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  "type": "article",
  "title": "अखबार में गर्म खाना लपेटना बन सकता है गंभीर बीमारियों की वजह, विशेषज्ञ बोले लिवर-किडनी को खतरा",
  "summary": "सड़क किनारे के ठेलों से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी तक, गर्म और तैलीय खाद्य पदार्थों को अखबार या पुराने कागजों में लपेटकर देना एक आम चलन है, लेकिन यह सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अखबार की स्याही में मौजूद हानिकारक रसायन और भारी धातुएं भोजन में मिलकर लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।",
  "content": "भारत में गरमा-गरम समोसे और पकौड़ों का स्वाद लेना एक प्रिय परंपरा है, खासकर बारिश या ठंड के मौसम में। आमतौर पर, लोग इन स्वादिष्ट व्यंजनों को अखबार या किसी सामान्य कागज में लपेटकर खाते हैं, जो सड़क किनारे के स्टॉलों से लेकर बड़े बाजारों तक एक आम दृश्य है। हालांकि, यह सुविधाजनक लगने वाली आदत आपकी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है, जिससे कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।\n\nस्वास्थ्य विशेषज्ञ की चेतावनी\nजय प्रभा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना में इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. गिरीश गंगवाल ने TrendKia से बात करते हुए बताया कि गर्म खाद्य पदार्थ जब अखबार के संपर्क में आते हैं, तो स्याही और उसमें मौजूद रासायनिक तत्व भोजन में घुल जाते हैं। ये तत्व शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।\n\nबढ़ती पैकेजिंग की लागत और स्वास्थ्य जोखिम\nडॉ. गिरीश गंगवाल ने बताया कि पहले खाद्य पदार्थों को अखबार या किसी भी सामान्य पेपर में लपेटकर देने का चलन इतना आम नहीं था, लेकिन अब यह तेजी से बढ़ रहा है। कई दुकानदार पैकेजिंग की लागत को कम करने के लिए समोसे, पकौड़े और अन्य खाने की चीजें सीधे अखबार में परोस देते हैं। यहां तक कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी अक्सर पैकेजिंग के लिए रियूज किए गए कागज का इस्तेमाल करते हैं। यह आदत उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।\n\nदोहरे खतरे: रसायन और सूक्ष्मजीव\nडॉ. गंगवाल के अनुसार, अखबार में खाना लपेटने से दो मुख्य तरीकों से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। पहला खतरा अखबार पर छपी स्याही में मौजूद रासायनिक तत्वों से होता है, और दूसरा, अखबार के कई लोगों के संपर्क में आने से होता है। अखबार छपाई से लेकर आप तक पहुंचने तक विभिन्न चरणों में कई प्रकार के बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आता है। जब भोजन ऐसे अखबार के सीधे संपर्क में आता है, तो ये सूक्ष्मजीव भोजन में स्थानांतरित होकर पेट और पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं पैदा कर सकते हैं।\n\nअखबार की स्याही में मौजूद हानिकारक धातुएं\nडॉ. गंगवाल ने इस बात पर जोर दिया कि अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में कई हानिकारक रसायन और भारी धातुएं शामिल होती हैं। इनमें अक्सर लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसी धातुएं प्रमुखता से उपयोग की जाती हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे कागज के संपर्क में आए भोजन का सेवन करता है, तो ये विषैले तत्व धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगते हैं।\n\nलीवर, किडनी और भ्रूण पर गंभीर प्रभाव\nशरीर में ये रासायनिक तत्व धीरे-धीरे अंगों के आसपास जमा होते जाते हैं। समय के साथ, जब इनकी मात्रा बढ़ती है, तो ये लीवर, किडनी और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। डॉ. गंगवाल ने यह भी बताया कि लेड जैसी भारी धातुएं गर्भवती महिलाओं में फीटस (भ्रूण) के विकास के लिए भी अत्यंत हानिकारक मानी जाती हैं, जिससे गंभीर जन्म दोष या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।\n\nगर्म और तैलीय भोजन से बढ़ता है खतरा\nडॉ. गिरीश गंगवाल के अनुसार, जब गर्म या अधिक तेल वाला भोजन अखबार पर रखा जाता है, तो गर्मी और नमी के कारण स्याही में मौजूद रासायनिक तत्व भोजन में आसानी से घुलने लगते हैं। इसी वजह से यह सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार के भोजन को अखबार में रखने या परोसने से बचना चाहिए। कभी-कभी भोजन और अखबार के बीच की नमी भी भारी धातुओं को खाने में स्थानांतरित कर सकती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ जाते हैं।\n\nसुरक्षित पैकेजिंग के विकल्प\nखाद्य पदार्थों को सुरक्षित रूप से पैक करने के लिए डॉ. गंगवाल फूड-ग्रेड बटर पेपर, फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री या केले के पत्तों का उपयोग करने का सुझाव देते हैं। ये विकल्प भोजन को रसायनों और सूक्ष्मजीवों के संपर्क से बचाते हैं। यदि किसी कारणवश बाहरी कागज का उपयोग करना अनिवार्य हो, तो यह सुनिश्चित करें कि भोजन और उस कागज के बीच बटर पेपर या केले का पत्ता अवश्य रखा जाए, ताकि भोजन का सीधा संपर्क अखबार या किसी अन्य सामान्य कागज से न हो।\n\nइसका आप पर असर\n• पूरे भारत में: अपनी दैनिक खाद्य आदतों की समीक्षा करें और गर्म या तैलीय भोजन को अखबार में लपेटने से बचें, खासकर स्ट्रीट फूड या ऑनलाइन डिलीवरी लेते समय, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे हो सकते हैं।\n• पटना में: स्थानीय निवासियों को जय प्रभा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. गिरीश गंगवाल की चेतावनी पर विशेष ध्यान देना चाहिए और सुरक्षित फूड पैकेजिंग के विकल्पों पर जोर देना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अखबार में गर्म भोजन लपेटना क्यों हानिकारक है?\nअखबार में गर्म या तैलीय भोजन लपेटना हानिकारक है क्योंकि गर्मी और नमी के कारण स्याही में मौजूद हानिकारक रसायन और भारी धातुएं भोजन में घुल जाती हैं। इसके अतिरिक्त, अखबार कई सूक्ष्मजीवों और बैक्टीरिया के संपर्क में आता है जो भोजन में स्थानांतरित हो सकते हैं।\n\n2. कौन से हानिकारक रसायन अखबार की स्याही में पाए जाते हैं?\nअखबार की स्याही में अक्सर लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसी भारी धातुएं और अन्य हानिकारक रसायन पाए जाते हैं।\n\n3. अखबार में लिपटे भोजन का लंबे समय तक सेवन करने से क्या स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?\nलंबे समय तक ऐसे भोजन का सेवन करने से ये हानिकारक तत्व शरीर में जमा हो सकते हैं, जिससे लीवर, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। लेड जैसी धातुएं गर्भवती महिलाओं में भ्रूण के विकास के लिए भी हानिकारक होती हैं।\n\n4. गर्म भोजन के लिए सुरक्षित पैकेजिंग के क्या विकल्प हैं?\nसुरक्षित विकल्पों में फूड-ग्रेड बटर पेपर, फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री या केले के पत्ते शामिल हैं। यदि सामान्य कागज का उपयोग करना पड़े, तो भोजन और कागज के बीच बटर पेपर या केले का पत्ता रखें।\n\n5. किस विशेषज्ञ ने यह चेतावनी जारी की है?\nजय प्रभा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना में इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. गिरीश गंगवाल ने यह चेतावनी जारी की है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-06-19",
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    "खाद्य सुरक्षा",
    "अखबार की स्याही",
    "स्वास्थ्य जोखिम",
    "लिवर खराब",
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