अंबाला के डॉक्टर ने बताया, बालकनी के नीले फूल से कैसे बनाएं तनाव घटाने वाली हर्बल चाय अंबाला के आयुर्वेदिक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के मुताबिक नीले फूलों वाले अपराजिता के पौधे से बनने वाला हर्बल काढ़ा तनाव, पाचन और सेहत के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए। घर की बालकनी, आंगन या गार्डन में नीले फूलों वाला जो पौधा अक्सर सिर्फ सजावट के लिए लगाया जाता है, उसका नाम अपराजिता है। यह पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, सेहत से जुड़े पारंपरिक नुस्खों में उतना ही पुराना भी है। इन दिनों इसके फूलों से बनने वाला काढ़ा सोशल मीडिया और सेहत की चर्चाओं में खूब छाया हुआ है, क्योंकि पानी में डालते ही ये फूल अपना गहरा नीला रंग छोड़ देते हैं और पेय देखने में भी आकर्षक लगने लगता है। कुछ लोग इसे तनाव कम करने, पाचन दुरुस्त रखने और शरीर को एंटीऑक्सीडेंट पहुंचाने के लिए पीते हैं। अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में तैनात आयुर्वेदिक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के अनुसार, अपराजिता के फूल का इस्तेमाल परंपरागत रूप से कई तरीकों से किया जाता रहा है। उनका कहना है कि इसके फूलों से बना हल्का काढ़ा मानसिक थकान और तनाव के समय राहत का एहसास दिला सकता है, हालांकि इसे किसी बीमारी का इलाज समझकर नहीं अपनाना चाहिए। लगातार स्क्रीन टाइम से बढ़ती थकान में सहारा आजकल लगातार काम, मोबाइल और स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय के चलते बहुत से लोगों में मानसिक थकान की शिकायत बढ़ती जा रही है। ऐसे में कुछ लोग रोजाना पी जाने वाली सामान्य चाय या काढ़े की जगह अपराजिता की हर्बल ड्रिंक को विकल्प के तौर पर अपनाते हैं। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि दिनभर की भागदौड़ के बाद इसे पीने से कुछ लोगों को मन शांत होने और मानसिक थकान हल्की महसूस होने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को लगातार तनाव, बेचैनी, नींद न आने की दिक्कत या मानसिक परेशानी बनी रहती है, तो उसे सिर्फ घर के इस काढ़े पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह हर्बल ड्रिंक किसी गंभीर मानसिक समस्या का समाधान नहीं है। घर पर कैसे तैयार करें अपराजिता का काढ़ा डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के मुताबिक अपराजिता का काढ़ा बनाना बेहद आसान है। सबसे पहले किसी बर्तन में करीब एक से दो कप पानी लेकर उसे अच्छी तरह उबाल लें। इसके बाद उबलते पानी में चार से पांच ताजे या सूखे अपराजिता के फूल डाल दें। इस पानी को धीमी आंच पर करीब पांच से दस मिनट तक उबालना चाहिए, जिसके बाद इसका रंग गहरा नीला दिखाई देने लगता है। रंग बदलने के बाद इसे छानकर सीधे कप में डाल लें। अगर स्वाद बढ़ाना हो तो इसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाया जा सकता है। ध्यान रहे कि काढ़े को बहुत ज्यादा गाढ़ा बनाने की कोई जरूरत नहीं है, हल्का काढ़ा ही पीने के लिए ठीक रहता है। एंटीऑक्सीडेंट गुणों से सेहत को मिलता है सहारा डॉक्टर जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि अपराजिता के फूलों में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं, जिसकी वजह से इसे शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर के अंदर फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं, और यही वजह है कि अपराजिता से बना यह हर्बल काढ़ा सामान्य सेहत के लिए उपयोगी समझा जाता है। मौसम बदलने के दौरान लोग अक्सर शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए तरह-तरह के प्राकृतिक पेय पीते हैं और अपराजिता का काढ़ा भी उन्हीं में गिना जाता है। हालांकि डॉक्टर वर्मा साफ करते हैं कि सिर्फ इस काढ़े को पीने भर से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह मजबूत नहीं हो जाती, इसलिए इसे किसी चमत्कारी उपाय की तरह नहीं देखना चाहिए। पाचन संबंधी दिक्कतों में पारंपरिक इस्तेमाल पाचन से जुड़ी सामान्य परेशानियों में भी अपराजिता की हर्बल चाय का पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के अनुसार खाना खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होने या सामान्य पाचन गड़बड़ी की स्थिति में हल्की हर्बल काढ़ा कुछ लोगों को राहत दे सकती है। लेकिन अगर पेट में दर्द बना रहे, लगातार गैस बने, उल्टी या दस्त जैसी शिकायत हो या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे, तो घरेलू नुस्खे पर भरोसा करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। डॉक्टर वर्मा इस बात पर जोर देते हैं कि अपराजिता का काढ़ा किसी बीमारी की तय दवा की जगह कभी नहीं ले सकता, इसे केवल सीमित मात्रा में सामान्य सेहत पेय के तौर पर ही लिया जाना चाहिए। वजन और ब्लड शुगर को लेकर दावे, पर सतर्क रहना जरूरी वजन घटाने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के मामले में भी अपराजिता के काढ़े को लेकर लोगों के बीच काफी उत्सुकता देखी जा रही है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि सोशल मीडिया पर इसे मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने से जोड़कर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन किसी को भी सिर्फ इस काढ़े के भरोसे अपना वजन या शुगर लेवल नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जो मरीज डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें अपनी नियमित दवाएं बंद करके इस काढ़े का सेवन शुरू नहीं करना चाहिए। डॉक्टर वर्मा के मुताबिक सही खान-पान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह ही वजन और शुगर को काबू में रखने का असली आधार होने चाहिए, अपराजिता का काढ़ा ज्यादा से ज्यादा एक सहायक पेय की भूमिका निभा सकता है। हर किसी के लिए एक जैसा सुरक्षित नहीं, बरतें सावधानी अपराजिता का काढ़ा भले ही एक प्राकृतिक पेय है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसा उपयुक्त हो। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा की सलाह है कि जो लोग पहली बार इसका सेवन कर रहे हैं, उन्हें बहुत कम मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए। अगर सेवन के बाद किसी तरह की एलर्जी, खुजली, जलन या और कोई परेशानी महसूस हो, तो तुरंत इसे पीना बंद कर देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को अपराजिता का काढ़ा शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। कुल मिलाकर अपराजिता का काढ़ा सेहत को सहारा देने वाला एक पारंपरिक पेय जरूर है, लेकिन इसे किसी दवा या इलाज का विकल्प मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसका आप पर असर अगर आप भी अपराजिता का काढ़ा आजमाने की सोच रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह मानकर ही शुरुआत करना फायदेमंद रहेगा। • शुरुआत हमेशा कम मात्रा से करें: पहली बार पीने वालों को एक छोटे कप से शुरुआत करनी चाहिए, ज्यादा मात्रा में सीधे सेवन न करें। इससे शरीर पर पड़ने वाले असर का अंदाजा लगाना आसान रहेगा। • दवा का विकल्प न समझें: यह काढ़ा किसी भी बीमारी की दवा की जगह नहीं ले सकता। जो लोग डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी की नियमित दवा ले रहे हैं, वे अपनी दवा बंद करके इसे शुरू न करें। • एलर्जी के लक्षण पर ध्यान दें: सेवन के बाद खुजली, जलन या किसी तरह की एलर्जी महसूस हो तो तुरंत पीना बंद कर दें। यह हर व्यक्ति के शरीर पर एक जैसा असर नहीं करता। • गर्भवती महिलाएं और बच्चे सावधान रहें: गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बिना सलाह के सेवन शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। • वजन और शुगर कंट्रोल के लिए अकेले न रहें निर्भर: वजन घटाने या ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए सिर्फ इस काढ़े पर भरोसा न करें। खान-पान, व्यायाम और डॉक्टर की सलाह को ही मुख्य आधार बनाएं। सवाल-जवाब 1. अपराजिता का काढ़ा किन चीजों से तैयार होता है? इसे पानी में चार से पांच ताजे या सूखे अपराजिता के फूल डालकर पांच से दस मिनट तक धीमी आंच पर उबालकर तैयार किया जाता है। 2. काढ़े का रंग नीला क्यों हो जाता है? फूलों को पानी में उबालने पर वे अपना प्राकृतिक नीला रंग पानी में छोड़ देते हैं, जिससे पूरा काढ़ा नीला दिखने लगता है। 3. क्या अपराजिता का काढ़ा किसी बीमारी का इलाज है? नहीं, डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के मुताबिक इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए, यह सिर्फ एक सामान्य सेहत पेय है। 4. क्या डायबिटीज के मरीज इसे पी सकते हैं? डायबिटीज के मरीजों को अपनी नियमित दवा बंद करके इस काढ़े पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे लेना चाहिए। 5. क्या यह काढ़ा तनाव कम करने में मदद करता है? डॉक्टर वर्मा के मुताबिक कुछ लोगों को इसे पीने से मानसिक थकान कम महसूस होती है, लेकिन लगातार तनाव या नींद की समस्या में विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। 6. किन लोगों को इसे पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और नियमित दवाएं लेने वालों को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। https://trendkia.com/health/ambala-ke-doktara-ne-bataya-balakani-ke-nile-phula-se-kaise-banaen-tanava-ghatane-vali-harbala-chaya-27957 TrendKia — Har trend, sabse pehle.