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  "type": "article",
  "title": "अंबाला छावनी के आयुर्वेदाचार्य की चेतावनी, त्योहारों में मिलावटी मिठाइयों से दूर रहने के नियम",
  "summary": "त्योहारी सीजन में मिलावटी खोया, नकली पनीर और घातक रासायनिक रंगों वाली मिठाइयों से सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। अंबाला छावनी अस्पताल के डॉक्टर ने मौसम बदलाव और त्योहारों के दौरान खान-पान की खास सावधानियों पर सलाह दी है।",
  "content": "त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में तरह-तरह की रंग-बिरंगी और आकर्षक मिठाइयों की दुकानें सज जाती हैं। मिठाइयों की यह चमक लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित करती है, लेकिन इस बाहरी सुंदरता के पीछे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी छिपा हो सकता है। नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र वर्मा ने त्योहारी सीजन में खान-पान को लेकर लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी है। उनके अनुसार, बाजार में मिलने वाला मिलावटी खोया, नकली पनीर और अत्यधिक केमिकल वाले रंगों से तैयार की गई मिठाइयां खुशियों के माहौल को अचानक बीमारी में बदल सकती हैं।\n\nमौसम परिवर्तन और ऋतु संधि का शरीर पर प्रभाव\nमौसम के बदलाव का मानव शरीर और पाचन तंत्र पर सीधा असर पड़ता है। वर्षा ऋतु के दौरान तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। कभी तेज बारिश तो कभी अचानक गर्मी और उमस के कारण शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इस तरह के मौसम में वायरल इंफेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। आयुर्वेद शास्त्र में मौसम परिवर्तन की इस समयावधि को ऋतु संधि के नाम से जाना जाता है। ऋतु संधि का अर्थ दो ऋतुओं के मिलने का समय होता है। किसी भी नए मौसम की शुरुआत होने के 15 दिन पहले और पुरानी ऋतु समाप्त होने के 15 दिन बाद तक खान-पान में विशेष परहेज और सावधानी रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।\n\nचटक रंगों वाली मिठाइयों के खतरे और प्राकृतिक विकल्प\nत्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में लाल, पीली, हरी और अन्य गहरे चटक रंगों वाली मिठाइयों की मांग अचानक काफी बढ़ जाती है। देखने में ये मिठाइयां भले ही बहुत सुंदर लगें, लेकिन इनमें इस्तेमाल किए जाने वाले कृत्रिम और रासायनिक रंग सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। इन कृत्रिम रंगों के अधिक सेवन से बचने के लिए बाजार की मिठाइयों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। यदि संभव हो तो त्योहारों पर बाजार के बजाय घर पर ही शुद्ध सामग्रियों से मिठाइयां तैयार करना सबसे उत्तम मार्ग है। अगर घर में मिठाई बनाते समय रंग देना अनिवार्य लगे, तो कृत्रिम केमिकल रंगों के स्थान पर केसर का उपयोग करना चाहिए। केसर के प्रयोग से मिठाई को सुंदर प्राकृतिक रंग मिलने के साथ-साथ उसका स्वाद और पौष्टिकता भी बढ़ जाती है।\n\nबाजार से मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता की जांच और खोये से बचाव\nयदि घर पर मिठाई बनाना संभव न हो और बाजार से ही खरीदारी करनी पड़े, तो पेठा अन्य मिठाइयों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर और सुपाच्य विकल्प माना जा सकता है। हालांकि, पेठा खरीदते समय भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उसमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम रंग न मिलाया गया हो। मिठाई का चयन करते समय उसकी चमक या गहरे रंग से प्रभावित होने के बजाय हमेशा उसकी वास्तविक गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी चाहिए। त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए बाजार में नकली और अत्यधिक सफेद खोये की आपूर्ति बढ़ जाती है। बहुत ज्यादा सफेद दिखने वाले खोये में मिलावट की प्रबल आशंका रहती है। इसलिए खोया या खोये से बनी मिठाइयां केवल भरोसेमंद और विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदनी चाहिए।\n\nडायबिटीज मरीजों के लिए खान-पान के विशेष निर्देश\nडायबिटीज अथवा मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के लिए त्योहारों का समय अतिरिक्त सावधानी का होता है। ऐसे मरीजों को बाजार की अत्यधिक मीठी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर मिठाइयों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। यदि त्योहार के अवसर पर मिठाई खाने की तीव्र इच्छा हो, तो घर पर तैयार किए गए बिना चीनी वाले विकल्पों को चुनना चाहिए। घर पर तैयार किया गया फीका खोया या बिना चीनी मिलाकर बनाई गई दूध की बर्फी बाजार की अत्यधिक मीठी मिठाइयों की तुलना में स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है। फिर भी, डायबिटीज के मरीजों को अपनी व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही किसी खाद्य पदार्थ का सेवन करना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।\n\nत्योहारों के बाद अस्पताल ओपीडी में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं\nत्योहारों की समाप्ति के तुरंत बाद अस्पतालों की ओपीडी में पेट से संबंधित विकारों और पाचन संबंधी शिकायतों के मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जाता है। त्योहार के उत्साह और उमंग में लोग अक्सर अपने खान-पान पर नियंत्रण खो देते हैं, जिसका सीधा असर पाचन क्रिया पर पड़ता है। बाहर के तैयार भोजन का सेवन सीमित करना, बासी भोजन से बचना और ताजा बना खाना खाना इस मौसम में बेहद जरूरी है। इसके साथ ही मिठाइयों की मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखना चाहिए। थोड़ा सा संयम और सावधानी बरतकर त्योहार की खुशियों को बीमारी के खतरे से बचाया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nत्योहारी सीजन में मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के लिए डॉक्टर द्वारा जारी की गई यह सलाह आपकी और आपके परिवार की सेहत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।\n\n• भारत में: त्योहारों के दौरान देशभर में मिठाइयों में मिलावट का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पेट की बीमारियां और फूड पॉइजनिंग हो सकती है। रासायनिक रंगों और मिलावटी खोये से बचने के लिए प्राकृतिक विकल्पों का चयन करें।\n• अंबाला में: नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी के डॉक्टर ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने और केवल विश्वसनीय दुकानों से ही मिठाई खरीदने की सलाह दी है। इससे त्योहार के बाद ओपीडी में पेट संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों से राहत मिलेगी।\n• डायबिटीज मरीजों के लिए: बाजार की अधिक चीनी वाली मिठाइयों के स्थान पर घर में बनी फीकी खोया या बिना चीनी की दूध बर्फी का सीमित सेवन करें। इससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने के खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।\n• सामान्य उपभोक्ताओं के लिए: अत्यधिक चमकदार या चटक रंगों वाली मिठाइयां खरीदने से बचें और यदि संभव हो तो घर पर ही केसर जैसी प्राकृतिक चीजों से मिठाई बनाएं। इससे कृत्रिम केमिकल्स के सेवन से बचाव होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. त्योहारों में किन मिठाइयों से दूर रहने की सलाह दी गई है?\nअत्यधिक चटक रंगों (लाल, पीली, हरी) वाली मिठाइयों, अत्यधिक सफेद दिखने वाले संदिग्ध खोये और मिलावटी पनीर से बनी मिठाइयों से दूर रहने की सलाह दी गई है।\n\n2. आयुर्वेद में ऋतु संधि क्या है और इस दौरान क्या सावधानी रखनी चाहिए?\nदो मौसमों के बदलने के संधि काल को ऋतु संधि कहते हैं। इस दौरान मौसम की शुरुआत और समाप्ति के 15-15 दिन खान-पान में विशेष परहेज रखना चाहिए।\n\n3. बाजार से मिठाई खरीदते समय सबसे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?\nबिना कृत्रिम रंग वाला पेठा बाजार की अन्य मिठाइयों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है।\n\n4. डायबिटीज के मरीज त्योहारों पर मिठाई की जगह क्या खा सकते हैं?\nडायबिटीज के मरीज घर पर बनी फीकी खोया या बिना चीनी वाली दूध की बर्फी का सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-27",
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