बच्चों के बाल क्यों हो रहे हैं समय से पहले सफेद, गाजियाबाद की डॉक्टर ने बताई बड़ी वजह और बचाव कम उम्र में बच्चों और युवाओं के बाल सफेद होना चिंता का विषय बनता जा रहा है। गाजियाबाद की डॉक्टर दिव्या द्विवेदी ने इसके प्रमुख कारणों और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से बताया है। आईने के सामने अचानक एक-दो सफेद बाल नजर आ जाएं तो हर कोई फिक्रमंद हो जाता है। लेकिन अगर उम्र अभी पढ़ाई-लिखाई और खेलने-कूदने की है और बाल तेजी से सफेद होने लगे हैं, तो इस स्थिति को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आज के समय में छोटे बच्चों, किशोरों और युवाओं में कम उम्र में ही बाल सफेद होने की दिक्कत बहुत आम होती जा रही है, जिसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है। इसके पीछे केवल बढ़ती उम्र ही वजह नहीं होती, बल्कि इसके लिए आनुवंशिकी, मानसिक तनाव, गलत खान-पान, जरूरी पोषक तत्वों की कमी और कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति में इस समस्या के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते समझना बहुत जरूरी है। प्रीमेच्योर ग्रेइंग और जेनेटिक्स का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी बताती हैं कि अगर किसी व्यक्ति के बाल पच्चीस साल की उम्र से पहले ही सफेद होने शुरू हो जाएं, तो उसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग की श्रेणी में रखा जाता है। इस परेशानी का सबसे प्रमुख कारण आनुवंशिकी यानी जेनेटिक्स हो सकता है। अगर माता-पिता या परिवार के अन्य नजदीकी सदस्यों के बाल बहुत कम उम्र में सफेद हो गए थे, तो बच्चों में भी इस समस्या के होने की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके अलावा, आज के दौर की इस भागदौड़ भरी जीवनशैली में बच्चों और युवाओं के ऊपर शारीरिक और मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह तनाव सीधे तौर पर बालों को कुदरती रंग देने वाली कोशिकाओं पर बुरा असर डालता है, जिसकी वजह से समय से पहले ही बाल सफेद होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। पोषण की कमी और खराब जीवनशैली का असर डॉ. दिव्या का कहना है कि इसके अलावा धूम्रपान, असंतुलित दिनचर्या और शरीर में जरूरी पोषण की कमी भी इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना देती है। आज की युवा पीढ़ी लगातार जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन कर रही है, जिसके कारण शरीर को वह जरूरी पोषण नहीं मिल पाता जिसकी बालों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरत होती है। खासतौर पर विटामिन बी12 और आयरन जैसे अहम पोषक तत्वों की कमी का सीधा संबंध कम उम्र में बाल सफेद होने से देखा गया है। यही कारण है कि बच्चों के विकास के दिनों में उनके खान-पान पर विशेष रूप से ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों की रोजमर्रा की डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, सूखे मेवे और एक संतुलित आहार जरूर शामिल हो ताकि बालों की सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। बीमारियां और सोशल मीडिया के नुस्खों से बचाव डॉक्टर के मुताबिक कुछ विशेष मामलों में स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएं भी बालों के समय से पहले सफेद होने की वजह बन सकती हैं। थायरॉयड जैसी मेडिकल स्थितियों के साथ-साथ कुछ अन्य गुप्त बीमारियां या विटामिन्स की भारी कमी इसके पीछे हो सकती है, जिनकी जांच डॉक्टर की सलाह पर जरूर करानी चाहिए। खासकर तब जब बाल अचानक और बहुत तेजी से सफेद हो रहे हों या उनके साथ शरीर में दूसरी परेशानियां भी दिखाई दे रही हों, तब किसी अच्छे त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है। इसके अलावा डॉ. दिव्या कड़ाई से सलाह देती हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो या रील्स देखकर किसी भी तरह के शैंपू, कंडीशनर या सीरम का इस्तेमाल अपने बच्चों पर बिल्कुल न करें। हर इंसान के बाल और स्कैल्प की जरूरतें बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए किसी भी हेयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही किया जाना चाहिए। स्वस्थ आदतें और सही देखभाल ही समाधान डॉ. दिव्या का यह भी मानना है कि बच्चों में बचपन से ही पौष्टिक भोजन खाने, पूरी नींद लेने, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करने और मानसिक तनाव को दूर रखने की अच्छी आदतें डालनी चाहिए। बाल सफेद होने की हर एक समस्या हमेशा कोई बड़ी बीमारी नहीं होती है, लेकिन अगर कम उम्र में यह दिक्कत लगातार बढ़ती जा रही है, तो इसके असली कारणों की सही जांच कराना और किसी विशेषज्ञ की राय लेना ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है ताकि स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। इसका आप पर असर गाजियाबाद में: स्थानीय माता-पिता अपने बच्चों की दिनचर्या, खान-पान और तनाव के स्तर पर विशेष ध्यान दें तथा सोशल मीडिया के नुस्खों से बचें। भारत में: बच्चों में कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या से जूझ रहे परिवारों को जंक फूड की जगह संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की जरूरत है। सवाल-जवाब 1. कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या को क्या कहा जाता है? 25 साल से कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या को प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है। 2. गाजियाबाद में यह जानकारी किस डॉक्टर ने दी है? यह जानकारी जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने दी है। 3. किन पोषक तत्वों की कमी से बाल समय से पहले सफेद होते हैं? विटामिन B12 और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी का संबंध समय से पहले बाल सफेद होने से पाया गया है। 4. बच्चों के बाल सफेद होने से बचाने के लिए क्या नहीं करना चाहिए? डॉक्टर की सलाह के बिना सोशल मीडिया के वीडियो देखकर कोई भी शैंपू, कंडीशनर या सीरम इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। https://trendkia.com/health/bachchon-ke-baal-kyon-ho-rahe-hain-samay-se-pehle-safed-ghaziabad-doctor-20299 TrendKia — Har trend, sabse pehle.