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  "type": "article",
  "title": "आयुर्वेद और पोषण से भरपूर मुनगा दूर करेगा खून की कमी, छत्तीसगढ़ में 7.88 लाख परिवारों तक पौधे पहुंचाने की बड़ी तैयारी",
  "summary": "मुनगा यानी सहजन में मौजूद आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स एनीमिया तथा हड्डियों की कमजोरी से निपटने में मददगार हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने कुपोषण मिटाने के लिए 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बड़े स्तर पर पौधे बांटने की मुहिम शुरू की है।",
  "content": "पारंपरिक खानपान में शामिल मुनगा केवल स्वाद बढ़ाने वाली सब्जी नहीं है, बल्कि पोषण और पारंपरिक चिकित्सा दोनों के लिहाज से एक संपूर्ण आहार माना जाता है। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की भरपाई करने के साथ यह कई शारीरिक व्याधियों को नियंत्रित रखने में सहायक साबित होता है। पोषण विशेषज्ञ और चिकित्सक इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स और मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।\n\nपोषण तत्वों का प्राकृतिक भंडार और एनीमिया में उपयोगिता\nडॉ. आस्था मिश्रा के अनुसार, मुनगा विटामिन्स और खनिजों का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं। नियमित भोजन में इसे जगह देने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है। खासकर महिलाओं और बच्चों में दिखने वाली खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या में मुनगे में मौजूद आयरन और फोलेट अत्यंत लाभकारी भूमिका निभाते हैं। यह तत्व शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को सुधारने में मदद करते हैं। हालांकि, खून की गंभीर कमी होने पर केवल मुनगा खाने पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श और उचित चिकित्सीय जांच करवाना अनिवार्य होता है।\n\nहड्डियों की मजबूती और जोड़ों के दर्द में राहत\nमुनगे में शामिल कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों के घनत्व और ढांचे को बनाए रखने के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। डॉ. आस्था मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी व्याधियों के प्रबंधन में मुनगे के नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, आयुर्वेदिक सिद्धांतों के तहत मुनगे को शूलहर और शोथहर प्रभाव वाला माना गया है। शूल का सीधा संबंध दर्द से होता है, जबकि शोथ सूजन को दर्शाता है। जोड़ों में दर्द, जकड़न या शरीर के किसी हिस्से में सूजन की शिकायत होने पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मुनगा का सेवन काफी गुणकारी माना जाता है।\n\nपाचन तंत्र में सुधार और वात-कफ का संतुलन\nपाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में भी मुनगे के औषधीय गुण सहायक सिद्ध होते हैं। डॉ. आस्था मिश्रा के मुताबिक, इसमें दीपन और पाचन गुण होते हैं, जो मंद पड़ी जठराग्नि को सक्रिय कर भोजन पचाने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं। जिन व्यक्तियों को अक्सर पेट संबंधी दिक्कतें या अपच की शिकायत रहती है, उनके लिए इसका आहार में होना फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार, मुनगे का रस कटु-तिक्त और इसका वीर्य उष्ण यानी तासीर गर्म होती है। यह शरीर में असंतुलित वात और कफ दोष को शांत करने का काम करता है। वात और कफ के असंतुलन से उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं में उचित सलाह के साथ मुनगे का उपयोग किया जाता है। साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और हानिकारक फ्री रेडिकल्स के असर को घटाते हैं।\n\nछत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ व्यापक अभियान\nमुनगे के इन्हीं बहुमूल्य औषधीय और पोषण गुणों को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से कुपोषण और एनीमिया को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत नागरिकों को मुनगा के पौधे निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं और सार्वजनिक स्तर पर सघन पौधरोपण किया जा रहा है। शासन ने प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए लगभग 7.88 लाख परिवारों को इस महत्वाकांक्षी पोषण अभियान से सीधे जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।\n\nडिजिटल डैशबोर्ड से निगरानी और रोपण का रिकॉर्ड\nइस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं, किशोरियों और नन्हे बच्चों तक पौष्टिक आहार की सुलभता सुनिश्चित करना है, जिसके लिए हर आंगनबाड़ी कार्यक्षेत्र में मुनगे के पौधे लगाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। राजधानी रायपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए मात्र एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाने का वृहद महाअभियान चलाया गया। केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और विकास को ट्रैक करने के लिए प्रशासन ने एक विशेष डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया है, जिससे पौधों के संरक्षण की निरंतर निगरानी की जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nमुनगे को नियमित खानपान में शामिल करने और इसके पौधों के विस्तार से पोषण स्तर में सुधार और बीमारियों से बचाव में सीधी मदद मिलती है।\n\n• भारत में: देश भर के आम पाठक अपनी रोजमर्रा की थाली में मुनगा शामिल करके बिना महंगे सप्लीमेंट्स के आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स की कमी पूरी कर सकते हैं। यह प्राकृतिक आहार एनीमिया और जोड़ों की कमजोरी से जूझ रहे लोगों के लिए एक किफायती स्वास्थ्य विकल्प बनता है।\n• छत्तीसगढ़ में: राज्य के 7.88 लाख परिवारों को 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए सीधे घर पर मुफ्त मुनगे के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण महिलाएं और बच्चे अपने आंगन में लगे पेड़ से नियमित पत्तियां और फलियां प्राप्त कर कुपोषण से बचाव कर सकते हैं।\n• मरीजों के लिए: खून की कमी और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से जूझ रहे लोगों को मुनगा आहार में शामिल करने से सहायक पोषण लाभ मिलता है। हालांकि गंभीर स्थिति में घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराकर नियमित दवाएं लेना जरूरी है।\n• पौधरोपण अभियान: रायपुर समेत राज्य के निवासियों के लिए चलाए गए 50000 पौधों के रोपण और डिजिटल डैशबोर्ड से पर्यावरण के साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होगी। लोग अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करके इस निशुल्क वितरण का लाभ उठा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमुनगे के फायदों को सरकारी स्तर पर बढ़ावा देने और इसे भोजन में जोड़ने की यह पहल पोषण संबंधी कमियों और स्वास्थ्य लाभों के वैज्ञानिक व पारंपरिक प्रमाणों के कारण शुरू हुई है।\n\n• कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम: छत्तीसगढ़ में महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में खून की कमी तथा अल्पपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रही है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने मुफ्त मुनगा पौधे बांटने का नीतिगत फैसला लिया।\n• समृद्ध पोषण और आयुर्वेदिक मान्यता: मुनगा में आयरन, फोलेट, कैल्शियम और मैग्नीशियम का प्राकृतिक संतुलन मौजूद है, जिसे आयुर्वेद में वात-कफ शमन और दर्द निवारण के लिए प्रमाणित माना गया है। विशेषज्ञों के इसी सुझाव के चलते इसे आहार का प्रमुख अंग बनाया जा रहा है।\n• सुलभ और टिकाऊ स्रोत: एक बार लगाया गया मुनगे का पेड़ सालों तक पौष्टिक पत्तियां और फलियां देता है, जिससे गरीब परिवारों को लगातार ताजा पोषण मिलता रहता है। इसी दीर्घकालिक दृष्टिकोण के तहत रायपुर में 50000 पौधे एक ही दिन में लगाए गए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुनगे में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं?\nमुनगा आयरन, फोलेट, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं।\n\n2. क्या मुनगा खून की कमी यानी एनीमिया को ठीक कर सकता है?\nमुनगे में मौजूद आयरन और फोलेट खून की कमी में मददगार होते हैं, लेकिन गंभीर एनीमिया के लिए डॉक्टरी जांच और चिकित्सीय इलाज जरूरी है।\n\n3. आयुर्वेद में मुनगे के कौन से गुण बताए गए हैं?\nआयुर्वेद के अनुसार मुनगा शूलहर (दर्दनाशक), शोथहर (सूजन घटाने वाला) और दीपन-पाचन गुणों वाला है, जो वात और कफ दोष को शांत करता है।\n\n4. छत्तीसगढ़ सरकार का 'हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा' अभियान क्या है?\nयह कुपोषण और एनीमिया को दूर करने की एक योजना है, जिसके तहत 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए करीब 7.88 लाख परिवारों को मुफ्त मुनगा पौधे दिए जा रहे हैं।\n\n5. रायपुर जिले में पौधरोपण को लेकर क्या विशेष कदम उठाया गया?\nमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर में एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाए गए और इनकी देखरेख के लिए डिजिटल डैशबोर्ड बनाया गया है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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