बिहार के पारंपरिक खानपान को मिला वैश्विक मंच, ब्रिक्स समिट 2026 की मीडिया किट में शामिल हुआ सत्तू और मखाना नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान विदेश मंत्रालय ने विदेशी पत्रकारों और प्रतिनिधियों को दिए गए विशेष मीडिया किट में बिहार का प्रसिद्ध सत्तू और मखाना शामिल किया है, जिसका उद्देश्य भारतीय स्थानीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है। पूर्वी भारत के ग्रामीण रसोई घरों से निकलकर एक पारंपरिक और देसी खाद्य पदार्थ अब सीधे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक मंच पर पहुंच गया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान, दुनिया भर से आए मीडिया कर्मियों और विदेशी प्रतिनिधियों को दिए गए विशेष मीडिया किट में बिहार के प्रसिद्ध सत्तू और मखाने को शामिल किया गया। विदेश मंत्रालय द्वारा की गई इस अनोखी पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध खाद्य संस्कृतियों को बढ़ावा देना तथा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाना है। सत्तू लंबे समय से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के दैनिक खानपान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी इस मौजूदगी ने इसे एक बड़ा गौरव प्रदान किया है। जानिए क्या है सत्तू और इसे क्यों कहते हैं 'देसी सुपरफूड' सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने या अन्य अनाजों को पीसकर तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक आटा है। इसे बनाने और इस्तेमाल करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल, किफायती और समय की बचत करने वाली होती है। पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से ही इसे "देसी सुपरफूड" का दर्जा दिया गया है। ऐतिहासिक रूप से, यह पूर्वी भारत के करोड़ों लोगों के लिए ऊर्जा का एक विश्वसनीय स्रोत रहा है। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए सत्तू का शरबत बड़े पैमाने पर पिया जाता है, जबकि दैनिक भोजन के रूप में सत्तू का पराठा और पारंपरिक लिट्टी लोगों के पसंदीदा व्यंजनों में शामिल हैं। पोषण का खजाना और इसके बेमिसाल फायदे इस पारंपरिक आहार में बढ़ती रुचि का मुख्य कारण इसकी शानदार पोषण क्षमता है। प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सत्तू सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इसकी एक और बड़ी खूबी यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता है, जिससे इसे बिना किसी विशेष रखरखाव के लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और कभी भी खाया जा सकता है। इसमें मौजूद प्रचुर फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों की मजबूती और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक माना जाता है। सत्तू को अपनी नियमित डाइट में शामिल करने के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं • दीर्घकालिक ऊर्जा: सत्तू शरीर को लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखने के लिए लगातार ऊर्जा प्रदान करने में सहायक साबित हो सकता है। • भूख पर नियंत्रण: इसमें मौजूद फाइबर पेट को काफी देर तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अवांछित भूख और बार-बार खाने की आदत पर लगाम लगती है। • पाचन क्रिया में सुधार: इसका नियमित सेवन पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने और पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मददगार माना जाता है। • भीषण गर्मी में हाइड्रेशन: तेज गर्मी के दिनों में सत्तू का ठंडा शरबत शरीर के तापमान को संतुलित रखने और बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। खानपान के तरीके और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी सावधानियां सत्तू का सेवन करना बेहद आसान है। इसे पानी, ताजे नींबू के रस और चुनिंदा मसालों के साथ घोलकर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद पेय पदार्थ के रूप में पिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, सत्तू के पराठे, लिट्टी और कई अन्य पारंपरिक व्यंजनों में भरावन के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, भले ही सत्तू आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी है, लेकिन गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसके सेवन में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। विशेष रूप से मधुमेह, किडनी की बीमारी या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे मरीजों को अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। इसका आप पर असर ब्रिक्स समिट 2026 में सत्तू और मखाने जैसे पारंपरिक खाद्यों को मिली वैश्विक पहचान से क्षेत्रीय किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आम उपभोक्ताओं को बेहतर पोषण के विकल्प मिलेंगे। • बिहार में: चने और मखाने की खेती करने वाले स्थानीय किसानों के उत्पादों की मांग में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे किसानों को अपनी फसलों का बेहतर दाम मिलेगा और बिचौलियों से मुक्ति मिल सकेगी। • पूरे भारत में: देश भर के उपभोक्ताओं को अब बड़े रिटेल स्टोर पर अच्छी पैकेजिंग वाला और शुद्ध सत्तू आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इसके चलते शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए इस पारंपरिक सुपरफूड को खरीदना बेहद सुलभ हो जाएगा। • सस्ता फिटनेस विकल्प: फिटनेस के प्रति जागरूक लोग महंगे विदेशी प्रोटीन पाउडर के स्थान पर इस बेहद किफायती और प्राकृतिक विकल्प को चुन सकते हैं। रोजाना व्यायाम करने वालों के लिए यह एक सस्ता और केमिकल-मुक्त एनर्जी ड्रिंक साबित होगा। • निर्यात के अवसर: पूर्वी भारत के छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को सरकारी योजनाओं और निर्यात प्रोत्साहन का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे स्थानीय उद्यमी अपने प्रोडक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ ब्रिक्स समिट 2026 की मीडिया किट में बिहार के सत्तू और मखाने को शामिल करने का मुख्य कारण भारत सरकार द्वारा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की रणनीतिक पहल है। विदेश मंत्रालय ने इस हाई-प्रोफाइल राजनयिक बैठक का उपयोग दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों के सामने देश की कृषि संपदा को प्रदर्शित करने के लिए किया है। • स्थानीय विरासत का वैश्वीकरण: विदेश मंत्रालय ने भारतीय व्यंजनों को एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच देने के लिए यह कदम उठाया। यह सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को वैश्विक स्तर पर ले जाने की नीति का हिस्सा है। • पोषण को बढ़ावा देना: लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के इस दौर में सत्तू को 'देसी सुपरफूड' के रूप में पेश कर भारत अपनी स्वास्थ्यवर्धक खाद्य परंपराओं को दुनिया के सामने लाना चाहता है। इससे विदेशी मेहमानों को भारत के समृद्ध इतिहास और सेहतमंद खानपान का परिचय मिलता है। • राजनयिक उपहारों में बदलाव: आजकल राजनयिक आयोजनों में महंगे विलासिता के सामानों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थानीय उपहार देने का चलन बढ़ा है। यह बदलाव भारत की वास्तविक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि विविधता को प्रदर्शित करता है। https://trendkia.com/health/bihar-ke-parnparika-khanapana-ko-mila-vaishvika-mncha-brics-summit-2026-ki-midiya-kita-men-shamila-hua-sattu-aura-makhana-31570 TrendKia — Har trend, sabse pehle.