अलवर में विशाल सीपीआर ट्रेनिंग अभियान से पुलिसकर्मी बन रहे हैं जीवनरक्षक, रेड क्रॉस की ऐतिहासिक पहल नवनिर्मित दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे गंभीर सड़क हादसों को देखते हुए, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की अलवर शाखा ने हजारों पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को जीवनरक्षक सीपीआर तकनीक सिखाने का व्यापक अभियान शुरू किया है। उत्तर और पश्चिम भारत के बीच यातायात को तेज और सुगम बनाने वाला नवनिर्मित दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे इन दिनों गंभीर और जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा केंद्र भी बनता जा रहा है। हाईवे पर लगातार हो रहे इन हादसों को देखते हुए राजस्थान के अलवर जिले में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने एक बेहद अहम और बड़े स्तर की पहल शुरू की है। संस्था का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों को आपातकालीन स्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए प्रशिक्षित करना है। जब भी किसी दूरस्थ हाईवे पर कोई दुर्घटना होती है, तो वहां तुरंत एम्बुलेंस या मेडिकल सहायता का पहुंचना अक्सर संभव नहीं होता। ऐसे में मौके पर मौजूद पुलिस और स्थानीय लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) जैसी जीवनरक्षक तकनीकों में माहिर किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना के बाद शुरुआती पलों में ही मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सके। गरीबों और जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं आपातकालीन जीवनरक्षक अभियानों के साथ-साथ, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की अलवर शाखा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के लिए भी उम्मीद की एक बड़ी किरण बनी हुई है। संस्था द्वारा नियमित रूप से पूरे जिले में नि:शुल्क चिकित्सा और स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन विशेष शिविरों का मकसद उन गरीब लोगों तक बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है जो महंगे अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते। इन आयोजनों में हृदय रोग, अस्थि रोग, और अन्य कई गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल होते हैं। वे मरीजों की गहनता से जांच करते हैं और उन्हें बीमारी से जुड़ी सही सलाह के साथ-साथ जरूरी दवाइयां भी बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराते हैं। सेवा के इसी निस्वार्थ भाव और समर्पण को आगे बढ़ाते हुए, संस्था के पदाधिकारियों ने महसूस किया कि केवल बीमारियों का इलाज ही काफी नहीं है, बल्कि अचानक होने वाली दुर्घटनाओं में भी तत्काल राहत पहुंचाने की एक मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए, जिसने सीपीआर ट्रेनिंग के इस विशाल अभियान की नींव रखी। एक्सप्रेसवे की चुनौती और 'गोल्डन आवर' की अहमियत अक्सर देखा गया है कि सड़क दुर्घटना होने पर सबसे पहले मौके पर डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ नहीं, बल्कि गश्त कर रही स्थानीय पुलिस की टीम पहुंचती है। अलवर से गुजरने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे लंबे रास्तों पर दूरी और ट्रैफिक के कारण एम्बुलेंस को पहुंचने में समय लग जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ हमेशा 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के तुरंत बाद का पहला एक घंटा) के महत्व पर जोर देते हैं, क्योंकि इसी समय के दौरान सही इलाज मिलने से पीड़ित की जान बचने की सबसे अधिक संभावना होती है। यदि किसी हादसे में घायल व्यक्ति के दिल की धड़कन रुक जाए या सांसें थम जाएं, तो बिना किसी प्राथमिक उपचार के एम्बुलेंस का दस मिनट भी इंतजार करना दिमाग के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसीलिए रेड क्रॉस ने सीधे तौर पर पुलिस बल को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया है, ताकि वे एम्बुलेंस के आने तक मरीज को मौके पर ही जरूरी चिकित्सा सहायता देकर उसकी सांसे टूटने से बचा सकें। बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग की रणनीतिक तैयारी इस दूरदर्शी योजना का नेतृत्व इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी अलवर शाखा के चेयरमैन डॉ. एस.सी. मित्तल कर रहे हैं। उनका मानना है कि केवल जागरूकता फैलाना काफी नहीं है, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण देना समय की सबसे बड़ी मांग है। संस्था के सचिव डॉ. रूप सिंह ने इस पूरे अभियान की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। उनके मुताबिक, हाईवे से जुड़े लगभग 19 पुलिस थानों में विशेष टीमों ने जाकर पुलिसकर्मियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर के बारे में प्रशिक्षित किया है। इन गहन प्रशिक्षण सत्रों में जवानों को सिखाया जाता है कि कैसे एक बेहोश व्यक्ति की स्थिति को समझना है, उसकी सांस नली को कैसे खोलना है और छाती पर सही तरीके से दबाव (चेस्ट कंप्रेशन) कैसे देना है। इस प्रशिक्षण के बाद हाईवे पुलिस अब केवल हादसे की जगह को सुरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे घायल व्यक्ति के शरीर को तब तक जीवित रखने का प्रयास करते हैं जब तक विशेषज्ञ डॉक्टर वहां न पहुंच जाएं। डॉ. कुमुद गुप्ता का 15 सालों का निस्वार्थ मिशन इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस प्रशिक्षण अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय मुख्य ट्रेनर और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद गुप्ता को जाता है। डॉ. गुप्ता का जीवनरक्षक तकनीकों को लेकर जुनून इस हाईवे अभियान से बहुत पहले से चला आ रहा है। वह पिछले 15 से भी अधिक वर्षों से जनस्वास्थ्य और आपातकालीन तैयारियों के लिए लगातार काम कर रही हैं। यह जानकर हैरानी होती है कि साल 2011 से लेकर आज तक उन्होंने अकेले ही 16,000 से अधिक लोगों को सीपीआर की सफल ट्रेनिंग दी है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों, परिवहन विभाग के ड्राइवरों, होमगार्ड के जवानों और आम नागरिकों को इस अहम काम के लिए प्रशिक्षित किया है। हाल ही में डॉ. गुप्ता ने अलवर के ठेकड़ा गांव में स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में दो दिवसीय विशेष शिविर का नेतृत्व किया। इस शिविर में उन्होंने 340 प्रशिक्षु आरक्षियों (कांस्टेबलों) को बीएलएस और सीपीआर की व्यावहारिक ट्रेनिंग देकर भविष्य के पुलिसकर्मियों को तैयार किया है। औद्योगिक श्रमिकों और आम नागरिकों तक पहुंच हालांकि यह अभियान मुख्य रूप से पुलिस ट्रेनिंग पर केंद्रित है, लेकिन रेड क्रॉस अपनी इस पहल का विस्तार आम जनता के बीच भी तेजी से कर रहा है। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जहां बड़ी मशीनों के बीच काम करने वाले सैकड़ों फैक्ट्री वर्कर्स के लिए हमेशा दुर्घटनाओं का जोखिम बना रहता है। इन श्रमिकों को आपातकालीन फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार) का प्रशिक्षण देकर उनके कार्यस्थलों को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है। सेंट जॉन एम्बुलेंस इंडिया, अलवर शाखा के चेयरमैन गिरीश गुप्ता ने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने से सुरक्षा का दायरा कई गुना बढ़ जाता है। जिले में अब तक 15,000 से अधिक आम नागरिकों को इन सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से जीवन रक्षक कौशल सिखाया जा चुका है। इस पहल के पीछे का सिद्धांत बहुत स्पष्ट है कि आपात स्थिति केवल अस्पतालों में नहीं आती, इसलिए जान बचाने का कौशल भी केवल डॉक्टरों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। अचानक आने वाले हार्ट अटैक से निपटने की तैयारी डॉ. मित्तल का यह विजन केवल हाईवे हादसों को रोकने तक सीमित नहीं है। अलवर में रेड क्रॉस सोसाइटी का असली लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहां हर व्यक्ति सीपीआर तकनीक का जानकार हो। अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) किसी भी समय और कहीं भी आ सकता है, चाहे आप घर पर हों, किसी मॉल में हों, या सफर कर रहे हों। यदि हर घर और हर कार्यालय में कम से कम एक व्यक्ति को बेसिक लाइफ सपोर्ट आता हो, तो क्षेत्र में दिल के दौरे से होने वाली मौतों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संस्था की मौजूदा सड़क सुरक्षा योजना लगातार एम्बुलेंस ड्रिल, व्यावहारिक सीपीआर और प्राथमिक उपचार को समाज का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है। आम नागरिकों और पुलिस जवानों को सक्षम रक्षक बनाने की यह निस्वार्थ पहल सामाजिक सेवा का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत को पूरा कर रही है। इसका आप पर असर • भारत में: किसी भी आपात स्थिति या अचानक दिल का दौरा पड़ने पर सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीकें मौके पर मौजूद आम लोगों को भी किसी की जान बचाने में सक्षम बनाती हैं। • अलवर में: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों और स्थानीय निवासियों के लिए यह राहत की बात है कि अब पुलिसकर्मी हादसों के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार देने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित हैं। सवाल-जवाब 1. अलवर में सीपीआर ट्रेनिंग का यह अभियान कौन चला रहा है? यह विशाल प्रशिक्षण अभियान इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की अलवर शाखा द्वारा चलाया जा रहा है, जिसका नेतृत्व चेयरमैन डॉ. एस.सी. मित्तल कर रहे हैं। 2. इस जीवनरक्षक ट्रेनिंग के लिए किसे चुना गया है? इस अभियान के तहत मुख्य रूप से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास स्थित थानों के पुलिसकर्मियों, औद्योगिक श्रमिकों और आम नागरिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 3. मुख्य ट्रेनर डॉ. कुमुद गुप्ता ने अब तक कितने लोगों को प्रशिक्षित किया है? वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद गुप्ता साल 2011 से लेकर अब तक अकेले 16,000 से अधिक लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। 4. हाल ही में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में कितने जवानों ने हिस्सा लिया? अलवर के ठेकड़ा स्थित पीटीएस में आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर में 340 प्रशिक्षु कांस्टेबलों ने बेसिक लाइफ सपोर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। प्रेरणा और सबक रेड क्रॉस और डॉ. कुमुद गुप्ता के अभियान से अहम सीख: • व्यक्तिगत प्रयास बड़ा बदलाव ला सकता है: डॉ. कुमुद गुप्ता ने अकेले ही 16,000 से अधिक लोगों को जीवनरक्षक तकनीकों में प्रशिक्षित कर यह साबित कर दिया है कि एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प समाज में कितना गहरा असर डाल सकता है। • समस्या का व्यावहारिक समाधान: एक्सप्रेसवे पर एम्बुलेंस के पहुंचने में होने वाली देरी की समस्या को केवल देखने के बजाय, संस्था ने पुलिसकर्मियों को ही 'फर्स्ट रेस्पॉन्डर' बनाकर एक बेहद व्यावहारिक समाधान निकाला। • समाज के प्रति जिम्मेदारी: केवल अपना काम करने के बजाय, अपनी विशेषज्ञता का उपयोग समाज की भलाई और लोगों की जान बचाने के लिए करना एक सच्ची लीडरशिप को दर्शाता है। https://trendkia.com/health/alwar-men-vishala-cpr-training-abhiyana-se-pulisakarmi-bana-rahe-hain-jivanarakshaka-red-cross-ki-aitihasika-pahala-9021 TrendKia — Har trend, sabse pehle.