बीकानेर के डॉक्टरों ने 13 साल की बच्ची की दुर्लभ जन्मजात बीमारी का किया सफल इलाज, दिल्ली में मिला सर्वोच्च सम्मान बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की मेडिकल टीम ने जन्म से ही शरीर के बाहर मूत्राशय की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित एक बच्ची की सफल सर्जरी की है, जिसके लिए नई दिल्ली में आयोजित यूरोलॉजी सम्मेलन में उनके शोध को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है। बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े पीबीएम अस्पताल की एक विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल जन्मजात विकार का सफल इलाज कर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी हासिल की है। 13 साल की एक बच्ची पर की गई इस जटिल सिंगल-स्टेज सर्जरी ने न केवल उस बच्ची का जीवन पूरी तरह से बदल दिया है, बल्कि नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित चिकित्सा सम्मेलन में यूरोलॉजी विभाग को सर्वोच्च सम्मान भी दिलाया है। इस बड़ी उपलब्धि को चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय मंच पर राजस्थान के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान मिली है। एक चुनौतीपूर्ण जन्मजात बीमारी का सफल इलाज यह पूरा मामला क्लासिक ब्लैडर एक्सस्ट्रॉफी नामक एक बेहद दुर्लभ जन्मजात विकार से जुड़ा हुआ है। इस गंभीर बीमारी में पीड़ित बच्चे का मूत्राशय जन्म के समय से ही शरीर के बाहर की तरफ विकसित हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति का इलाज करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पारंपरिक तरीकों की बात करें, तो इस गंभीर शारीरिक बनावट की खामी को ठीक करने के लिए मरीज को एक लंबे समय तक कई अलग-अलग चरणों में कठिन ऑपरेशनों के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन पीबीएम अस्पताल की सर्जिकल टीम ने इस आम बहु-चरणीय प्रक्रिया से अलग रास्ता चुना। उन्होंने एक बेहद जटिल पुनर्निर्माणात्मक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए सिर्फ एक ही चरण में इस विकार को पूरी तरह से ठीक कर दिया, जिससे युवा मरीज को बार-बार सर्जरी की शारीरिक और मानसिक पीड़ा से बचा लिया गया। राजधानी नई दिल्ली में मिली राष्ट्रीय स्तर की पहचान इस अभूतपूर्व सर्जिकल सफलता को हाल ही में नेशनल वूमेन ऑफ यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस में बड़े चिकित्सा समुदाय के सामने प्रस्तुत किया गया। देश की राजधानी स्थित मशहूर वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम में पूरे भारत से जाने-माने यूरोलॉजिस्ट, अनुभवी सर्जन, शोधकर्ता और चिकित्सा विशेषज्ञ एक मंच पर इकट्ठा हुए थे। इस पूरे सम्मेलन के दौरान, विशेषज्ञों ने यूरोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध कार्यों, जटिल सर्जिकल नवाचारों और आधुनिक उपचार के तरीकों को लेकर गहन वैज्ञानिक चर्चा की। देश भर के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों ने यहां अपने-अपने क्लिनिकल परिणाम पेश किए, लेकिन इन सबके बीच बीकानेर की मेडिकल टीम द्वारा किए गए इस अग्रणी काम ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा और इसे सबसे बेहतरीन माना गया। विजेता शोध और विशेषज्ञों की सराहना इस राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, पीबीएम अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश चन्द्र आर्य ने अपने सहयोगी डॉ. आई. डी. चरण के साथ मिलकर दो अलग-अलग महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध पोस्टर प्रस्तुत किए। निर्णायक मंडल ने 13 वर्षीय बालिका के इस एकल-चरण पुनर्निर्माणात्मक सर्जरी पर आधारित विस्तृत शोध अध्ययन को सबसे उत्कृष्ट मानते हुए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम में मौजूद देशभर के चिकित्सा दिग्गजों ने इस विस्तृत शोध की जमकर तारीफ की और इसे पुनर्निर्माणात्मक यूरोलॉजी के विशिष्ट क्षेत्र में एक शानदार योगदान करार दिया। सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह स्वीकार किया कि बीकानेर की टीम द्वारा अपनाई गई यह सफल एकल-चरण सर्जरी तकनीक, भविष्य में ऐसे ही जटिल और दुर्लभ चिकित्सा मामलों का सामना करने वाले सर्जनों के लिए एक नई दिशा और उम्मीद की किरण साबित हो सकती है। इसका आप पर असर • भारत में: यह जटिल चिकित्सा सफलता दिखाती है कि देश के सरकारी अस्पतालों में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की दुर्लभ बीमारियों का भी विश्वस्तरीय इलाज संभव हो रहा है। • राजस्थान में: राज्य के मरीजों को अब ऐसी गंभीर जन्मजात बीमारियों के इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा, क्योंकि बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में ही इसका सफल इलाज उपलब्ध है। सवाल-जवाब 1. यह दुर्लभ बीमारी कौन सी थी जिसका बीकानेर में इलाज हुआ? यह क्लासिक ब्लैडर एक्सस्ट्रॉफी नामक एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी, जिसमें बच्ची का मूत्राशय जन्म से ही शरीर के बाहर विकसित हो गया था। 2. इस सर्जरी में क्या खास बात थी? इस बीमारी के इलाज के लिए आमतौर पर कई चरणों में ऑपरेशन करने पड़ते हैं, लेकिन पीबीएम अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे सिर्फ एक ही चरण में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। 3. इस उपलब्धि के लिए डॉक्टरों को कहाँ सम्मानित किया गया? चिकित्सकों की टीम को नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आयोजित नेशनल वूमेन ऑफ यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस में उनके शोध के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। 4. इस विजेता शोध का नेतृत्व किसने किया था? इस शोध और प्रस्तुति का नेतृत्व पीबीएम अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश चन्द्र आर्य ने डॉ. आई. डी. चरण के साथ मिलकर किया था। प्रेरणा और सबक • चुनौतियों का अभिनव समाधान: बीकानेर के डॉक्टरों ने पारंपरिक बहु-चरणीय सर्जरी की बजाय एक ही चरण में ऑपरेशन पूरा करके यह साबित किया कि पुरानी विधियों में नवाचार करके बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। • समर्पण और शोध: किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट काम तभी संभव है जब उसके पीछे गहरी रिसर्च हो; डॉक्टरों की सफलता उनके विस्तृत वैज्ञानिक शोध का ही नतीजा थी। • स्थानीय संसाधनों पर भरोसा: यह सफलता सिखाती है कि महान उपलब्धियां केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं हैं, सही कौशल हो तो छोटे शहरों के संस्थानों में भी इतिहास रचा जा सकता है। https://trendkia.com/health/bikaner-ke-doktaron-ne-13-sala-ki-bachchi-ki-durlabha-janmajata-bimari-ka-kiya-saphala-ilaja-delhi-men-mila-sarvochcha-sammana-9180 TrendKia — Har trend, sabse pehle.