# अंबाला में मौसम बदलते ही बच्चों की सेहत पर मंडराया खतरा, होम्योपैथिक डॉक्टर ने दिए खास उपाय

> अंबाला में मौसम में बदलाव और ठंड बढ़ने के चलते बच्चों में सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की डॉ. रजिता ने बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और कपड़ों को लेकर जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/ambala-mein-mausam-badalte-hi-bachchon-ki-sehat-par-mandraya-khatra-50930 · **Language:** Hindi
**Tags:** अंबाला, बच्चों की सेहत, मौसम में बदलाव, सर्दी-खांसी, वायरल बुखार, डॉ. रजिता, होम्योपैथी

अंबाला में अक्टूबर के अंतिम दिनों के साथ ही मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और लगातार बढ़ती ठंड ने अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। दिन के समय तापमान में उतार-चढ़ाव और सुबह-शाम की सिहरन बच्चों के नाजुक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। ऐसे हालात में बच्चों को वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और त्वचा की कई तरह की समस्याओं से महफूज रखना माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस मौसमी बदलाव के बीच बच्चों की दिनचर्या और सेहत को दुरुस्त रखने के लिए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने खानपान, पहनावे और साफ-सफाई को लेकर बेहद उपयोगी और जरूरी सुझाव साझा किए हैं ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।

## बच्चों की सेहत पर पड़ता है बदलते मौसम का सीधा असर
इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में सेवाएं दे रहीं होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों में इस विशेष मौसम के दौरान बैक्टीरियल संक्रमण और वायरल बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं काफी आम हो जाती हैं। यही वजह है कि अभिभावकों को इस दौरान बच्चों की सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है। छोटे बच्चों के मामले में विशेष तौर पर उनके रोजमर्रा के पहनावे, खानपान की आदतों और व्यक्तिगत साफ-सफाई पर बहुत बारीकी से ध्यान देने की जरूरत होती है ताकि संक्रमण को समय रहते रोका जा सके।

## त्वचा की सुरक्षा और सही कपड़ों का चयन है जरूरी
डॉ. रजिता ने आगे बताया कि जैसे-जैसे ठंड का असर बढ़ता है, बच्चों को हमेशा फुल बाजू के यानी पूरी बांह के कपड़े पहनाने चाहिए ताकि वे ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बच सकें। इसके साथ ही त्वचा से जुड़ी परेशानियों से बचाने के लिए बच्चों को हमेशा हल्के गुनगुने पानी से ही नहलाना चाहिए। स्नान कराने के तुरंत बाद उनकी कोमल त्वचा पर अच्छी गुणवत्ता वाला मॉइश्चराइजर लगाना बेहद फायदेमंद होता है, जिससे त्वचा का रूखापन और खुजली जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौसम की ठंडक को देखते हुए केवल दिन के पहनावे पर ही नहीं, बल्कि उनके सोने की व्यवस्था पर भी पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए। रात के वक्त जब ठंड महसूस हो, तो बच्चों को उचित रूप से गर्म कपड़े पहनाने के साथ ही ओढ़ने के लिए पर्याप्त कंबल की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि वे रातभर सुरक्षित और गर्म रहें।

## खानपान में रखें सावधानी, जंक फूड से बनाएं दूरी
बच्चों को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाए रखने में उनके खानपान की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। डॉ. रजिता ने माता-पिता को यह खास सलाह दी है कि बच्चों को बाहर के अनहेल्दी खाने, अत्यधिक जंक फूड और बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। उनकी दैनिक डाइट में हमेशा घर पर तैयार किया गया ताजा, सादा और पौष्टिक भोजन ही शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा फल और सब्जियों जैसी चीजों को हमेशा अच्छी तरह पानी से धोने के बाद ही बच्चों को खाने के लिए देना चाहिए ताकि किसी भी तरह के हानिकारक तत्व शरीर में न जाएं।

त्योहारी सीजन के दौरान खानपान में होने वाली गड़बड़ियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय बाजार की मिठाइयों और तमाम तली-भुनी चीजों का चलन काफी बढ़ जाता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि बच्चों को बाजार की मिठाइयों और अत्यधिक चीनी या मीठे वाले खाद्य पदार्थों से बचाया जाए। यदि बच्चों को कुछ मीठा देना ही हो, तो यह बेहतर होगा कि घर पर पूरी साफ-सफाई के साथ तैयार की गई मिठाइयां ही सीमित मात्रा में बच्चों को परोसी जाएं ताकि उनकी सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े।

## हाथ धोने की आदत और खानपान की शुद्धता
साफ-सफाई के महत्व पर जोर देते हुए चिकित्सक ने कहा कि जब बच्चे बाहर खेलकूद कर वापस घर लौटें, तो उनके हाथ और पैर अच्छी तरह से जरूर धुलवाने चाहिए। इसके अलावा किसी भी तरह का खाना खाने से पहले और किसी भी खाद्य वस्तु को हाथ लगाने से पहले बच्चों को साबुन से हाथ धोने की अच्छी आदत डालनी चाहिए। गंदे हाथों के जरिए विभिन्न प्रकार के कीटाणु बहुत आसानी से बच्चों के शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने यह भी सलाह दी कि जो फल और सब्जियां फ्रिज में रखी जाती हैं, उन्हें बच्चों को खाने के लिए देने से पहले उनकी उचित तरीके से सफाई और भंडारण की जांच कर लेनी चाहिए। इसके अलावा पकाया हुआ भोजन भी बच्चों को परोसने से पहले अच्छी तरह से गर्म किया जाना चाहिए ताकि वह पूरी तरह सुरक्षित रहे। पीने के पानी को लेकर उन्होंने कहा कि बच्चों को हमेशा साफ, शुद्ध और सुरक्षित पेयजल ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए और पानी का तापमान बच्चे की शारीरिक सुविधा के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.

## ठंडी हवा से बचाव और पर्याप्त आराम है आवश्यक
डॉ. रजिता ने बदलते मौसम के इस दौर में बच्चों को ठंडी हवा के थपेड़ों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी पूरी दिनचर्या को एक अनुशासन में व्यवस्थित रखने की भी सलाह दी है। सुबह के सुहाने समय में बच्चों को हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चे भरपूर और पर्याप्त आराम करें। हालांकि कमरे के अंदर एसी या पंखे के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा कि इनका प्रयोग हमेशा कमरे के मौजूदा तापमान और बच्चे की व्यक्तिगत सुविधा को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए ताकि ठंड या गर्मी का असंतुलन उनकी सेहत पर भारी न पड़े।

## इसका आप पर असर
बदलते मौसम के बीच बच्चों की सेहत को लेकर बरती गई जरा सी लापरवाही भी उन्हें बीमार कर सकती है, इसलिए माता-पिता को तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए।

- **भारत में:** देश भर में मौसम के इस बदलाव के दौर में बच्चों को वायरल संक्रमण और सर्दी-खांसी से बचाने के लिए खानपान और कपड़ों पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे बाहर के जंक फूड से दूर रहें और हमेशा ताजा व पौष्टिक भोजन ही खाएं।
- **अंबाला में:** अंबाला के स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों को विशेष रूप से सुबह और शाम के समय बच्चों को ठंडी हवा से बचाने के लिए फुल बाजू के कपड़े पहनाने चाहिए। बच्चों को विद्यालय या बाहर भेजने से पहले साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें और किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

## ऐसा क्यों हुआ
अक्टूबर के अंतिम दिनों में तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव और सुबह-शाम की ठंडक के कारण बच्चों का कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र मौसमी बदलाव के अनुकूल तुरंत ढल नहीं पाता है। इस प्राकृतिक बदलाव के दौरान विभिन्न प्रकार के वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से फैलते हैं, जिससे बच्चों में सर्दी-खांसी और बुखार की समस्या पैदा होती है।

- **तापमान में बदलाव:** दिन और रात के तापमान में अचानक आने वाले अंतर के कारण बच्चों के शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता है, जिससे वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
- **प्रतिरक्षा तंत्र की कमजोरी:** बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम विकसित होती है, जिसके कारण वे ठंडी हवा और पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
- **संक्रमण का प्रसार:** त्योहारी सीजन और बदलते मौसम के दौरान बाहर की खुली खाद्य सामग्री तथा साफ-सफाई में कमी के कारण बैक्टीरिया और कीटाणु आसानी से बच्चों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अंबाला में बच्चों की सेहत को लेकर यह सलाह किसने दी है?
यह सलाह अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने दी है।

### 2. कितनी उम्र के बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है?
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस दौरान वायरल बुखार और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक देखने को मिलता है।

### 3. बच्चों को त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाने के लिए क्या करना चाहिए?
बच्चों को हल्के गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए और नहाने के बाद उनकी त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए।

### 4. बच्चों के खानपान में किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए?
बच्चों को जंक फूड और बाजार की मिठाइयों से दूर रखना चाहिए तथा घर का बना ताजा व पौष्टिक भोजन ही देना चाहिए।

### 5. खाना खाने से पहले क्या आदत डालनी चाहिए?
खाना खाने से पहले और किसी भी खाद्य पदार्थ को छूने से पहले बच्चों को अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए।

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