अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती रफ्तार, दिल्ली-एनसीआर बना देश का सबसे बड़ा केंद्र दिल्ली-एनसीआर में आधुनिक रोबोटिक सर्जरी की मांग तेजी से बढ़ी है, जहां 2021 से 2025 के बीच ऐसे ऑपरेशनों में करीब पांच गुना इजाफा दर्ज किया गया। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोट की मदद से होने वाले ऑपरेशनों की स्वीकार्यता मरीजों और डॉक्टरों के बीच लगातार मजबूत हो रही है। देश की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की गति सबसे तेज दर्ज की गई है। कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव, छोटे चीरे और ऑपरेशन के बाद अस्पताल से शीघ्र छुट्टी मिलने की सुविधा के चलते मरीज अब पारंपरिक शल्य चिकित्सा के मुकाबले रोबोटिक प्रक्रियाओं को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव राजधानी क्षेत्र को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के सबसे बड़े हब के रूप में स्थापित कर रहा है। सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी सम्मेलन में सामने आए आंकड़े राजधानी में आयोजित सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र के विस्तार पर विस्तृत आंकड़े साझा किए। सफदरजंग अस्पताल में यूरोलॉजी, रोबोटिक और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख और आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि भारत इस समय रोबोट आधारित शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उनके अनुसार देश 2030 तक इस आधुनिक सर्जिकल विधा में विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्रसव और गर्भावस्था से जुड़े मामलों में रोबोटिक सर्जरी के इस्तेमाल पर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी। चार वर्षों में पांच गुना बढ़ा रोबोटिक प्रक्रियाओं का दायरा मैक्स अस्पताल में मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक और रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रमुख तथा सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी इंडिया के आयोजन चेयरमैन डॉ. विवेक बिंदल ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर के 39 चिकित्सा संस्थानों में उन्नत रोबोटिक प्रणालियां काम कर रही हैं। इनमें से 11 अस्पताल ऐसे हैं जहां एक से अधिक रोबोटिक यूनिट्स स्थापित हैं। आंकड़ों के अनुसार 2021 में इस क्षेत्र में जहां कुल 2,257 रोबोटिक ऑपरेशन हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,594 और 2023 में 5,024 तक पहुंच गई। इसके बाद 2024 में 7,595 तथा 2025 में यह आंकड़ा 10,937 दर्ज हुआ, जो महज चार वर्षों में लगभग पांच गुना बढ़ोतरी दर्शाता है। किन बीमारियों के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल वर्ष 2025 के दौरान दिल्ली-एनसीआर में हुए कुल रोबोटिक ऑपरेशनों में गैर-कैंसर से जुड़ी सामान्य सर्जरी की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत रही। इसके बाद मूत्र रोग संबंधी प्रक्रियाओं यानी यूरोलॉजी की हिस्सेदारी 30.2 प्रतिशत, स्त्री रोग संबंधी यानी गायनेकोलॉजी मामलों की 22.1 प्रतिशत और कैंसर से संबंधित सामान्य शल्य चिकित्सा की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त सिर, गर्दन, वक्ष (थोरेसिक) और हृदय से जुड़ी जटिल बीमारियों के उपचार में भी रोबोटिक तकनीक का सफल प्रयोग किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका व्यापक प्रसार हुआ है, जहां 2021 में दर्ज 8,912 मामलों के मुकाबले 2025 में पूरे भारत के भीतर 44,857 रोबोटिक ऑपरेशन पूरे किए गए। टेलीसर्जरी के जरिए दूरस्थ इलाकों तक विशेषज्ञता की पहुंच तकनीकी नवाचार का प्रदर्शन करते हुए वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सर्जिकल दल ने करीब 5,000 किलोमीटर दूर चीन के चेंगदू में मौजूद रोबोटिक कंसोल को भारत से रिमोटली नियंत्रित किया। इस सफल प्री-क्लिनिकल परीक्षण ने साबित किया कि टेलीसर्जरी की मदद से भविष्य में छोटे शहरों, टियर-2 और टियर-3 नगरों के मरीजों को भी बड़े महानगरों के शीर्ष विशेषज्ञों की सेवाएं स्थानीय स्तर पर सुलभ कराई जा सकती हैं। इसका आप पर असर रोबोटिक सर्जरी का तेजी से बढ़ता नेटवर्क मरीजों के लिए सुरक्षित और सटीक इलाज के विकल्प खोल रहा है। • भारत में: देश भर में 2021 से 2025 के बीच 44,857 से अधिक रोबोटिक सर्जरी हो चुकी हैं। इससे जटिल बीमारियों के इलाज में मरीजों को कम दर्द और त्वरित स्वास्थ्य लाभ की सुविधा मिल रही है। • दिल्ली-एनसीआर में: क्षेत्र के 39 अस्पतालों में आधुनिक रोबोटिक सिस्टम उपलब्ध कराए गए हैं। स्थानीय मरीजों को गंभीर ऑपरेशनों के बाद लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ रही है। • मरीजों की रिकवरी: छोटे चीरों के कारण रक्तस्राव बेहद कम होता है और संक्रमण का खतरा घट जाता है। इससे सामान्य दिनचर्या में लौटने का समय काफी कम हो जाता है। • छोटे शहरों को लाभ: सफल टेलीसर्जरी परीक्षणों से दूरदराज के क्षेत्रों में आधुनिक विशेषज्ञता पहुंचने की राह खुली है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के मरीजों को बड़े शहरों में रेफरल की आवश्यकता कम होगी। ऐसा क्यों हुआ रोबोटिक सर्जरी की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का विस्तार और मरीजों के बेहतर अनुभव प्रमुख कारण हैं। • क्लिनिकल लाभ: पारंपरिक शल्य चिकित्सा की तुलना में इसमें चीरे बहुत छोटे लगते हैं और रक्तस्राव न्यूनतम होता है। इस वजह से संक्रमण का जोखिम घटता है और मरीज तेजी से ठीक होते हैं। • अस्पतालों में बुनियादी ढांचे का विस्तार: दिल्ली-एनसीआर के 39 चिकित्सा केंद्रों में आधुनिक रोबोटिक प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें से 11 अस्पतालों में एक से अधिक मशीनें लगाई गई हैं ताकि मांग को पूरा किया जा सके। • विशेषज्ञता का दायरा: जनरल सर्जरी, यूरोलॉजी और गायनेकोलॉजी जैसे विभिन्न विभागों में रोबोटिक प्रणालियों के सटीक परिणामों ने डॉक्टरों का भरोसा बढ़ाया है। इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर 2021 से 2025 के बीच कुल मामलों में पांच गुना तक वृद्धि दर्ज की गई। सवाल-जवाब 1. दिल्ली-एनसीआर में कितने अस्पतालों के पास रोबोटिक सर्जरी सिस्टम मौजूद हैं? दिल्ली-एनसीआर के 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम उपलब्ध हैं, जिनमें से 11 अस्पतालों में एक से अधिक प्रणालियां स्थापित हैं। 2. वर्ष 2025 में दिल्ली-एनसीआर में कुल कितने रोबोटिक ऑपरेशन किए गए? साल 2025 में दिल्ली-एनसीआर में कुल 10,937 रोबोटिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जो 2021 के 2,257 मामलों से करीब पांच गुना अधिक है। 3. रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल सबसे अधिक किन बीमारियों के इलाज में हुआ? साल 2025 में दिल्ली-एनसीआर में 33% मामले बिनाइन जनरल सर्जरी, 30.2% यूरोलॉजी, 22.1% गायनेकोलॉजी और 10% कैंसर से जुड़ी सर्जरी के रहे। 4. क्या प्रसव के मामलों में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग हो रहा है? चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था और डिलीवरी के मामलों में रोबोटिक सर्जरी के उपयोग को लेकर अभी कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। 5. टेलीसर्जरी के परीक्षण में डॉक्टरों ने कितनी दूरी से रोबोट को ऑपरेट किया? मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सर्जनों ने भारत से लगभग 5,000 किलोमीटर दूर चीन के चेंगदू में स्थित रोबोटिक कंसोल को रिमोटली ऑपरेट किया। https://trendkia.com/health/aspatalon-men-robotic-surgery-ki-barhati-raphtara-delhi-ncr-bana-desha-ka-sabase-bara-kendra-43443 TrendKia — Har trend, sabse pehle.