# एम्स की रिसर्च में खुलासा: ध्यान से दिमाग का नेटवर्क होता है मजबूत, सिर्फ 10-15 मिनट काफी

> एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग ने SAGE ओपन मेडिसिन जर्नल में एक महत्वपूर्ण शोध प्रकाशित किया है जो साबित करता है कि नियमित ध्यान दिमाग के प्रमुख नेटवर्क को अधिक कुशल बनाता है। रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट का ध्यान भी मानसिक स्वास्थ्य पर सार्थक असर डाल सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-06-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/aiims-ki-risarcha-men-khulasa-dhyana-se-dimaga-ka-netavarka-hota-hai-majabuta-sirpha-10-15-minata-kaphi-2317 · **Language:** Hindi
**Tags:** ध्यान, मस्तिष्क स्वास्थ्य, एम्स रिसर्च, मेडिटेशन, मानसिक स्वास्थ्य, न्यूरोलॉजी, ब्रेन नेटवर्क, योग विज्ञान

ध्यान और योग को भारत में सदियों से मानसिक शांति और स्वास्थ्य का स्रोत माना जाता रहा है, लेकिन इनके पीछे के वैज्ञानिक आधार पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग ने एक ऐसा अध्ययन किया है जो इन सभी सवालों का ठोस वैज्ञानिक जवाब देता है। शोध में पाया गया कि नियमित ध्यान दिमाग के आंतरिक नेटवर्क को वास्तव में अधिक कुशल बनाता है, जिससे एकाग्रता, फोकस और मानसिक नियंत्रण में सुधार आता है।

## SAGE ओपन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई यह रिसर्च
एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग का यह अध्ययन SAGE ओपन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने MEG यानी मेग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी नामक उन्नत ब्रेन इमेजिंग तकनीक की मदद से ध्यान के दौरान दिमाग की गतिविधि को दर्ज किया। इस अध्ययन में तीन समूहों को शामिल किया गया था जिनमें लंबे समय से ध्यान का अभ्यास करने वाले अनुभवी लोग, नए शुरुआती अभ्यासकर्ता और ध्यान न करने वाले लोग शामिल थे। नतीजे यह बताते हैं कि जो लोग लंबे समय से ध्यान करते आ रहे हैं, उनके दिमाग के विभिन्न हिस्सों के बीच संचार कहीं ज्यादा मजबूत और व्यवस्थित पाया गया।

## प्रो. मंजरी त्रिपाठी ने क्या कहा
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी ने इस शोध के बारे में बताया, "मानव मस्तिष्क जटिल कनेक्शन्स के नेटवर्क के जरिए काम करता है। ध्यान इन नेटवर्क्स की कुशलता बढ़ाता है और मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर तरीके से जुड़ने में मदद करता है, जिससे ब्रेन अपनी पूरी दक्षता और क्षमता से काम करता है।"

उन्होंने "स्मॉल-वर्ल्ड ब्रेन नेटवर्क" नाम के एक खास पैटर्न की भी व्याख्या की। यह पैटर्न दिमाग को लोकल प्रोसेसिंग और लंबी दूरी के संचार के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है, जिससे जटिल कार्यों को तेजी से अंजाम देना संभव होता है। प्रो. त्रिपाठी के अनुसार ब्रेन नेटवर्क्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी ध्यान, भावनात्मक नियंत्रण और मानसिक तनाव के प्रबंधन में भी मदद करती है।

## इन तीन प्रमुख ब्रेन नेटवर्क्स पर हुआ अध्ययन
शोधकर्ताओं ने दिमाग के तीन बड़े नेटवर्क्स पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया:

- **डिफॉल्ट मोड नेटवर्क** जो आत्म-चिंतन और आंतरिक विचारों से जुड़ा है।
- **फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क** जो निर्णय लेने और संज्ञानात्मक नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।
- **अटेंशन नेटवर्क** जो एकाग्रता बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

## अनुभवी ध्यानकर्ताओं में सबसे प्रभावशाली बदलाव
रिसर्च के नतीजे बेहद दिलचस्प निकले। लंबे समय से ध्यान करने वाले अनुभवी लोगों में अटेंशन नेटवर्क की कार्यक्षमता खासतौर पर बेहतर पाई गई, और यह सुधार बीटा फ्रीक्वेंसी रेंज में सबसे ज्यादा दिखा जो सतर्कता और फोकस से जुड़ी है। लेकिन उत्साहजनक बात यह है कि नए शुरुआती अभ्यासकर्ताओं में भी फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क में सकारात्मक बदलाव देखे गए। इसका मतलब यह है कि ध्यान के फायदे अभ्यास की शुरुआत में ही मिलने लगते हैं।

## अस्थायी नहीं, दिमाग में होता है स्थायी बदलाव
शोधकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि ध्यान केवल कुछ देर की मानसिक शांति देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग की कार्यप्रणाली में दीर्घकालिक सुधार लाता है। हालांकि इन बदलावों की गहराई इस बात पर निर्भर करती है कि अभ्यास कितने समय से हो रहा है, व्यक्ति का अनुभव कितना है और वह किस विधि से ध्यान करता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच यह अध्ययन ध्यान को एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय के रूप में स्थापित करता है। व्यस्त दिनचर्या में रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट का ध्यान भी दिमाग को स्वस्थ और कुशल बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

## इसका आप पर असर
- **आपके लिए क्या मायने रखता है:** रोज महज 10 से 15 मिनट का ध्यान दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है, यह अब भारत की एक शीर्ष चिकित्सा संस्था द्वारा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया जा चुका है।
- मानसिक तनाव, एकाग्रता की कमी या भावनात्मक अस्थिरता से जूझने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए ध्यान एक सस्ता, सुलभ और प्रमाणित विकल्प है जिसे आज से ही शुरू किया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह शोध किसने किया और कहां प्रकाशित हुआ?
यह अध्ययन एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग ने किया और SAGE ओपन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ।

### 2. शोध में किस तकनीक का उपयोग किया गया?
शोधकर्ताओं ने MEG यानी मेग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल किया, जो ध्यान के दौरान दिमाग की गतिविधि को दर्ज करती है।

### 3. अध्ययन में किन लोगों को शामिल किया गया था?
अनुभवी ध्यानकर्ता, नए शुरुआती अभ्यासकर्ता और बिना किसी ध्यान अभ्यास वाले लोग, तीनों समूहों को इस अध्ययन में शामिल किया गया था।

### 4. ध्यान से दिमाग के कौन से तीन नेटवर्क प्रभावित होते हैं?
डिफॉल्ट मोड नेटवर्क, फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क और अटेंशन नेटवर्क पर ध्यान का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया।

### 5. क्या नए अभ्यासकर्ताओं को भी ध्यान से फायदा होता है?
हां, शुरुआत करने वालों में भी फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क में सकारात्मक बदलाव पाए गए, जो यह बताता है कि ध्यान के फायदे अभ्यास की शुरुआत में ही मिलने लगते हैं।

### 6. रोज कितने मिनट ध्यान करना लाभदायक है?
शोधकर्ताओं के अनुसार व्यस्त दिनचर्या में भी रोज 10 से 15 मिनट का ध्यान दिमाग को स्वस्थ और कुशल बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

### 7. इस शोध की अगुवाई किसने की?
एम्स नई दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता हैं।

### 8. ध्यान का असर अस्थायी होता है या स्थायी?
शोधकर्ताओं का मानना है कि नियमित ध्यान से दिमाग में स्थायी सुधार आता है, हालांकि इसके प्रभाव अभ्यास की अवधि, अनुभव के स्तर और ध्यान की विधि पर निर्भर करते हैं।

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