बड़ी गाड़ियों के पहियों पर आक्रामकता: मनोचिकित्सक ने समझाया सड़क पर बढ़ते जोखिम और दिमाग का संबंध सड़क पर बड़ी गाड़ियों की आक्रामक ड्राइविंग केवल वाहन की शक्ति नहीं, बल्कि चालकों के आंतरिक व्यवहार और मानसिक विकारों का परिणाम हो सकती है। फोर्टिस अस्पताल की विशेषज्ञ ने सड़क पर दिखने वाले हिंसक रवैये के मनोवैज्ञानिक कारणों का विश्लेषण किया है। शहरी सड़कों पर शाम के व्यस्त समय में जब जाम की स्थिति बन रही होती है, उसी दौरान कई बार भारी गाड़ियों के आक्रामक संचालन की गंभीर घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक घटना घटी जहां शाम के वक्त एक एसयूवी के चालक ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया, खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाई और छात्राओं का पीछा भी किया। छात्राओं ने इस मामले की शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई। आमतौर पर ऐसी घटनाएं सड़कों पर लगातार घटती रहती हैं, लेकिन पुलिस तक बहुत कम मामलों की औपचारिक शिकायत पहुंच पाती है। औपचारिक कार्रवाई न होने की वजह से ऐसे लापरवाह चालकों में किसी भी तरह का डर बाकी नहीं रहता, जिसके परिणामस्वरूप कोई सड़क पर रोड रेज की वारदात कर बैठता है तो कोई अन्य व्यक्ति को टक्कर मारकर भागने यानी हिट एंड रन की घटना को अंजाम दे देता है। वाहन की बनावट और चालक के दिमाग में श्रेष्ठता का भ्रम जब कोई व्यक्ति एसयूवी श्रेणी का वाहन चलाता है, तो गाड़ी का विशाल आकार, सड़क से काफी ऊंची सिटिंग पोजीशन और भारी क्षमता वाला शक्तिशाली इंजन चालक के मन में एक कृत्रिम वर्चस्व का भाव पैदा करता है। ऐसे चालकों को लगने लगता है कि उनकी गाड़ी इतनी भारी और मजबूत है कि वे किसी भी टकराव या कानूनी पचड़े से आसानी से बचकर निकल जाएंगे। हालांकि, सड़क पर इस तरह का व्यवहार करने वाले कई चालक पहले से ही विभिन्न प्रकार की मनोवैज्ञानिक या मानसिक समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। जैसे ही ऐसे लोग बड़ी गाड़ी के स्टीयरिंग पर बैठते हैं, वे उस वाहन की यांत्रिक ताकत को अपनी निजी ताकत मान लेते हैं। इस मानसिक स्थिति की वजह से वे बेहद आक्रामक तरीके से ड्राइविंग शुरू कर देते हैं, जिससे बड़ी सड़क दुर्घटनाओं की आशंका पैदा होती है। विशेषज्ञ का विश्लेषण: वाहन निर्दोष, समस्या चालक के स्वभाव में फोर्टिस अस्पताल में मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज विभाग की सीनियर कंसल्टेंट और विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा अग्रवाल के अनुसार, वर्तमान में सड़कों पर जिस तरह की अप्रिय घटनाएं घट रही हैं, उनमें यह देखा गया है कि एसयूवी चलाने वाले चालक अक्सर अधिक आक्रामक ड्राइविंग करते हैं और खतरनाक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं। हालांकि इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि ऐसी गाड़ियां चलाने वाले सभी व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं। कुछ लोगों के सामान्य स्वभाव में ही अत्यधिक अहंकार शामिल होता है और वे खुद को समाज में सबसे ऊपर साबित करने के लिए लगातार दिखावा करते रहते हैं। एसयूवी सामान्य कारों की तुलना में अधिक सुरक्षात्मक फीचर्स उपलब्ध कराती हैं। इनमें बैठने की सीटें काफी ऊंची होती हैं, आरामदायक कुशनिंग होती है, मजबूत बॉडी फ्रेम होता है और ताकतवर इंजन मिलता है। यह सब मिलकर चालक को यह भरोसा दिलाता है कि वह केबिन के भीतर पूरी तरह सुरक्षित है। जब बात खतरनाक ड्राइविंग की आती है, तो उसमें वाहन का कोई दोष नहीं होता, बल्कि चालक के भीतर पहले से मौजूद हिंसक और आक्रामक प्रवृत्ति ऐसी परिस्थितियों में खुलकर बाहर आ जाती है। ऐसे लोग जोखिम उठाने से बिल्कुल नहीं हिचकिचाते। मनोविज्ञान के नजरिए से देखें तो वाहन के सुरक्षात्मक घेरे को ऐसा व्यक्ति अपने व्यक्तिगत अहंकार का विस्तार बना लेता है। गाड़ी की यांत्रिक शक्ति को अपना व्यक्तिगत सामर्थ्य समझ लेने से उनमें एक सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स यानी काल्पनिक श्रेष्ठता की भावना हावी हो जाती है। रोड रेज से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व विकार डॉ. नेहा अग्रवाल स्पष्ट करती हैं कि जो लोग बड़ी गाड़ियां चलाकर सड़क पर विवाद और हिंसा को अंजाम देते हैं, उनमें अक्सर व्यक्तित्व से जुड़ी गंभीर समस्याएं पहले से मौजूद होती हैं। ऐसे चालकों के मानसिक पहलुओं का विश्लेषण करते समय विभिन्न विकारों की संभावना सामने आती है, जिनमें कुछ लोग नार्सिसिस्टिक व्यक्तित्व के शिकार हो सकते हैं तो कुछ असामाजिक या साइकोपैथिक प्रवृत्तियों से ग्रस्त हो सकते हैं। मुख्य रूप से ऐसे चालकों में कई प्रकार की मानसिक और भावनात्मक समस्याएं देखी जाती हैं • इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर: आईईडी एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें प्रभावित व्यक्ति सामान्य और छोटी-सी बात पर भी अचानक भड़क जाता है और अत्यधिक आक्रामक गुस्सा दिखाने लगता है। ट्रैफिक में थोड़ी सी रुकावट आ जाने, किसी दूसरी गाड़ी के हल्के से छू जाने, किसी अन्य वाहन के आगे निकल जाने या किसी के सामान्य टिप्पणी करने पर भी ऐसे लोग तुरंत अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और जानलेवा तरीके से गाड़ी दौड़ाने लगते हैं। • एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर: एएसपीडी के शिकार लोगों का व्यवहार समाज और उसके नियमों के पूरी तरह विपरीत होता है। इन लोगों में नियमों की परवाह, सार्वजनिक सुरक्षा का ध्यान या दूसरों के जान-माल के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं होती। वे कानून और ट्रैफिक नियमों को तोड़ने को अपनी बहादुरी का प्रमाण मानते हैं और खतरनाक ढंग से वाहन चलाने में उन्हें एक खास तरह का रोमांच महसूस होता है। • नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर: आत्ममुग्धता के शिकार लोग हमेशा खुद को दूसरों से श्रेष्ठ और महान समझते हैं। जब ये लोग सड़क पर भारी गाड़ी चलाते हैं, तो उन्हें भ्रम हो जाता है कि पूरी सड़क केवल उन्हीं के आवागमन के लिए बनी है। यदि कोई दूसरा चालक उन्हें ओवरटेक कर दे या पर्याप्त जगह न दे, तो वे इसे अपने आत्मसम्मान पर चोट मान लेते हैं और बदले की भावना में कोई भी खतरनाक कदम उठा लेते हैं। • क्रोध नियंत्रण का अभाव: कई लोग अपने कार्यस्थल, घर या व्यक्तिगत जीवन का तनाव और कुंठा गाड़ी चलाते समय सड़क पर अन्य लोगों पर निकालने लगते हैं। गाड़ी के बंद केबिन के भीतर व्यक्ति खुद को अनजान और छिपा हुआ महसूस करता है, जिससे उसकी सामाजिक झिझक खत्म हो जाती है और वह बिना किसी हिचक के हिंसक रूप अपना लेता है। • इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर: इस विकार से ग्रस्त व्यक्तियों में अपनी तात्कालिक भावनाओं और आवेगों को नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर होती है। वे भविष्य के परिणाम या किसी जानलेवा हादसे की परवाह किए बिना अचानक गाड़ी की रफ्तार बढ़ा देते हैं, खतरनाक मोड़ काटते हैं और सड़क पर स्टंट करने लगते हैं। इसका आप पर असर सड़क पर बड़ी गाड़ियों की आक्रामक ड्राइविंग और मानसिक असंतुलन आम जनता और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं। • भारत में: देश भर के राजमार्गों और शहरी सड़कों पर चलने वाले राहगीरों तथा छोटे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। वाहन चालकों को सड़क पर किसी भी आक्रामक प्रतिक्रिया या रोड रेज में उलझने से बचना चाहिए और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। • दिल्ली में: मुखर्जी नगर और विश्वविद्यालय परिसर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। स्थानीय नागरिकों को छेड़छाड़ या खतरनाक ड्राइविंग की घटनाओं की तुरंत पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि लापरवाह चालकों पर कानूनी नकेल कसी जा सके। • वाहन चालकों के लिए: अपनी मानसिक स्थिति, कार्यस्थल के तनाव और गुस्से पर नियंत्रण रखना बेहद आवश्यक हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति गाड़ी चलाते समय लगातार उत्तेजना या क्रोध महसूस करता है, तो उसे पेशेवर परामर्श या एंगर मैनेजमेंट की मदद लेनी चाहिए। • कानूनी जवाबदेही: सड़क पर नियमों का उल्लंघन और दूसरों का पीछा करना गंभीर आपराधिक श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में पुलिस में समय पर शिकायत दर्ज कराने से मनमाने चालकों के हौसले पस्त होते हैं और सड़कों पर कानून का डर कायम होता है। ऐसा क्यों हुआ सड़क पर एसयूवी चालकों द्वारा की जाने वाली आक्रामक ड्राइविंग वाहन की भौतिक मजबूती और चालक के मानसिक विकारों के परस्पर प्रभाव के कारण होती है। • वाहन की बनावट और आभासी श्रेष्ठता: एसयूवी का विशाल आकार, ऊंची सीट और शक्तिशाली इंजन चालक के मन में यह झूठा विश्वास पैदा कर देते हैं कि वह किसी भी दुर्घटना या टकराव में पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। यह सुरक्षात्मक आवरण चालक के निजी अहंकार को बढ़ावा देता है। • व्यक्तित्व और मानसिक विकार: आईईडी, एएसपीडी और नार्सिसिज्म जैसे विकारों से पीड़ित लोग नियमों और दूसरों की जान की परवाह नहीं करते। वे किसी के आगे निकलने या मामूली रुकावट को भी अपने सम्मान पर हमला मान लेते हैं और हिंसक हो जाते हैं। • बंद केबिन की गुमनामी और तनाव: गाड़ी के बंद केबिन में व्यक्ति खुद को बाहरी दुनिया से अलग और अनाम महसूस करता है, जिससे उसकी सामाजिक हिचक खत्म हो जाती है। इसके साथ ही दफ्तर और घर का तनाव ड्राइविंग के दौरान आक्रामकता के रूप में फूट पड़ता है। • कार्रवाई का अभाव और बेखौफ रवैया: सड़कों पर होने वाली अधिकांश बदतमीजियों और रैश ड्राइविंग की घटनाओं की पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती। कानूनी सजा का डर न होने के कारण ऐसे चालकों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जाता है। सवाल-जवाब 1. दिल्ली के मुखर्जी नगर में हाल ही में क्या घटना घटी थी? मुखर्जी नगर में शाम के समय एक एसयूवी चालक ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं से बदतमीजी की, खतरनाक ड्राइविंग की और उनका पीछा किया, जिसके बाद छात्राओं ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। 2. क्या एसयूवी चलाने वाले सभी चालक मानसिक बीमारी के शिकार होते हैं? नहीं, विशेषज्ञ के अनुसार सभी चालक मानसिक रूप से बीमार नहीं होते; कुछ लोग स्वभाव से घमंडी होते हैं और गाड़ी की ताकत को अपनी व्यक्तिगत ताकत समझकर आक्रामक हो जाते हैं। 3. आईईडी यानी इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति सड़क पर कैसा व्यवहार करता है? इस विकार से ग्रस्त व्यक्ति मामूली ट्रैफिक जाम या किसी गाड़ी के हल्के से छू जाने पर भी अचानक हिंसक गुस्सा दिखाने लगता है और खतरनाक ड्राइविंग करने लगता है। 4. नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी वाले चालक ओवरटेक किए जाने पर क्यों भड़क जाते हैं? आत्ममुग्धता से पीड़ित लोग सड़क को केवल अपनी जागीर समझते हैं, इसलिए किसी अन्य वाहन द्वारा आगे निकल जाने को वे अपने अहंकार पर चोट मान लेते हैं। 5. लोग अपनी कुंठा गाड़ी चलाते समय दूसरों पर क्यों निकालते हैं? कार के बंद केबिन में व्यक्ति खुद को छिपा हुआ और अनाम महसूस करता है, जिससे उसकी सामाजिक झिझक खत्म हो जाती है और वह दिनभर का तनाव सड़क पर निकालने लगता है। 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