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  "type": "article",
  "title": "आयुर्वेदिक इलाज और खान-पान में संयम से पित्त की पथरी का आकार घटा, अंबाला के अस्पताल में दिखा असर",
  "summary": "अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में आयुर्वेदिक चिकित्सा और सख्त परहेज़ के ज़रिये एक मरीज़ की 14.7 एमएम की पित्त की पथरी घटकर 6.5 एमएम रह गई।",
  "content": "दैनिक दिनचर्या में गड़बड़ी और असंतुलित खान-पान के चलते पित्ताशय की पथरी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सामान्य तौर पर जब किसी व्यक्ति के पित्ताशय में पथरी बनती है, तो चिकित्सक शल्य चिकित्सा यानी ऑपरेशन कराने का मशविरा देते हैं, जिससे पीड़ित व्यक्ति और उसका पूरा परिवार चिंता में घिर जाता है। हालांकि, अंबाला छावनी स्थित नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदिक विभाग से एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और खान-पान के सख्त नियमों का पालन करके मरीज़ को बड़ी राहत मिली है। यहाँ इलाज करा रहे एक मरीज़ के पित्ताशय में मौजूद 14.7 एमएम आकार की बड़ी पथरी जाँच में घटकर महज़ 6.5 एमएम पाई गई है।\n\nपुरुषों में भी बढ़ रहे हैं पित्ताशय की पथरी के मामले\nअंबाला छावनी नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में सेवाएँ दे रहे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि वर्तमान समय में पित्त की थैली में पथरी की समस्या काफी आम हो चुकी है। आमतौर पर यह शारीरिक विकार महिलाओं में 40 वर्ष की आयु के आसपास अधिक देखा जाता था, किंतु अब पुरुषों में भी इसके मामले तेज़ी से दर्ज किए जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता में कमी और भोजन से जुड़ी अनियमित आदतें इस रोग के फैलने की मुख्य वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा जब शरीर के भीतर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक बढ़ जाती है, तो वह पित्त की पथरी के निर्माण का एक प्रमुख आधार बनती है।\n\nआयुर्वेदिक बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में ऐसे अनेक मरीज़ पहुँचते हैं, जिन्हें अन्य चिकित्सा संस्थानों में सीधे सर्जरी कराने के निर्देश दिए जा चुके होते हैं। ऐसे मामलों में औषधियों के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार और भोजन में विशेष परहेज़ बेहद निर्णायक भूमिका निभाता है।\n\nकिन चीज़ों से परहेज़ और किन जड़ी-बूटियों की सलाह\nपित्ताशय से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे पीड़ितों को मैदा, रिफाइंड खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी, बेसन तथा अत्यधिक खटाई वाली सामग्रियों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने का परामर्श दिया जाता है। तले-भुने और भारी भोजन से पित्त रस के प्रवाह में रुकावट पैदा होती है। इसके विपरीत, आयुर्वेदिक पद्धति में घरेलू और जड़ी-बूटी आधारित उपायों पर ज़ोर दिया जाता है। चिकित्सक के मार्गदर्शन में पत्थरचट्टा, मुलेठी, वरुण की छाल और सामान्य नींबू पानी जैसी प्राकृतिक औषधियों के संतुलित सेवन की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी भी जड़ी-बूटी अथवा औषधि का इस्तेमाल करने से पहले अधिकृत चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लेना आवश्यक होता है।\n\n14.7 एमएम की पथरी घटकर रह गई 6.5 एमएम\nकुरुक्षेत्र ज़िले के एक ग्रामीण क्षेत्र के निवासी अनिल गुप्ता वर्ष 2024 से इस परेशानी को लेकर अस्पताल में आयुर्वेदिक परामर्श ले रहे थे। उनके पित्ताशय के भीतर कई छोटी और बड़ी पथरियाँ मौजूद थीं, जिनमें सबसे बड़ी पथरी का आकार लगभग 14.7 एमएम दर्ज किया गया था। इस समस्या के चलते उन्हें लगातार पेट दर्द, खट्टी डकारें आना और मुँह में पानी भर जाने जैसी गंभीर परेशानियाँ झेलनी पड़ रही थीं।\n\nडॉ. जितेंद्र वर्मा के अनुसार, तकरीबन तीन महीने तक दवाइयों के सेवन और खान-पान में बदलाव के बाद मरीज़ की तकलीफों में भारी कमी आई। स्वास्थ्य ठीक महसूस होने पर मरीज़ ने बीच में दवाइयाँ बंद कर दी थीं। कुछ समय बाद जब हल्का दर्द दोबारा महसूस हुआ, तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड परीक्षण कराया। अस्पताल पहुँची नई जाँच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि उनकी 14.7 एमएम वाली पथरी का आकार सिकुड़कर 6.5 एमएम हो चुका था।\n\nसस्ते सरकारी इलाज से मिला आराम\nमरीज़ अनिल गुप्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पथरियों की वजह से वे बेहद परेशान चल रहे थे। उनका परिवार उन्हें कई अलग-अलग अस्पतालों में दिखा चुका था, जहाँ हर जगह तुरंत ऑपरेशन कराने को कहा गया। उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में भी उपचार की कोशिश की थी। बाद में उन्हें अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में उपलब्ध आयुर्वेदिक उपचार की जानकारी मिली।\n\nमरीज़ के अनुसार, अस्पताल में महज़ 5 रुपये का सरकारी पर्चा बनवाकर उनका इलाज शुरू हुआ था। चिकित्सक द्वारा दिए गए आहार संबंधी निर्देशों और सावधानियों को उन्होंने कड़ाई से अपनी दिनचर्या में लागू किया। अब उन्हें दर्द और अन्य लक्षणों से काफी राहत मिल चुकी है और जाँच रिपोर्ट में पथरी का आकार भी आधे से ज़्यादा कम दर्ज किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह जानकारी पित्त की पथरी से जूझ रहे मरीज़ों के लिए आहार और वैकल्पिक चिकित्सा विकल्पों के संदर्भ में उपयोगी साबित हो सकती है।\n\n• भारत में: देश भर में पित्ताशय की पथरी से पीड़ित लोग आधुनिक शल्य चिकित्सा के साथ-साथ प्रमाणित चिकित्सकों की देखरेख में आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली सुधार के विकल्पों को समझ सकते हैं। खान-पान में मैदा, रिफाइंड उत्पाद, अत्यधिक चीनी और बेसन से दूरी बनाकर लक्षणों की तीव्रता को कम करने में मदद मिल सकती है।\n• हरियाणा में: अंबाला, कुरुक्षेत्र और आसपास के ज़िलों के निवासी अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में मात्र 5 रुपये के ओपीडी पर्चे पर आयुष विभाग की परामर्श सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। बिना निजी अस्पतालों के भारी खर्च के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर से मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।\n• मरीज़ों के लिए परहेज़: अधिक वसायुक्त, खट्टे और रिफाइंड भोज्य पदार्थों से परहेज़ करना पाचन तंत्र और पित्त रस के संतुलन के लिए आवश्यक है। डॉक्टर की सलाह के बिना घरेलू उपायों का अनियंत्रित इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।\n• जाँच की आवश्यकता: किसी भी पारंपरिक उपचार के दौरान नियमित अंतराल पर अल्ट्रासाउंड परीक्षण करवाकर पथरी के आकार और स्थिति की निगरानी रखना बेहद ज़रूरी है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगलत जीवनशैली, अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल और अनियमित खान-पान के चलते पित्त रस में असंतुलन पैदा होने से पित्ताशय में पथरियों का निर्माण होता है।\n\n• कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन: शरीर में जब कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है, तो पित्त रस उसे पूरी तरह घुला नहीं पाता। यही अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल समय के साथ धीरे-धीरे ठोस कणों और अंततः पथरियों के रूप में जमा होने लगता है।\n• असंतुलित खान-पान और दिनचर्या: अत्यधिक रिफाइंड तेल, मैदा, बेसन और मीठे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन पित्ताशय के सामान्य कार्यप्रवाह को धीमा कर देता है। लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता और समय पर भोजन न करने से यह जोखिम और गहरा हो जाता है।\n• आयु और लिंग का प्रभाव: महिलाओं में करीब 40 वर्ष की उम्र के आसपास यह समस्या पहले से अधिक पाई जाती रही है, किंतु अब तनाव और जीवनशैली की गड़बड़ी के कारण पुरुषों में भी यह समस्या तेज़ी से उभर रही है।\n• इलाज में खान-पान की भूमिका: पित्ताशय की पथरी के इलाज में केवल दवाइयाँ ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि उत्तेजक और भारी खाद्य पदार्थों से परहेज़ किए बिना सुधार संभव नहीं होता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अंबाला नागरिक अस्पताल में किस मरीज़ की पथरी का आकार घटा है?\nकुरुक्षेत्र ज़िले के रहने वाले मरीज़ अनिल गुप्ता की 14.7 एमएम की पथरी आयुर्वेदिक उपचार और परहेज़ के बाद 6.5 एमएम पाई गई।\n\n2. पित्त की पथरी के मुख्य कारण क्या बताए गए हैं?\nबदलती जीवनशैली, खान-पान की अनियमितता और शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।\n\n3. आयुर्वेदिक डॉक्टर ने किन चीज़ों से परहेज़ करने की सलाह दी है?\nमरीज़ों को मैदा, रिफाइंड खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी, बेसन और अत्यधिक खटाई वाली चीज़ों से दूर रहने की सलाह दी गई है।\n\n4. उपचार में किन प्राकृतिक चीज़ों के उपयोग का ज़िक्र किया गया है?\nचिकित्सक के परामर्श के अनुसार मुलेठी, पत्थरचट्टा, वरुण की छाल और नींबू पानी के उपयोग का उल्लेख किया गया है।\n\n5. अस्पताल में इलाज शुरू कराने के लिए मरीज़ को कितना शुल्क देना पड़ा?\nमरीज़ ने अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में महज़ 5 रुपये का ओपीडी पर्चा बनवाकर अपना आयुर्वेदिक इलाज शुरू करवाया था।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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    "पित्त की पथरी",
    "आयुर्वेदिक इलाज",
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