बरसात के दिनों में बेहद खास है कंटोला सब्जी, बाजार में 200 रुपये किलो तक बिक रही यह कांटेदार फसल बरसाती मौसम में बाजारों में दिखने वाला कंटोला सेहत के लिए बेहद गुणकारी होता है। यह सब्जी वजन घटाने के साथ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। मानसून की शुरुआत के साथ ही बाजारों में कई तरह की हरी सब्जियां नजर आने लगती हैं। इन्हीं खास मौसमी सब्जियों में एक ऐसी सब्जी भी शामिल है जो अपने छोटे आकार, हरे रंग और ऊपरी सतह पर मौजूद छोटे-छोटे कांटों के कारण पहचानी जाती है। इस पौष्टिक सब्जी को कंटोला, ककोड़ा, ककौड़ा और स्पाइन गॉर्ड जैसे तमाम नामों से पुकारा जाता है। बारिश के इस सीजन में इसकी बहार देखने को मिलती है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच इसकी मांग भी काफी अधिक बनी रहती है। बाजार में भाव और ताजे ककोड़े की पहचान का तरीका इन दिनों बाजारों में ककोड़ा और कटीले परवल की जमकर बिक्री हो रही है। हालांकि उमस भरे और गर्म मौसम की वजह से यह सब्जी बहुत जल्दी पकने लगती है। कई बार बाहर से बिल्कुल हरी और ताजा दिखने वाली यह सब्जी अंदर से पीली और अधिक पकी हुई निकलती है। ऐसी पकी हुई अवस्था वाले ककोड़े की सब्जी का स्वाद बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता। यही वजह है कि केवल इसका बाहरी रंग देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। सही और ताजे ककोड़े को चुनते समय उसके रंग, आकार, उस पर बने कांटों की स्थिति और उसकी कड़ाई या मजबूती पर खास ध्यान देना चाहिए ताकि खाने में उसका पूरा स्वाद मिल सके। पोषण से भरपूर और वजन कम करने में मददगार कंटोला को हमेशा से ही बेहद गुणकारी और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों की सूची में रखा गया है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और आयरन जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जबकि इसमें कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। जिन लोगों का वजन बढ़ चुका है, जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं या जिनके शरीर में कैल्शियम की कमी है, उन्हें इस कटीले परवल का सेवन अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। इस समय खुले बाजारों में यह सब्जी 100 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति किलो तक के भाव पर बिक रही है। प्राकृतिक रूप से उगने वाली बेल और खेती ककोड़ा की बेलें अमूमन जंगलों, झाड़ियों और खेतों के आसपास किसी खास देखभाल के बिना ही अपने आप उग जाती हैं। इसके अलावा कई किसान बरसात के सीजन में इसकी व्यावसायिक खेती भी करते हैं। इस मौसम में इसकी बेलों पर फल आने शुरू हो जाते हैं जिन्हें तोड़कर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है। स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ यह कई तरह के जरूरी पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो हमारे पूरे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में काफी मददगार साबित होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण से बचाव बरसात के दिनों में मिलने वाला कंटोला न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि सेहत के लिहाज से भी बहुत उपयोगी माना जाता है। इसमें विटामिन सी के साथ-साथ कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। यदि इसे नियमित और संतुलित मात्रा में अपने भोजन का हिस्सा बनाया जाए तो शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहता है। मौसम के इस बदलाव के दौर में मौसमी संक्रमण से बचने के लिए मजबूत इम्यून सिस्टम का होना बहुत जरूरी है, ऐसे में अन्य हरी सब्जियों के साथ ककोड़े को भी अपनी थाली में जरूर शामिल करना चाहिए। विशेषज्ञ की राय और पेट से जुड़ी समस्याएं आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हरी सब्जियां हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती हैं। कंटोला का सेवन करने से शरीर को अनगिनत पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है। इसे एक सीमित मात्रा में अपने रोजाना के आहार के रूप में खाया जा सकता है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत बना रहता है और पेट की गड़बड़ी तथा कब्ज जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलती है। इसका आप पर असर कंटोला जैसी पौष्टिक और कम कैलोरी वाली मौसमी सब्जी का सेवन करने से वजन नियंत्रित रखने में सीधी मदद मिलती है। • भारत में: आम उपभोक्ता अपनी सामान्य खानपान की थाली में कंटola को शामिल कर मानसून के दौरान होने वाले मौसमी संक्रमण से बचाव कर सकते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बना सकते हैं। • स्थानीय स्तर पर: बाजार में 100 रुपये से 200 रुपये प्रति किलो मिलने वाली इस सब्जी की खरीदारी करते समय लोगों को सावधानी बरतनी होगी ताकि अधिक पकी हुई या खराब सब्जी खरीदने से बचा जा सके। सवाल-जवाब 1. कंटोला को और किन नामों से जाना जाता है? कंटोला को ककोड़ा, ककौड़ा और स्पाइन गॉर्ड के नाम से भी पुकारा जाता है। 2. बाजार में कंटोला का क्या भाव चल रहा है? बाजार में इस समय कंटोला 100 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। 3. कंटोला खाने से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं? इसके सेवन से शरीर को प्रोटीन, आयरन, फाइबर और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व मिलते हैं जो पाचन और वजन नियंत्रण में मदद करते हैं। 4. ताजे कंटोला की पहचान कैसे की जा सकती है? कच्चे और ताजे कंटोला की पहचान उसके रंग, आकार, कांटों और मजबूती को देखकर की जाती है। 5. ककोड़ा की बेलें कहां उगती हैं? ककोड़ा की बेलें अक्सर जंगलों, झाड़ियों और खेतों के आसपास अपने आप उगती हैं और किसान इसकी खेती भी करते हैं। https://trendkia.com/health/barasata-ke-dinon-men-behada-khasa-hai-kantola-sabji-bajara-men-200-rupaye-kilo-taka-bika-rahi-yaha-kantedara-phasala-23756 TrendKia — Har trend, sabse pehle.