बच्चों की सर्दी और खांसी को न समझें मामूली, जानिए कब यह बन सकती है निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी बच्चों में सर्दी और जुकाम को अक्सर सामान्य मौसमी संक्रमण मान लिया जाता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह निमोनिया या अस्थमा का रूप ले सकता है। ऐसे में माता-पिता को सांस की गति और अन्य लक्षणों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। छोटे बच्चों में ठंड के मौसम या मौसम के बदलाव के साथ ही सर्दी, जुकाम और खांसी जैसी परेशानियां आम तौर पर देखने को मिलती हैं। अधिकांश स्थितियों में ये बीमारियां किसी वायरल संक्रमण की वजह से पनपती हैं और उचित देखभाल, भरपूर तरल पदार्थ तथा आराम करने से ठीक भी हो जाती हैं। हालांकि, हर बार खांसी और जुकाम को केवल एक साधारण मौसमी समस्या मान लेना सही नहीं है, क्योंकि इसके पीछे निमोनिया या अस्थमा जैसी गंभीर चिकित्सीय स्थितियां भी छिपी हो सकती हैं। यही वजह है कि अभिभावकों के लिए यह बेहद आवश्यक है कि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य में आने वाले छोटे-छोटे बदलावों को गंभीरता से परखें। यदि बच्चे की सांस लेने की रफ्तार असामान्य लगे या उसके बर्ताव में कोई विचित्र बदलाव नजर आए, तो बिना देर किए चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए। वायरल संक्रमण के बीच छुपे खतरे गुरुग्राम के पारस हेल्थ अस्पताल में पीडियाट्रिक्स विभाग के सीनियर डायरेक्टर और प्रमुख डॉ. मनीष मन्नन का कहना है कि नाक से पानी बहना, हल्का बुखार रहना, गले में खराश महसूस होना और खांसी आना वायरल संक्रमण के बेहद सामान्य लक्षण हैं। हालांकि, केवल यह देखते रहना पर्याप्त नहीं है कि बच्चे को कितने दिनों से बुखार या खांसी की शिकायत है। इसके साथ ही इस बात पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए कि बच्चा कितनी तेजी से सांस ले रहा है, वह पानी पीने में सक्षम है या नहीं, उसकी शारीरिक सक्रियता कैसी है और उसका सामान्य बर्ताव किस तरह का बना हुआ है। यदि कोई बच्चा खांसी और जुकाम से पीड़ित होने के बावजूद उत्साह के साथ खेल रहा है, पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहा है और उसकी सांसें सामान्य गति से चल रही हैं, तो यह राहत की बात हो सकती है। लेकिन यदि सांस की गति तेज हो जाए, सांस लेते समय पसलियों के बीच की या नीचे की त्वचा अंदर की तरफ धंसने लगे, नाक के नथुने फूलने लगें और सांस फूलने की वजह से बच्चे को बोलने, रोने या दूध पीने में कठिनाई महसूस हो, तो ये सभी स्पष्ट रूप से खतरे के संकेत माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि बच्चा सामान्य से अधिक सुस्त रहने लगे, कुछ भी पीने से इंकार कर दे या उसके पेशाब करने की आवृत्ति कम हो जाए, तो इन लक्षणों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विशेष तौर पर छोटे बच्चों और उन बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है जो पहले से ही फेफड़ों या दिल से जुड़ी किसी बीमारी से जूझ रहे होते हैं। अस्थमा की ओर इशारा करती बार-बार की खांसी जयपुर के कुकून हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जितेंद्र जैन के अनुसार, वायरल संक्रमण की यह स्थिति अस्थमा से पीड़ित बच्चों की तकलीफों को काफी ज्यादा बढ़ा सकती है। इस तरह के संक्रमण के कारण बच्चों की सांस की नलियों में सूजन आने के साथ-साथ वे सिकुड़ भी सकती हैं। जिसके परिणामस्वरूप लगातार खांसी उठना, सांस लेते वक्त घरघराहट की आवाज आना, सीने में जकड़न महसूस होना और सांस लेने में भारी परेशानी होना जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। यदि कोई बच्चा रात के वक्त बार-बार खांसकर उठ जाता है या फिर दौड़ने-भागने तथा खेलने के दौरान उसे खांसी उठने या सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। अस्थमा से ग्रस्त बच्चों की दवाइयों को कभी भी खुद से या बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं किया जाना चाहिए और न ही उनकी तय खुराक में अपनी मर्जी से कोई बदलाव करना चाहिए। गुरुग्राम के पीबी हेल्थ संस्थान में पीडियाट्रिक्स और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर विभाग के प्रमुख डॉ. नवीन भाटिया का यह भी कहना है कि ज्यादातर सामान्य वायरल संक्रमण के मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं की कोई आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि ये दवाइयां केवल बैक्टीरिया पर प्रभावी होती हैं, वायरस पर इनका कोई असर नहीं होता। जरूरत न होने पर भी इनका इस्तेमाल करने से शरीर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। हालांकि, यदि डॉक्टर को किसी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण जैसे कि निमोनिया होने का संदेह होता है, तब एंटीबायोटिक देने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए कभी भी बच्चे को घर में रखी पुरानी बची हुई दवाइयां या फिर किसी दूसरे बच्चे की दवाएं नहीं देनी चाहिए। किन लक्षणों पर तुरंत लेनी चाहिए मेडिकल मदद मुंबई के स्पर्श चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुरेश शाह बताते हैं कि निमोनिया की चपेट में आने पर बुखार और खांसी के साथ-साथ सांस की गति बेहद तेज हो सकती है या फिर सांस लेने के लिए बच्चे को बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है। सांस लेते वक्त सीने का भीतर की तरफ धंसना, प्रत्येक सांस के साथ घरघराहट या कराहने जैसी आवाजें निकलना, होंठों का रंग नीला पड़ जाना, दूध पीने में असमर्थता होना और अत्यधिक सुस्ती छा जाना इसके बेहद गंभीर संकेत माने जाते हैं। यदि बच्चे के होंठ नीले पड़ने लगे हैं, वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले पा रहा है या फिर पानी और दूध पीने में असमर्थ है, तो बिना एक पल गंवाए फौरन चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए। इस बात को भी अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि बुखार उतर जाने का यह कतई मतलब नहीं होता है कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है, बल्कि इसके बाद भी उसकी सांसों की चाल और तरल पदार्थ लेने की क्षमता पर लगातार निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसका आप पर असर बच्चों में सर्दी और खांसी को हल्के में लेने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है, इसलिए माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। • स्वास्थ्य सुरक्षा: बच्चों में तेज सांस लेने या पसलियां अंदर धंसने जैसे लक्षणों की समय पर पहचान करने से निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति का समय रहते इलाज संभव हो जाता है। • दवाइयों का उपयोग: वायरल संक्रमण में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक देने से बच्चों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। • अस्थमा प्रबंधन: अस्थमा से पीड़ित बच्चों की दवाएं बिना चिकित्सकीय परामर्श के बंद करने से उनकी परेशानी अचानक बढ़ सकती है। • सतर्कता: बुखार कम होने के बाद भी बच्चे की सांस की गति और पानी पीने की क्षमता पर नजर रखना आवश्यक होता है। ऐसा क्यों हुआ बच्चों में श्वसन संक्रमण और निमोनिया जैसी जटिलताओं के उभरने के पीछे कई चिकित्सीय और पर्यावरणीय कारक काम करते हैं। • वायरल प्रभाव: मौसम बदलने के दौरान फैलने वाले विभिन्न वायरस बच्चों की सांस की नलियों में सूजन पैदा कर देते हैं। • अस्थमा ट्रिगर: श्वसन नली में संक्रमण होने से पहले से पीड़ित बच्चों में अस्थमा के लक्षण और अधिक गंभीर रूप ले लेते हैं। • रोग प्रतिरोधक क्षमता: छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण सामान्य सर्दी-जुकाम भी तेजी से निचले श्वसन तंत्र तक फैल सकता है। सवाल-जवाब 1. बच्चों में सामान्य सर्दी-जुकाम के मुख्य लक्षण क्या होते हैं? नाक बहना, हल्का बुखार, गले में खराश और खांसी वायरल संक्रमण के सामान्य लक्षण हैं। 2. बच्चों में सांस से जुड़े कौन से खतरे के संकेत माने जाते हैं? सांस तेज चलना, पसलियों का अंदर खिंचना, नथुनों का फूलना और दूध पीने या रोने में परेशानी होना खतरे के संकेत हैं। 3. क्या हर खांसी-जुकाम में एंटीबायोटिक की जरूरत होती है? नहीं, ज्यादातर सामान्य वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक की कोई आवश्यकता नहीं होती है। 4. अस्थमा पीड़ित बच्चों के लिए क्या सावधानी रखनी चाहिए? उनकी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए और न ही खुराक में बदलाव करना चाहिए। 5. निमोनिया के गंभीर लक्षण क्या हैं? बुखार और खांसी के साथ तेज सांस चलना, सीने का अंदर धंसना और होंठ नीले पड़ना निमोनिया के गंभीर संकेत हैं। https://trendkia.com/health/bachcho-ki-sardi-aur-khasi-ko-na-samjhe-mamuli-janiye-kab-yeh-ban-sakti-hai-pneumonia-jaisi-gambhir-bimari-57631 TrendKia — Har trend, sabse pehle.