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  "title": "आयुर्वेदिक धूमपान का बढ़ता चलन, शेनाज ट्रेजरी ने केरल में लिया मेडिकेटेड स्मोकिंग का अनुभव",
  "summary": "अभिनेत्री शेनाज ट्रेजरी ने केरल के एक आयुर्वेदिक रिट्रीट में धूमपान प्रक्रिया का अनुभव लिया है। इस पारंपरिक पद्धति में तंबाकू के बजाय औषधीय जड़ी-बूटियों के धुएं का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है।",
  "content": "वेलनेस और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राचीन और पारंपरिक तौर-तरीकों का दोबारा चलन में आना इन दिनों काफी आम हो गया है। इसी कड़ी में आयुर्वेद की एक ऐसी सदियों पुरानी प्रक्रिया ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसका नाम सुनकर पहली बार में तंबाकू या सिगरेट का भ्रम हो सकता है। असल में यह आयुर्वेदिक धूमपान यानी Dhumapana है, जिसमें किसी भी तरह के तंबाकू का उपयोग करने के बजाय विशेष रूप से तैयार की गई औषधीय सामग्री के धुएं का प्रयोग किया जाता है।\n\nहाल ही में जानी-मानी अभिनेत्री और कंटेंट क्रिएटर शेनाज ट्रेजरी ने केरल के एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक रिट्रीट में इस खास प्रक्रिया को खुद आजमाकर देखा। उन्होंने इस पूरे अनुभव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और अपने चाहने वालों को इसके बारे में विस्तार से बताया। शेयर किए गए वीडियो में शेनाज इसे 'मेडिकेटेड स्मोकिंग' का नाम देती नजर आती हैं और वहां मौजूद चिकित्सक से यह समझने की कोशिश करती हैं कि यह प्रक्रिया उनके लिए किस प्रकार लाभदायक साबित हो सकती है। आप उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर देख सकते हैं।\n\n \n\nक्या है आयुर्वेदिक धूमपान और इसके क्या हैं लाभ\nआयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में धूमपान का उपयोग मुख्य रूप से नाक के रास्ते में आने वाली रुकावटों को कम करने, शरीर की ज्ञानेंद्रियों को अधिक सुचारू रूप से कार्य करने में सहायता प्रदान करने और मन को पूरी तरह शांत रखने के लिए किया जाता है। शेनाज ने भी इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्हें इसके बाद से काफी सुकून और आराम महसूस हुआ।\n\nJournal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences में प्रकाशित शोध और जानकारी के अनुसार, आयुर्वेदिक धूमपान एक पारंपरिक विधि है, जिसमें विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए धुएं को एक तय और अनुशासित तरीके से ग्रहण किया जाता है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसे शरीर के वात और कफ दोष से जुड़ी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों के प्रबंधन के लिए एक असरदार उपाय के तौर पर वर्णित किया गया है.\n\nतंबाकू से कितनी अलग है यह हर्बल प्रक्रिया\nआम सिगरेट की तरह इसमें किसी भी प्रकार के तंबाकू या निकोटीन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता है। इसके विपरीत, इसमें कई अलग-अलग जड़ी-बूटियों और औषधीय सामग्री को मिलाकर एक विशेष हर्बल मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को बनाने में हल्दी, गुग्गुल, नीम और शुद्ध घी जैसी चीजों का उपयोग किए जाने का विशेष उल्लेख मिलता है। हालांकि, इसमें इस्तेमाल होने वाली सटीक सामग्री हर व्यक्ति की प्रकृति और उसके उपचार के मुख्य उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।\n\nइस पारंपरिक विधि में औषधीय मिश्रण को जलाकर उससे निकलने वाले धुएं को एक खास तकनीकी तरीके से शरीर के भीतर लिया जाता है। इस प्रक्रिया में धुएं को मुख्य रूप से नाक के रास्ते से अंदर खींचने और मुंह के रास्ते बाहर छोड़ने का वर्णन मिलता है। इसका मुख्य उद्देश्य सिर, नाक और गले के ऊपरी हिस्से से जुड़े श्वसन मार्गों में जमे हुए कफ या किसी भी तरह की रुकावट को बाहर निकालना और कम करना बताया गया है।\n\nसावधानियां और डॉक्टर की देखरेख की जरूरत\nआयुर्वेदिक साहित्यों में इसे कुछ विशेष स्थितियों में नाक में डाले जाने वाले औषधीय तेल या ड्रॉप्स की प्रक्रिया के तुरंत बाद भी इस्तेमाल किए जाने का जिक्र मिलता है। इसे नाक बंद होने की समस्या, शरीर में अतिरिक्त कफ बनने, गले में जलन महसूस होने और ऊपरी श्वसन तंत्र से जुड़ी कई अन्य परेशानियों में काफी उपयोगी माना गया है।\n\nइसके नाम में 'स्मोकिंग' शब्द जुड़ा होने की वजह से इसे आम सिगरेट के बराबर बिल्कुल नहीं समझना चाहिए। जहां सिगरेट में तंबाकू के जलने से निकलने वाला धुआं शरीर के लिए कई तरह के खतरनाक और हानिकारक रसायन पैदा करता है, वहीं आयुर्वेदिक धूमपान में विशुद्ध रूप से औषधीय सामग्री का प्रयोग होता है और इसे एक उपचारात्मक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है। इसके बावजूद इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि यह औषधीय धुआं हर इंसान के लिए सुरक्षित है। किसी भी तरह का धुआं फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे कभी भी खुद से घर पर आजमाने के बजाय किसी योग्य और अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सख्त देखरेख में ही किया जाना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nआयुर्वेदिक पद्धतियों और हर्बल उपचारों को अपनी जीवनशैली में शामिल करने से पहले योग्य विशेषज्ञों की सलाह लेना आवश्यक होता है।\n\n• भारत में: पारंपरिक वेलनेस सेंटर्स और आयुर्वेद रिट्रीट की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।\n• केरल में: राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्रों और रिट्रीट में इस प्रकार की पारंपरिक पद्धतियों को आजमाने वाले पर्यटकों और स्वास्थ्य प्रेमियों की रुचि में इजाफा देखा जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आयुर्वेदिक धूमपान क्या होता है?\nयह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें तंबाकू के बजाय औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार धुएं को नाक के रास्ते लिया जाता है।\n\n2. शेनाज ट्रेजरी ने इस प्रक्रिया का अनुभव कहां लिया?\nशेनाज ट्रेजरी ने केरल के एक आयुर्वेदिक रिट्रीट में इस प्रक्रिया का अनुभव लिया।\n\n3. क्या इसमें तंबाकू या निकोटीन का इस्तेमाल होता है?\nनहीं, इसमें सिगरेट की तरह तंबाकू या निकोटीन का उपयोग नहीं किया जाता है।\n\n4. इस मिश्रण को बनाने में किन चीजों का उपयोग किया जाता है?\nइसमें हल्दी, गुग्गुल, नीम और घी जैसी औषधीय सामग्री का इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है।\n\n5. आयुर्वेदिक धूमपान के मुख्य लाभ क्या बताए गए हैं?\nइसका उपयोग नाक की रुकावट को कम करने, इंद्रियों के कामकाज को बेहतर बनाने और मन को आराम देने के लिए किया जाता है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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