अवशोषण से आगे: स्त्री रोग विशेषज्ञों ने महिलाओं को सैनिटरी पैड के घटकों पर ध्यान देने की सलाह क्यों दी चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन उत्पाद लंबे समय तक संवेदनशील त्वचा के संपर्क में रहते हैं, इसलिए अवशोषण क्षमता के साथ-साथ पैड की सामग्री, सांस लेने योग्य कपड़े और सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। आधुनिक समय में महिलाओं की पीरियड्स संबंधी देखभाल केवल लीकेज रोकने और अधिक अवशोषण क्षमता हासिल करने तक सीमित नहीं रह गई है। स्त्री रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि आप जिन सैनिटरी पैड्स और मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स का उपयोग करती हैं, उनमें किन सामग्रियों और घटकों का प्रयोग किया गया है, यह जानना बेहद आवश्यक है। चूंकि ये उत्पाद महिला के प्रजनन जीवन के एक बड़े हिस्से में संवेदनशील त्वचा के सीधे और लंबे संपर्क में रहते हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा और गुणवत्ता प्राथमिक चिंता बन गई है। त्वचा के अनुकूल मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग हाल के वर्षों में महिला उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखा गया है। अब महिलाएं केवल इस्तेमाल के प्रदर्शन पर ध्यान देने के बजाय त्वचा के स्वास्थ्य और प्राइवेसी सुरक्षा को भी समान महत्व दे रही हैं। बाजार में डर्मेटोलॉजिकल टेस्टेड, सांस लेने योग्य (ब्रीथेबल) कपड़े से बने और कृत्रिम खुशबू (आर्टिफिशियल फ्रेग्रेंस) से पूरी तरह मुक्त सैनिटरी पैड्स की मांग में तेजी आई है। इसके साथ ही, प्राकृतिक और वनस्पति (बोटैनिकल) तत्वों से तैयार किए गए उत्पाद भी महिलाओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। प्रजनन काल की अवधि और डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह मासिक धर्म से जुड़ी प्राथमिकताओं पर रोशनी डालते हुए गाजियाबाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल ने बताया कि महिलाएं अपने प्रजनन जीवन का लगभग एक-चौथाई समय पीरियड्स के दौरान बिताती हैं। इतनी लंबी अवधि तक उपयोग किए जाने के कारण सही सैनिटरी पैड का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। डॉ. कंसल का कहना है कि पैड ऐसा होना चाहिए जो न केवल बेहतर अवशोषण क्षमता प्रदान करे, बल्कि त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित, मुलायम और आरामदायक भी हो। सांस लेने योग्य संरचना और मोरिंगा जैसे त्वचा-अनुकूल प्राकृतिक घटकों वाले सैनिटरी पैड लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने पर नमी और गर्मी को कम करते हैं, जिससे महिलाओं को काफी सहूलियत मिलती है। हालांकि, डॉ. कंसल ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी प्राकृतिक या विशेष सामग्री बुनियादी मेंस्ट्रुअल हाइजीन का विकल्प नहीं बन सकती। निश्चित समय-अंतराल पर पैड बदलना, निजी स्वच्छता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की जलन या परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना ही सबसे जरूरी कदम है। सैनिटरी पैड्स में मोरिंगा ओलिफेरा का इस्तेमाल और वैज्ञानिक अध्ययन मेंस्ट्रुअल केयर के क्षेत्र में हाल ही में सहजन यानी मोरिंगा ओलिफेरा के अर्क का उपयोग एक नई और प्रभावशाली पहल के रूप में सामने आया है। आयुर्वेद में लंबे समय से मोरिंगा का उपयोग इसके औषधीय गुणों के लिए किया जाता रहा है। मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में विटामिन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और विभिन्न लाभकारी पादप यौगिक मौजूद होते हैं। वर्ष 2024 में 'फ्रंटियर्स इन फार्माकोलॉजी' (Frontiers in Pharmacology) पत्रिका में प्रकाशित एक समीक्षा अध्ययन ने मोरिंगा के औषधीय गुणों की पुष्टि की है। इस अध्ययन के अनुसार, मोरिंगा में कैरोटेनॉइड्स, टोकोफेरॉल्स, फ्लेवोनॉइड्स, फेनोलिक एसिड्स और कई आवश्यक विटामिन पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इन्फ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) और एंटी-माइक्रोबियल (रोगाणुरोधी) गुणों को रेखांकित किया है, जो त्वचा को संक्रमण और खुजली से बचाने में मदद करते हैं। पहले मोरिंगा का उपयोग मुख्य रूप से आहार पूरक (डाइट्री सप्लीमेंट) के रूप में किया जाता था। लेकिन अब कई निर्माता इसे सैनिटरी पैड्स की ऊपरी परत (टॉप शीट) में शामिल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को उच्च अवशोषण क्षमता देने के साथ-साथ संवेदनशील त्वचा को अतिरिक्त सुरक्षा और आराम प्रदान करना है। पैड का लेबल पढ़ने की आदत, खुशबू के खतरे और प्राकृतिक pH संतुलन दिल्ली के क्लाउडनाइन अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा सिंघल ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए। उनका कहना है कि आज की महिलाएं अपने पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स के घटकों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रही हैं। उन्होंने सलाह दी कि महिलाओं को केवल पैड के आकार या सोखने की क्षमता को देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए, बल्कि उत्पाद के लेबल पर लिखी सभी सामग्रियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। डॉ. सिंघल के अनुसार, डर्मेटोलॉजिकल टेस्टेड, ब्रीथेबल फैब्रिक, मोरिंगा जैसे वनस्पति तत्वों और बिना किसी अतिरिक्त कृत्रिम खुशबू वाले पैड संवेदनशील त्वचा वाली महिलाओं के लिए काफी सुरक्षित होते हैं। कृत्रिम सुगंध का उपयोग अक्सर दुर्गंध को छिपाने के लिए किया जाता है, लेकिन इससे त्वचा में जलन, एलर्जी और रैशेज का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, डॉ. सिंघल ने महिलाओं को सलाह दी कि वे अपने इंटिमेट एरिया की सफाई के लिए किसी भी तरह के तेज या कठोर साबुन का उपयोग न करें। यदि किसी क्लींजर की आवश्यकता महसूस हो, तो केवल ऐसे माइल्ड प्रोडक्ट्स का ही चयन करें जो बाहरी निजी अंगों के प्राकृतिक pH संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रमाणित हों। पारदर्शिता और नवाचार की दिशा में बढ़ता कदम स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सैनिटरी पैड्स और अन्य मेंस्ट्रुअल केयर प्रोडक्ट्स की सामग्री में पारदर्शिता की मांग महिलाओं की आधुनिक सोच को दर्शाती है। अब उपभोक्ता केवल पैड के काम करने के दावे पर भरोसा नहीं करते, बल्कि अपनी त्वचा की सुरक्षा और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं। आने वाले समय में पौधों पर आधारित और त्वचा के अनुकूल मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स में और अधिक तकनीकी नवाचार देखने को मिल सकते हैं, बशर्ते महिलाएं सही चिकित्सकीय जानकारी के आधार पर सही उत्पादों का चयन करें और नियमित स्वच्छता का ध्यान रखें। इसका आप पर असर भारत में: महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड्स खरीदते समय केवल सोखने की क्षमता ही नहीं, बल्कि पैड के घटकों, ब्रीथेबल मटेरियल और कृत्रिम खुशबू से मुक्ति पर ध्यान देना त्वचा के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। सवाल-जवाब 1. सैनिटरी पैड के घटकों की जांच करना क्यों महत्वपूर्ण है? सैनिटरी उत्पाद लंबे समय तक संवेदनशील त्वचा के सीधे संपर्क में रहते हैं। सामग्री जांचने से त्वचा में जलन, एलर्जी और रैशेज के जोखिम से बचाव होता है। 2. सैनिटरी पैड में मोरिंगा के इस्तेमाल से क्या फायदे मिलते हैं? 2024 में 'फ्रंटियर्स इन फार्माकोलॉजी' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मोरिंगा में एंटी-ऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं, जो त्वचा को आराम देते हैं। 3. डॉक्टर सांस लेने योग्य और बिना खुशबू वाले पैड इस्तेमाल करने की सलाह क्यों देते हैं? सांस लेने योग्य कपड़ा नमी और गर्मी को कम करता है, जबकि खुशबू-रहित उत्पाद कृत्रिम सुगंध से होने वाली त्वचा की एलर्जी को रोकते हैं। 4. डॉक्टरों के अनुसार इंटिमेट एरिया की सफाई कैसे करनी चाहिए? डॉक्टरों का सुझाव है कि इंटिमेट एरिया पर कठोर साबुन का इस्तेमाल न करें और आवश्यकता होने पर केवल प्राकृतिक pH संतुलन बनाए रखने वाले माइल्ड क्लींजर का उपयोग करें। https://trendkia.com/health/avshoshan-se-aage-stree-rog-visheshagyon-ne-mahilaon-ko-sanitary-pad-ke-ghatkon-par-dhyan-dene-ki-salah-kyon-di-15673 TrendKia — Har trend, sabse pehle.