भोजन करते समय स्क्रीन से दूरी और सही नियम क्यों हैं पाचन के लिए बेहद जरूरी आयुर्वेद के अनुसार गलत खानपान और भोजन के समय गैजेट्स का इस्तेमाल पाचन बिगाड़ सकता है। भोजन का तापमान, छह रस और खाने के बाद की सही आदतें शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। दैनिक जीवन में भोजन करने का तरीका हमारी सेहत और पाचन तंत्र पर सीधा प्रभाव डालता है। जब गलत आदतों के साथ भोजन किया जाता है, तो पेट से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में आहार ग्रहण करने के स्पष्ट और संतुलित नियम निर्धारित किए गए हैं। भोजन का सही समय, थाली में परोसी गई चीजों का तापमान, पानी पीने का संतुलन और खाने के तुरंत बाद की दिनचर्या, ये सभी बातें एक व्यक्ति की संपूर्ण तंदुरुस्ती तय करती हैं। शांत वातावरण और स्क्रीन से दूरी बनाए रखना भोजन ग्रहण करते समय आसपास का माहौल पूरी तरह शांत, स्वच्छ और व्यवस्थित होना चाहिए। अक्सर लोग भोजन करते समय टेलीविजन देखने, स्मार्टफोन स्क्रॉल करने या लगातार बातचीत करने के आदी होते हैं, लेकिन आयुर्वेद के नियमों में इस आदत से पूरी तरह बचने का सुझाव दिया गया है। जब मन और आंखें स्क्रीन या बातचीत में उलझी रहती हैं, तो खाने पर से पूरा ध्यान हट जाता है। भोजन करते समय प्रत्येक निवाले को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए। खाने को न तो बिना चबाए जल्दबाजी में निगलना चाहिए और न ही थाली के सामने जरूरत से ज्यादा देर तक सुस्त बैठकर समय बिताना चाहिए। थाली में भोजन का सही तापमान तापमान के मामले में लोग अक्सर दो चरम सीमाओं पर चले जाते हैं। कुछ लोग खौलता हुआ और अत्यधिक गर्म खाना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग सीधे रेफ्रिजरेटर से ठंडा भोजन निकालकर खा लेते हैं। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से यह दोनों ही तरीके पाचन तंत्र के लिए हानिकारक हैं। भोजन का तापमान न तो अत्यधिक गर्म होना चाहिए और न ही बिल्कुल ठंडा या बासी। सामान्य तापमान पर रखा गया भोजन या हल्का गुनगुना आहार पाचन प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में सबसे अधिक मददगार साबित होता है। आहार में छह रसों का संपूर्ण संतुलन आयुर्वेद की संकल्पना में छह विशिष्ट स्वादों या रसों को संतुलित भोजन की अनिवार्य कुंजी माना गया है। इन छह रसों में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला शामिल हैं। एक आदर्श थाली वही है, जिसमें इन सभी अलग-अलग रसों का यथोचित समावेश हो। अपनी नियमित थाली में फल, दालें, ताजी सब्जियां और सलाद को विविधता के साथ शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व और प्राकृतिक संतुलन प्राप्त हो सके। पानी पीने का उचित समय और सही मात्रा भोजन के समय पानी पीने का नियम भी पाचन अग्नि को सुरक्षित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खाना खाने से ठीक पहले या भोजन खत्म करते ही बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से सख्त परहेज करना चाहिए। भोजन के तुरंत बाद अधिक पानी पीने से पाचक रसों का प्रभाव कमजोर पड़ता है, जिससे पाचन धीमा हो सकता है। यदि भोजन करते समय गले में सूखापन महसूस हो या प्यास लगे, तो केवल एक या दो घूंट हल्का पानी ही पीना चाहिए। हल्का डिनर और सोने से पहले पर्याप्त अंतराल दिन के भोजन की तुलना में रात का खाना हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए। दिन ढलने के बाद शरीर की चयापचय दर स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है। इसलिए रात को सोने के समय से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले भोजन समाप्त कर लेना सबसे उत्तम माना गया है। सोने और खाने के बीच यह समय अंतराल शरीर के आंतरिक अंगों को भोजन पचाने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। रात के भोजन के बाद हल्की चहलकदमी खाना खाते ही तुरंत सो जाना या सीधे बिस्तर पर लेट जाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। रात के भोजन के बाद कुछ देर की हल्की सैर की सलाह दी जाती है। रात को आराम से 100 कदम टहलना पाचन क्रिया को गति देने और पेट में भारीपन की शिकायत को कम करने के लिए सबसे आसान और असरदार तरीका है। खाने के तुरंत बाद भारी कसरत से बचाव भोजन समाप्त करने के फौरन बाद जिम जाना, भारी वजन उठाना या कोई भी कठिन शारीरिक कसरत करना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। भोजन के बाद रक्त संचार पाचन अंगों की ओर बढ़ता है, इसलिए शरीर को शांत रहने और आराम करने की जरूरत होती है। खाने के बाद पहले कुछ समय तक सामान्य और सहज दैनिक गतिविधियां ही करनी चाहिए, उसके बाद ही किसी मेहनत वाले काम या व्यायाम में संलग्न होना चाहिए। इसका आप पर असर भोजन करने के तौर-तरीकों में छोटे बदलाव लाकर आम लोग पाचन संबंधी बीमारियों और दैनिक थकान से बच सकते हैं। • दैनिक दिनचर्या में: भोजन करते समय टीवी और फोन बंद रखने से एकाग्रता बढ़ती है। इससे अधिक खाने की आदत से बचाव होता है और पेट की गैस या अपच का खतरा घटता है। • आहार योजना में: अपनी थाली में छह प्रकार के स्वादों को जोड़ना पोषण में विविधता लाता है। इसके लिए नियमित भोजन में दाल, मौसमी सब्जियां और सलाद शामिल करना पर्याप्त होता है। • शाम के समय: रात का भोजन हल्का रखने और सोने से 2-3 घंटे पहले खाने की आदत पाचन चक्र को सुधारती है। इससे रात में भारीपन की शिकायत नहीं होती और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। • कसरत के समय: भोजन के बाद भारी कसरत या जिम जाने से बचकर केवल 100 कदम टहलना चाहिए। यह साधारण आदत सीने में जलन और उल्टी जैसी समस्याओं से सुरक्षित रखती है। ऐसा क्यों हुआ गलत तरीके से भोजन करने और भोजन के दौरान ध्यान भटकने से पाचन प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। खानपान की अनुचित आदतों से होने वाली परेशानियों के पीछे कई मुख्य कारण जिम्मेदार होते हैं। • ध्यान भटकने का प्रभाव: स्क्रीन देखने या बात करने से मस्तिष्क भोजन की प्रक्रिया पर केंद्रित नहीं रह पाता। नतीजतन लोग बिना ठीक से चबाए तेजी से निवाला निगल लेते हैं, जिससे पेट पर अतिरिक्त भार पड़ता है। • गलत तापमान से बाधा: बहुत अधिक ठंडा भोजन पाचक रसों की सक्रियता को धीमा कर देता है, जबकि जरूरत से ज्यादा गर्म भोजन आंतरिक परत को परेशान करता है। गुनगुना या सामान्य भोजन पाचन क्रिया को स्वाभाविक बनाए रखता है। • भोजन के तुरंत बाद आराम और पानी: खाने के ठीक बाद ढेर सारा पानी पीना पाचक पाचक द्रवों को पतला कर देता है। इसके अलावा तुरंत लेट जाने या भारी वजन उठाने से रक्त का प्रवाह पाचन अंगों से हट जाता है, जिससे अपच शुरू होती है। सवाल-जवाब 1. आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय टीवी या मोबाइल देखना क्यों गलत है? स्क्रीन देखने से ध्यान खाने पर नहीं रहता, जिससे व्यक्ति बिना चबाए जल्दी-जल्दी खाना निगलने लगता है और पाचन खराब होता है। 2. भोजन का तापमान कैसा होना चाहिए? भोजन न तो बहुत ज्यादा गर्म होना चाहिए और न ही फ्रिज से निकाला हुआ ठंडा। सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना खाना पाचन के लिए सबसे अच्छा है। 3. आयुर्वेद के अनुसार थाली में कौन से छह रस होने चाहिए? थाली में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला, ये सभी छह स्वाद शामिल होने चाहिए। 4. खाने के तुरंत बाद पानी क्यों नहीं पीना चाहिए? खाने के ठीक पहले या बाद में बहुत सारा पानी पीने से पाचन प्रभावित होता है। जरूरत पड़ने पर खाते समय केवल घूंट-घूंट पानी पिया जा सकता है। 5. रात का खाना सोने से कितनी देर पहले खा लेना चाहिए? डिनर सोने के समय से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले कर लेना चाहिए ताकि शरीर को खाना पचाने का पर्याप्त समय मिल सके। 6. खाना खाने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए? खाने के तुरंत बाद लेटने या भारी कसरत करने से बचना चाहिए और आराम से लगभग 100 कदम टहलना चाहिए। https://trendkia.com/health/bhojan-karte-samay-screen-se-doori-aur-sahi-niyam-kyon-hain-pachan-ke-liye-behad-jaroori-53779 TrendKia — Har trend, sabse pehle.