल, मक्खन, घी और हल्दी जैसी चीजें भी प्रभावित हिस्से पर मलने लगते हैं। देश के कुछ इलाकों में तो जली हुई त्वचा पर गोबर तक लगाने की प्रथा देखने को मिलती है। चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से ये सभी उपाय पूरी तरह से गलत और नुकसानदायक हैं। इन चीजों के इस्तेमाल से परिणाम और अधिक खतरनाक हो सकते हैं और जलन त्वचा की गहराई तक समा जाती है। इस प्रकार के देसी नुस्खे किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं हैं और इनसे पूरी तरह बचना चाहिए। एम्स के प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव एंड बर्न इंज्युरी डिपार्टमेंट के हेड और प्रोफेसर डॉ. मनीष सिंघल ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है।

डॉ. मनीष सिंघल ने संस्थान के सोशल मीडिया पेज के माध्यम से साझा किया कि ये गलत उपाय त्वचा के भीतर तक गहरे जख्म पैदा कर देते हैं, जिन्हें ठीक होने में लंबा समय लगता है। इन नुस्खों के कारण जलन और पीड़ा सतह तक सीमित रहने के बजाय अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि दिवाली का त्योहार हर्षोल्लास का पर्व है और इसे अवश्य मनाना चाहिए, लेकिन आतिशबाजी करते समय बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। उनके पास हर साल ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं जो आतिशबाजी के दौरान बुरी तरह झुलस चुके होते हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि पटाखे जलाते समय तमाम सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और बच्चों को कभी भी अकेले आतिशबाजी न करने दें।

सुरक्षित तरीके से आतिशबाजी करने के लिए कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कभी भी पटाखों को अपने हाथों में पकड़कर सीधे जलाने की कोशिश न करें। आजकल पोटाश गन के जरिए आतिशबाजी करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो कि बेहद खतरनाक है और इससे गंभीर चोटें आ सकती हैं। हमेशा खुले स्थानों पर ही पटाखे जलाएं और सुरक्षा के लिहाज से अपने पास पानी से भरी बाल्टी अवश्य रखें। आतिशबाजी करते वक्त सिंथेटिक या कृत्रिम कपड़ों को पहनने से पूरी तरह परहेज करें। इसके अलावा, घरों में जलाए जाने वाले दीयों को मुख्य द्वारों, कपड़ों या सोफों जैसी ज्वलनशील चीजों के पास बिल्कुल न रखें।

यदि दुर्भाग्यवश किसी की त्वचा आतिशबाजी या आग की चपेट में आकर जल जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए। त्वचा के जले हुए हिस्से पर कम से कम पंद्रह से बीस मिनट तक नल का साधारण और लगातार बहता हुआ पानी डालते रहना चाहिए। ऐसा करने से घाव त्वचा के भीतर तक गहरा नहीं हो पाता है। पानी के अलावा उस पर किसी भी अन्य प्रकार की वस्तु लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। प्रभावित हिस्से पर लगातार पानी डालने के बाद उसे किसी साफ सूती कपड़े से हल्के से लपेट लें और बिना देर किए तुरंत नजदीकी चिकित्सालय लेकर जाएं ताकि पेशेवर इलाज मिल सके।

## इसका आप पर असर
पटाखों से त्वचा के जलने की स्थिति में गलत घरेलू उपाय अपनाने से संक्रमण और घाव का खतरा काफी बढ़ जाता है।

- **भारत में:** त्योहारी सीजन के दौरान आतिशबाजी करते समय बरती जाने वाली जरा सी भी लापरवाही गंभीर शारीरिक क्षति का कारण बन सकती है। सही प्राथमिक उपचार की जानकारी न होने पर मामूली सी जलन भी गहरे और लंबे समय तक रहने वाले जख्म में बदल सकती है।
- **दिल्ली में:** एम्स जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों की यह चेतावनी स्थानीय स्तर पर लोगों को गलत घरेलू नुस्खों से बचने और तुरंत सही चिकित्सीय सहायता लेने के लिए जागरूक करती है। आपात स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना गंभीर जटिलताओं को रोकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पटाखों से होने वाली गंभीर बर्न और स्किन इंजुरी के पीछे कई विशिष्ट कारण और अनुचित आदतें जुड़ी होती हैं, जिन्हें विशेषज्ञ खतरनाक मानते हैं।

- **रासायनिक तत्व:** आतिशबाजी के जलने से निकलने वाले धुएं में सल्फर, बारूद और कई जहरीली भारी धातुएं होती हैं जो सीधे संपर्क में आने पर त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं।
- **गलत हैंडलिंग:** लोगों द्वारा पटाखों को सीधे हाथों में रखकर जलाना या पोटाश गन जैसी खतरनाक चीजों का उपयोग करना गंभीर दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनता है।
- **मिथ्या धारणाएं:** जली हुई त्वचा पर टूथपेस्ट, तेल, मक्खन या गोबर जैसी चीजें लगाने की पुरानी सामाजिक आदतें घाव को और अधिक गहरा कर देती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पटाखे से स्किन जलने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जले हुए हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगातार साधारण नल का बहता हुआ पानी डालना चाहिए।

### 2. जली हुई त्वचा पर क्या नहीं लगाना चाहिए?
त्वचा जलने पर टूथपेस्ट, तेल, मक्खन, घी, हल्दी, शहद या बर्नल जैसी चीजें कभी नहीं लगानी चाहिए।

### 3. डॉ. मनीष सिंघल किस संस्थान से संबंधित हैं?
डॉ. मनीष सिंघल नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव एंड बर्न इंज्युरी डिपार्टमेंट के हेड और प्रोफेसर हैं।

### 4. पटाखे जलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पटाखों को खुले स्थान पर जलाएं, पास में पानी की बाल्टी रखें, सिंथेटिक कपड़े न पहनें और बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।

### 5. पानी डालने के बाद जली हुई जगह पर क्या करना चाहिए?
पानी डालने के बाद प्रभावित हिस्से को साफ सूती कपड़े से लपेटकर तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।

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