अरबी के पत्तों में छुपा है सेहत का खजाना, डॉक्टर से जानें बनाने का सही तरीका और फायदे फाइबर, आयरन और कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर अरबी के पत्ते सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। जानिए अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर जितेंद्र वर्मा से इसके लाभ और सुरक्षित पकाने की विधि। बचपन में अक्सर रसोई से आती बेसन की सोंधी खुशबू और खट्टे-तीखे स्वाद से अंदाजा हो जाता था कि घर में अरबी के पत्तों के पतौड़ या पात्रे बने हैं। पारंपरिक भारतीय रसोइयों में बेहद लोकप्रिय यह डिश न केवल अपने बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद गुणकारी मानी जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अरबी के पत्तों को कई अनोखे तरीकों से तैयार करके खाया जाता है। इसमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्व शरीर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने और कई तरह की शारीरिक समस्याओं को दूर रखने में मदद कर सकते हैं। सही तरीके से पकाने पर यह हरी सब्जी स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संतुलन प्रदान करती है। पोषण से भरपूर हैं अरबी के पत्ते अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि अरबी के पत्तों में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जिन लोगों के नियमित खान-पान में हरी सब्जियों और फाइबर की कमी रहती है, उनके लिए संतुलित आहार के रूप में अरबी के पत्तों का सेवन बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। ये सभी पोषक तत्व शरीर के आंतरिक अंगों को मजबूती प्रदान करने, चयापचय को सुधारने और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पाचन क्रिया में सुधार और वजन नियंत्रण अरबी के पत्तों में पाया जाने वाला डाइटरी फाइबर पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखने में मुख्य भूमिका निभाता है। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा के अनुसार, फाइबर से भरपूर भोजन कब्ज की समस्या को दूर करने और आंतों की सफाई में काफी मददगार होता है। यह आंतों की गतिशीलता को बढ़ाता है जिससे मल त्याग आसान हो जाता है। इसके अलावा, भोजन के बाद पेट को लंबे समय तक भरा रखने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने वाली डाइट का भी एक अच्छा हिस्सा बन सकता है। जब पेट भरा महसूस होता है, तो बार-बार असमय खाने की आदत पर रोक लगती है। फाइबर युक्त आहार भोजन के बाद ब्लड शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकने में भी सहायक होता है। हालांकि, जिन लोगों को गैस या अपच की पुरानी परेशानी रहती है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए फायदेमंद शरीर में रक्त निर्माण और ऑक्सीजन के परिवहन के लिए आयरन और फोलेट अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं, जो अरबी के पत्तों में अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जबकि फोलेट लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इन्हें भोजन में शामिल करना पोषण के दृष्टिकोण से काफी अच्छा है, लेकिन एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति होने पर केवल पतौड़ या किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टरी सलाह और उचित उपचार लेना जरूरी है। हड्डियों की मजबूती और ब्लड प्रेशर का संतुलन अरबी के पत्तों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी खनिज पाए जाते हैं। कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने तथा मांसपेशियों के समुचित कामकाज के लिए अनिवार्य हैं। वहीं, पोटैशियम युक्त आहार शरीर में सोडियम के हानिकारक प्रभाव को कम करके सामान्य रक्तचाप बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, जो लोग पहले से गुर्दे (किडनी) की बीमारी या अनियंत्रित ब्लड प्रेशर संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें अपने आहार में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। प्रतिरक्षा प्रणाली और त्वचा की सुरक्षा विटामिन A, विटामिन C और विभिन्न एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण अरबी के पत्ते शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। विटामिन C मौसमी संक्रमणों से बचाव करने और त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक होता है, जबकि एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं। डॉक्टर जितेंद्र वर्मा का कहना है कि हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर को जरूरी पोषण तो देती हैं, लेकिन किसी भी एक सब्जी को किसी बीमारी के शर्तिया इलाज या पक्के बचाव के रूप में नहीं देखना चाहिए। गले की खराश से बचने के लिए पकाने का सही तरीका अरबी के पत्तों के कई फायदे हैं, लेकिन इन्हें कभी भी कच्चा या अधपका नहीं खाना चाहिए। कच्चे पत्तों में कैल्शियम ऑक्सलेट नाम का तत्व होता है, जिसके बारीक क्रिस्टल गले में तेज जलन, खुजली और असहजता महसूस करा सकते हैं। इसे पूरी तरह बेअसर करने और स्वादिष्ट पतौड़ बनाने के लिए सही विधि अपनाना बेहद जरूरी है • सफाई और तैयारी: अरबी के पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और उनके पीछे मौजूद कड़े डंठल तथा मोटी नसों को चाकू से काटकर अलग कर दें। • बेसन का घोल: एक बर्तन में बेसन लें और उसमें अजवाइन, हल्दी, नमक, हींग और कसा हुआ अदरक मिलाकर थोड़ा गाढ़ा घोल बना लें। अजवाइन और हींग पाचन में सुधार करते हैं। • परत चढ़ाना और रोल बनाना: पत्तों के उल्टे हिस्से पर बेसन का घोल समान रूप से फैलाएं। एक के ऊपर एक कई पत्ते रखकर उन्हें किनारों से मोड़ें और कसकर गोल रोल बना लें। • भाप में पकाना: तैयार रोल्स को स्टीमर या जालीदार बर्तन में रखकर 20 से 25 मिनट तक अच्छी तरह भाप में पकाएं ताकि कैल्शियम ऑक्सलेट पूरी तरह नष्ट हो जाए। • तड़का या तलना: ठंडा होने के बाद रोल के गोल टुकड़े काट लें। इन्हें हल्के तेल में तलकर या राई-कढ़ी पत्ते का तड़का लगाकर संतुलित मात्रा में खाएं। चाहें तो इन्हें ग्रेवी में डालकर सब्जी भी बनाई जा सकती है। इसका आप पर असर अरबी के पत्तों को सही ढंग से आहार में शामिल करने से आपकी रोजमर्रा की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। • पाचन स्वास्थ्य में सुधार: इसमें मौजूद उच्च फाइबर कब्ज की शिकायत दूर करता है और आंतों की सफाई में मदद करता है। • एनीमिया से बचाव में सहायता: आयरन और फोलेट का प्राकृतिक स्रोत होने के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को सुदृढ़ बनाता है। • ब्लड प्रेशर नियंत्रण: पोटैशियम की मात्रा शरीर में तरल संतुलन और सामान्य रक्तचाप बनाए रखने में सहायक है। • हड्डियों की मजबूती: कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन हड्डियों के घनत्व को बेहतर बनाए रखने में सहयोग देता है। • सावधानी की आवश्यकता: किडनी के मरीजों या गंभीर गैस की समस्या वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अरबी के पत्तों को बिना सही तरीके से पकाए खाने से गले में खराश और जलन क्यों होती है, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद है। • कैल्शियम ऑक्सलेट की मौजूदगी: अरबी के कच्चे या अधपके पत्तों में सूक्ष्म कैल्शियम ऑक्सलेट के क्रिस्टल होते हैं जो मुंह और गले के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। • ताप का प्रभाव: 20 से 25 मिनट तक लगातार भाप देने से ये ऑक्सलेट क्रिस्टल टूट जाते हैं और पत्तियां पूरी तरह सुरक्षित हो जाती हैं। • बेसन और मसालों का संयोजन: बेसन, हींग और अजवाइन का मिश्रण न केवल ऑक्सलेट के प्रभाव को कम करने में मदद करता है बल्कि पचने में भी आसान बनाता है। सवाल-जवाब 1. अरबी के पत्ते खाने से गले में खुजली क्यों होती है? अरबी के कच्चे या अधपके पत्तों में कैल्शियम ऑक्सलेट के क्रिस्टल होते हैं, जो गले में जलन और खुजली पैदा करते हैं। 2. अरबी के पत्तों को सुरक्षित बनाने के लिए कितनी देर पकाना चाहिए? पत्तों को तैयार बेसन घोल के साथ कम से कम 20 से 25 मिनट तक भाप में अच्छी तरह पकाना चाहिए। 3. क्या अरबी के पत्ते एनीमिया की बीमारी को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं? नहीं, इनमें आयरन जरूर होता है लेकिन एनीमिया के इलाज के लिए केवल एक सब्जी पर निर्भर न रहकर चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए। 4. किन लोगों को अरबी के पत्ते खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? किडनी रोग, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर या अत्यधिक अपच की समस्या से पीड़ित लोगों को डॉक्टरी सलाह के बाद ही इनका सेवन करना चाहिए। https://trendkia.com/health/arbi-ke-patton-men-chhupa-hai-sehata-ka-khajana-doctor-se-janen-banane-ka-sahi-tarika-aura-phayade-32126 TrendKia — Har trend, sabse pehle.