बरसात के दिनों में फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए रसोई में अपनाएं ये 6 सेहतमंद बदलाव मानसून के मौसम में नमी और दूषित पानी के कारण फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। अपनी रसोई और खान-पान में 6 आसान बदलाव करके आप और आपका परिवार इस मौसम में पेट की बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं। मानसून की शुरुआत तपती गर्मी से राहत लेकर आती है, लेकिन यही मौसम स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की चिंताओं को भी बढ़ा देता है। हवा में बढ़ती नमी और उमस की वजह से भोजन जल्दी खराब होने लगता है और उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपने लगते हैं। इसके साथ ही इस दौरान जल स्रोतों के दूषित होने की आशंका भी बढ़ जाती है। दूषित भोजन और पानी का सेवन करने से पेट में संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। उलटी, दस्त, पेट में तेज दर्द, कमजोरी और हल्का बुखार इसके मुख्य लक्षण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में बीमारियों से बचने के लिए किसी बहुत महंगी या जटिल तैयारी की आवश्यकता नहीं है, बल्कि रसोई की दैनिक दिनचर्या में कुछ साधारण सावधानियां बरतकर पूरे परिवार को स्वस्थ रखा जा सकता है। बरसात में क्यों तेजी से फैलता है भोजन का संक्रमण? बरसात के दिनों में वातावरण के भीतर नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जो बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। जलभराव और गंदगी के कारण आसपास की स्वच्छता प्रभावित होती है, जिससे संक्रमण फैलाने वाले कारक आसानी से भोजन और जल आपूर्ति तक पहुंच जाते हैं। कई बार पकाया गया खाना बाहर से देखने या सूंघने में एकदम सामान्य लगता है, लेकिन उसमें नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया पैदा हो चुके होते हैं। बिना ढका खाना, गंदे हाथों से भोजन बनाना, कच्चे और पके खाने का एक साथ संपर्क में आना और दूषित पानी का प्रयोग इस संक्रमण के मुख्य कारण बनते हैं। इसके अलावा सड़क किनारे बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थ, चाट, गोलगप्पे, कटे हुए फल और खुली चटनी का सेवन करने से पेट का इंफेक्शन होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। 1. हाथों और रसोई की सतहों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें भोजन पकाने और खाने से पहले हाथों को साबुन तथा स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना फूड पॉइजनिंग से बचने का सबसे पहला और प्रभावकारी नियम है। शौचालय का उपयोग करने के बाद, बाहर से घर लौटने पर, पालतू जानवरों को छूने या फिर कच्ची सब्जियां और कच्चा मांस छूने के बाद हाथों की सफाई बेहद जरूरी है। इसके साथ ही रसोई की स्लैब, चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तन पकाने से पहले और बाद में अच्छी तरह साफ किए जाने चाहिए। रसोई में खाना हमेशा पूरी तरह ढककर ही रखें, ताकि उस पर मक्खियां या धूल-मिट्टी न बैठ सके। 2. कच्चे और पके हुए भोजन को अलग-अलग रखें कच्चे खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से कच्चे मांस, चिकन, मछली और अंडों में हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। यदि उन्हीं बर्तनों या चाकुओं का इस्तेमाल बिना धोए पके हुए खाने पर किया जाता है, तो बैक्टीरिया पके हुए भोजन में स्थानांतरित हो जाते हैं। इस स्थिति को क्रॉस-कंटॉमिनेशन कहा जाता है। इससे बचने के लिए कच्चे और पके भोजन के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड और चाकुओं का प्रयोग करें। इसके अलावा फ्रिज में भी कच्ची सामग्रियों को बंद डिब्बों में अलग निचले रैक पर रखें ताकि उनका रस किसी अन्य खाद्य पदार्थ पर न टपके। 3. भोजन को पूरी तरह पकाएं और दोबारा गर्म करके खाएं अधपका या कच्चा खाना मानसून के मौसम में पेट के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक साबित होता है। मांस, चिकन, समुद्री भोजन और अंडों को हमेशा सही तापमान पर पूरी तरह पकाकर ही खाएं ताकि उनके भीतर मौजूद सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाएं। यदि आप बचा हुआ खाना बाद में खा रहे हैं, तो उसे केवल गुनगुना करने के बजाय अच्छी तरह भाप निकलने तक गर्म करें। लंबे समय तक रखे गए भोजन का सेवन करने से पहले उसकी महक, रंग और बनावट की जांच जरूर कर लें, जरा सा भी संदेह होने पर उसे न खाएं। 4. कमरे के तापमान पर ज्यादा देर तक खाना न छोड़ें यद्यपि बारिश में तापमान थोड़ा कम महसूस हो सकता है, लेकिन उमस का स्तर बहुत अधिक होता है। पका हुआ खाना यदि दो घंटे से ज्यादा समय तक कमरे के तापमान पर खुला रहता है, तो उसमें बैक्टीरिया बहुत तेजी से गुणात्मक रूप से बढ़ने लगते हैं। इसलिए पके हुए भोजन को ठंडा होने के तुरंत बाद फ्रिज में रख देना चाहिए। ध्यान रखें कि फ्रिज में रखा खाना भी हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं रहता, इसलिए कई दिनों पुराना बासी भोजन खाने से परहेज करना चाहिए। 5. पीने और खाना पकाने के लिए केवल साफ पानी का उपयोग करें मानसून में जलजनित बीमारियों का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है। इसलिए पीने के लिए, खाना बनाने के लिए और बर्फ जमाने के लिए हमेशा उबले हुए या आरओ फिल्टर किए गए स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करें। बाजार में मिलने वाली ऐसी बर्फ या पेय पदार्थों से दूरी बनाएं जिनकी स्वच्छता के बारे में आपको जानकारी न हो। सब्जियों और फलों को पकाने या खाने से पहले साफ बहते पानी में अच्छी तरह धोना चाहिए ताकि उन पर जमी गंदगी और रासायनिक अवशेष हट सकें। 6. खुले में बिकने वाले स्ट्रीट फूड से परहेज करें सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ अक्सर दूषित हवा, धूल, मक्खियों और गंदे पानी के सीधे संपर्क में आते हैं। मानसून के दौरान ऐसे रेहड़ी-पटरी वाले स्टॉल से खाना खाने से बचना चाहिए जहां साफ पानी और स्वच्छता का उचित प्रबंध न हो। विशेष रूप से पहले से कटे हुए फल, सैंडविच, रोडसाइड सलाद, खुले में रखी चटनियां और गोलगप्पे का पानी इस मौसम में संक्रमण का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं। हमेशा ताज़ा और ढका हुआ गर्म भोजन ही चुनें। इसका आप पर असर स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रभाव: • दैनिक खान-पान: रसोई में स्वच्छता, ताज़ा भोजन और उबले पानी का इस्तेमाल करके मानसून के दौरान पेट की गंभीर बीमारियों और अस्पताल के खर्चों से बचा जा सकता है। • परिवार की देखभाल: बच्चों और बुजुर्गों के लिए बाहर के खुले खाद्य पदार्थों और बासी खाने से परहेज करना संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी देता है। सवाल-जवाब 1. मानसून में फूड पॉइजनिंग के प्रमुख लक्षण क्या हैं? मानसून में दूषित भोजन या पानी के सेवन से उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द, ऐंठन, कमजोरी और हल्का बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं। 2. बरसात के मौसम में खाना जल्दी खराब क्यों होता है? हवा में नमी और उमस का स्तर बढ़ने के कारण भोजन में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे खाना जल्दी खराब हो जाता है। 3. क्या बारिश के मौसम में स्ट्रीट फूड खाना सुरक्षित है? बरसात में खुले में बिकने वाले स्ट्रीट फूड जैसे चाट, कटे फल, गोलगप्पे और चटनी से बचना चाहिए क्योंकि वे दूषित हवा, मक्खियों और दूषित पानी के संपर्क में आ सकते हैं। 4. कच्चे और पके भोजन को फ्रिज में कैसे रखना चाहिए? कच्चे मांस और अंडों को बंद डिब्बों में फ्रिज की सबसे निचली रैक में रखना चाहिए ताकि उनका रस पके हुए भोजन या सब्जियों पर न टपके। 5. बरसात में पीने के पानी को सुरक्षित कैसे बनाएं? पीने और खाना पकाने के लिए पानी को अच्छी तरह उबालकर या आरओ फिल्टर से साफ करके ही इस्तेमाल करें और बाहर की बर्फ खाने से बचें। https://trendkia.com/health/barasata-ke-dinon-men-phuda-poijaninga-se-bachava-ke-lie-rasoi-men-apanaen-ye-6-sehatamnda-badalava-20590 TrendKia — Har trend, sabse pehle.