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  "type": "article",
  "title": "भारत के लगभग 40 प्रतिशत युवाओं में जमा हो रही लिवर की चर्बी, एम्स के डॉक्टरों ने दिए चेतावनी संकेत",
  "summary": "भारत में फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और हालिया अध्ययन के अनुसार 38.6 प्रतिशत युवा इसकी चपेट में हैं। एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना बीमारी के गंभीर होने की मुख्य वजह है।",
  "content": "भारत में लिवर और आंत से जुड़ी गंभीर बीमारियां बेहद तेजी से पांव पसार रही हैं, जिनमें फैटी लिवर सबसे प्रमुख और तेजी से बढ़ने वाली समस्या बनकर सामने आई है। हाल ही में सामने आए एक विस्तृत अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 38.6 प्रतिशत युवा लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने यानी फैटी लिवर की बीमारी से ग्रस्त हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकतर मरीज इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते और सामान्य मोटापा समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे लिवर धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होता रहता है।\n\nयुवाओं और बच्चों में तेजी से फैल रहा फैटी लिवर का संकट\nफैटी लिवर की समस्या अब केवल ढलती उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह बेहद कम उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और ह्यूमन न्यूट्रीशन विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग के अनुसार, आज देश में लगभग 10 में से 4 युवाओं के लिवर में खतरनाक स्तर पर चर्बी जमा हो चुकी है। इससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति बच्चों की है, जहां 35.4 प्रतिशत यानी 10 में से लगभग 3 बच्चे फैटी लिवर की दिक्कत से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह स्थिति केवल सामान्य स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि देश के सामने एक विकराल संकट बनकर उभरी है।\n\nमोटापे और डायबिटीज के साथ बढ़ता लिवर फाइब्रोसिस का खतरा\nभारत में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली और असंतुलित खानपान मुख्य वजहें हैं। एम्स के अध्ययन के अनुसार, फैटी लिवर की बीमारी सीधे तौर पर मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी हुई है। जिन लोगों को पहले से हाई बीपी या डायबिटीज की शिकायत है, उनमें लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका काफी बढ़ जाती है। अध्ययनों में यह तथ्य भी सामने आया है कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लगभग 9 प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस की स्थिति पाई गई है, जिसमें लिवर के ऊतक सख्त और क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। चूंकि यह बीमारी शुरुआती चरणों में बिना किसी स्पष्ट दर्द के लिवर को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए मरीज बिना जांच के इसका अंदाजा नहीं लगा पाते।\n\nकोलोरेक्टल कैंसर और पेट की अन्य बीमारियों के मामले\nफैटी लिवर के अलावा भारत में मेटाबॉलिक समस्याओं, आंत संबंधी विकारों और कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में देश भर में आंत के कैंसर के 40,439 नए मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 24,433 मरीजों की इस बीमारी के कारण जान चली गई थी। इसके अतिरिक्त, भारतीय आबादी में हेलीकॉबैक्टर पाइलोरी संक्रमण और पेट से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियां भी व्यापक रूप से देखी जा रही हैं। डॉ. प्रमोद गर्ग ने बताया कि भारत में टीकाकरण अभियान, जागरूकता और स्वच्छता के दम पर संक्रामक रोगों पर तो प्रभावी नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन मेटाबॉलिक बीमारियों पर समय रहते ध्यान न दिए जाने के कारण आज देश महामारी जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।\n\nशुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर इलाज की जरूरत\nचिकित्सकों का कहना है कि फैटी लिवर की बीमारी अगर शुरुआती दौर में ही पकड़ में आ जाए, तो समय पर जीवनशैली में सुधार और मेडिकल परामर्श से लिवर को होने वाले बड़े नुकसान को पूरी तरह रोका जा सकता है। इसके प्रमुख चेतावनी संकेतों में लगातार थकान महसूस होना, बिना किसी कारण के तेजी से वजन घटना, मल में खून आना और आंत की आदतों या पाचन क्रिया में अचानक बदलाव आना शामिल है। एम्स में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया ने बताया कि भारत में आंत और पाचन संबंधी समस्याएं पुरानी रही हैं, लेकिन जागरूकता और आधुनिक जांच तकनीकों की कमी के कारण लोग लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज किए बिना समय पर जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर आम नागरिकों के दैनिक खानपान, शारीरिक गतिविधियों और नियमित मेडिकल जांच से जुड़ी हुई है।\n\n• नियमित स्वास्थ्य जांच: 38.6 प्रतिशत युवाओं में फैटी लिवर के लक्षणों को देखते हुए, वर्ष में कम से कम एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराना बेहद जरूरी हो गया है। समय पर जांच कराने से गंभीर क्षति को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।\n• आहार और जीवनशैली में बदलाव: जंक फूड, रिफाइंड शुगर और निष्क्रिय जीवनशैली फैटी लिवर का मुख्य कारण है। दैनिक दिनचर्या में 30 मिनट का व्यायाम और संतुलित आहार शामिल करके इस बीमारी से बचा जा सकता है।\n• डायबिटीज मरीजों के लिए सतर्कता: टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित 9 प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस देखा जा रहा है। इसलिए शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपने लिवर स्वास्थ्य की नियमित निगरानी रखनी चाहिए।\n• लक्षणों पर त्वरित कदम: लगातार थकान, बिना कारण वजन घटने या आंत की आदतों में बदलाव महसूस होने पर तुरंत पेट रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारत में फैटी लिवर और मेटाबॉलिक बीमारियों के तेजी से बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी मुख्य कारण हैं।\n\n• प्रोसेस्ड फूड और निष्क्रिय जीवनशैली: अत्यधिक वसायुक्त भोजन, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण शरीर में अतिरिक्त चर्बी लिवर में जमा होने लगती है।\n• मोटापा और डायबिटीज का बढ़ना: उच्च रक्तचाप, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियां फैटी लिवर के खतरे को सीधे तौर पर कई गुना बढ़ा देती हैं।\n• शुरुआती लक्षणों की अनदेखी: फैटी लिवर के शुरुआती चरण में कोई तेज दर्द या स्पष्ट संकेत नहीं होते, जिससे लोग इसे केवल सामान्य मोटापा समझकर सालों तक अनदेखा करते रहते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत में कितने युवा फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित हैं?\nहालिया अध्ययन के अनुसार भारत के 38.6 प्रतिशत यानी लगभग 10 में से 4 युवा फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं।\n\n2. क्या छोटे बच्चों में भी फैटी लिवर का खतरा देखा जा रहा है?\nहां, अध्ययन के मुताबिक भारत में 35.4 प्रतिशत यानी 10 में से लगभग 3 बच्चे फैटी लिवर की समस्या की चपेट में आ चुके हैं।\n\n3. साल 2022 में भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के कितने नए मामले सामने आए थे?\nवर्ष 2022 में भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के 40,439 नए मामले दर्ज किए गए थे और 24,433 मरीजों की मृत्यु हुई थी।\n\n4. टाइप-2 डायबिटीज के कितने प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस पाया गया है?\nअध्ययन के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लगभग 9 प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस की स्थिति पाई गई है।\n\n5. फैटी लिवर और आंत संबंधी विकारों के मुख्य चेतावनी लक्षण क्या हैं?\nइसके मुख्य लक्षणों में लगातार थकान, अचानक वजन घटना, मल में खून आना और आंत की आदतों या पाचन में बदलाव शामिल हैं।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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    "फैटी लिवर",
    "एम्स अध्ययन",
    "स्वास्थ्य समाचार",
    "डॉ प्रमोद गर्ग",
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