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  "type": "article",
  "title": "बिना चीर-फाड़ 15 मिनट में लगा कैप्सूल जैसा पेसमेकर, गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग को मिला नया जीवन",
  "summary": "दिल्ली के एक अस्पताल में दो बार दिल की ओपन सर्जरी करवा चुके 65 वर्षीय मरीज को बिना किसी तार या चीरे के आधुनिक लीडलेस पेसमेकर लगाकर स्वस्थ किया गया।",
  "content": "हृदय रोग से जूझ रहे एक 65 वर्षीय व्यक्ति देहरादून और दिल्ली के तमाम बड़े अस्पतालों के चक्कर काटकर पूरी तरह मायूस हो चुके थे। कई जगह जांच और परामर्श के बाद जब कोई सुरक्षित रास्ता नहीं सूझ रहा था, तब वह नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि मरीज को पेसमेकर की सख्त जरूरत है। हालांकि, यह निर्णय लेना आसान नहीं था क्योंकि मरीज की पहले ही दो बार ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी थी। इसके अतिरिक्त, उनके दिल के दाहिने हिस्से में एक मैटेलिक वाल्व लगा हुआ था। ऐसे जटिल ढांचे के बीच परंपरागत तरीके से छाती चीरकर वाल्व को पार करना डॉक्टरों के लिए बेहद पेचीदा और मरीज की जान के लिए अत्यंत जोखिम भरा था।\n\nजटिल चुनौती और डॉक्टर का विशेष फैसला\nइस विकट परिस्थिति में अपोलो हॉस्पिटल इंद्रप्रस्थ में क्लिनिकल लीड, कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी डॉ. विनीता अरोड़ा ने मामले को बारीकी से समझा। उन्होंने पाया कि तीसरी बार छाती खोलना मरीज के जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है। गहन विचार-विमर्श के बाद उन्होंने पारंपरिक सर्जरी के बजाय एक आधुनिक विकल्प चुना, जिसे लीडलेस पेसमेकर कहा जाता है। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया में न तो किसी तार की जरूरत होती है और न ही बड़े चीरे की। मात्र 15 मिनट के भीतर यह कैप्सूल जैसा छोटा उपकरण मरीज के दिल में स्थापित कर दिया गया और उसी दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। उपचार के बाद वह मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं और गोल्फ तथा क्रिकेट खेलने जैसी दौड़-भाग वाली गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।\n\nहृदय गति और पेसमेकर की कार्यप्रणाली\nडॉ. विनीता अरोड़ा ने समझाया कि पेसमेकर लगाने की आवश्यकता तब पड़ती है जब किसी व्यक्ति के दिल की धड़कन अत्यधिक धीमी या कमजोर हो जाती है। पेसमेकर के भीतर एक विशेष बैटरी मौजूद होती है जो लगातार हल्का विद्युत प्रवाह उत्पन्न करती है। सरल शब्दों में कहें तो यह उपकरण दिल के लिए एक इनवर्टर की तरह कार्य करता है, जो धड़कन को नियंत्रित कर उसे जरूरी गति और लय प्रदान करता है। इसी वजह से कमजोर धड़कन वाले मरीजों के लिए यह जीवनरक्षक साबित होता है।\n\n1958 से 2016 तक का तकनीकी सफर\nचिकित्सा इतिहास पर नजर डालें तो दुनिया का पहला पेसमेकर वर्ष 1958 में लगाया गया था। उस दौर का उपकरण आकार में काफी बड़ा था और उसमें तार यानी लीड लगे होते थे। इन तारों के कारण मरीजों को अक्सर संक्रमण, त्वचा की एलर्जी और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता था। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए वर्ष 1970 में पहली बार लीडलेस तकनीक की दिशा में प्रयास हुए। आगे चलकर व्यापक अनुसंधानों और संशोधनों के बाद वर्ष 2016 में एक नया लीडलेस पेसमेकर पेश किया गया, जिसका आकार महज एक छोटी दवा की कैप्सूल जितना है। यह तकनीक वर्तमान में सबसे अधिक सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है, जिसे महज 15 मिनट में बिना किसी जटिल सर्जरी के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।\n\nलागत, दीर्घकालिक लाभ और अस्पताल की सुविधाएं\nइस आधुनिक कैप्सूलनुमा पेसमेकर की वित्तीय लागत लगभग 15 से 16 लाख रुपये तक आती है। भले ही यह पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में अधिक खर्चीला हो, लेकिन इसकी कार्यक्षमता 15 से 20 वर्ष तक बनी रहती है। इसमें किसी भी तरह के तार न होने से इन्फेक्शन और दर्द का खतरा समाप्त हो जाता है। साथ ही प्रक्रिया के तुरंत बाद उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिलना मरीज और उसके परिवार दोनों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित होता है। यही कारण है कि अब सरकारी और निजी दोनों तरह के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में जटिल हृदय रोगियों के लिए लीडलेस पेसमेकर को प्राथमिकता दी जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nयह नई चिकित्सा तकनीक जटिल हृदय रोगियों के लिए बिना जोखिम के इलाज का एक सुरक्षित और त्वरित विकल्प प्रदान करती है।\n\n• इलाज की सुविधा: बिना चीरा लगाए मात्र 15 मिनट में प्रक्रिया पूरी हो जाती है। मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है जिससे लंबा समय भर्ती नहीं रहना पड़ता।\n• शारीरिक राहत: तारों की गैरमौजूदगी के कारण संक्रमण और दर्द से पूरी सुरक्षा मिलती है। मरीज बहुत जल्द सामान्य दिनचर्या में लौटकर खेलकूद और दौड़-भाग कर सकते हैं।\n• दीर्घकालिक स्थिरता: यह आधुनिक उपकरण 15 से 20 साल तक निरंतर काम करता है। बार-बार सर्जरी कराने के खतरे से मरीजों को पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है।\n• आर्थिक बजट: इसकी कीमत लगभग 15 से 16 लाख रुपये के बीच आती है। हालांकि यह महंगी है, लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों में उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमरीज के दिल की दो बार पूर्व में सर्जरी हो चुकी थी और उनके दिल के दाहिने हिस्से में एक मैटेलिक वाल्व लगा हुआ था, जिसके चलते पारंपरिक पेसमेकर लगाना जानलेवा हो सकता था।\n\n• सर्जरी की जटिलता: पूर्व में दो ओपन हार्ट सर्जरी होने के कारण तीसरी बार छाती खोलना बेहद जोखिम भरा था। डॉक्टरों ने पाया कि सामान्य सर्जिकल ऑपरेशन मरीज के जीवन पर भारी पड़ सकता था।\n• मैटेलिक वाल्व की रुकावट: दिल के दाहिनी तरफ मैटेलिक वाल्व लगा होने के कारण तारों को पार कराना तकनीकी रूप से असंभव जैसा था। परंपरागत तारों वाला पेसमेकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था।\n• लीडलेस तकनीक का चयन: संक्रमण और दर्द से बचाने के लिए 2016 में विकसित कैप्सूल जैसे आधुनिक पेसमेकर को चुना गया। बिना किसी तार के काम करने वाला यह उपकरण सुरक्षित रूप से दिल में स्थापित किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मरीज को पेसमेकर लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?\nमरीज के दिल की धड़कन कमजोर और धीमी हो गई थी, जिसे नियमित करने के लिए पेसमेकर लगाना जरूरी था।\n\n2. इस मामले में पारंपरिक सर्जरी क्यों नहीं की जा सकी?\nमरीज की पहले दो बार ओपन सर्जरी हो चुकी थी और दिल में मैटेलिक वाल्व था, जिससे तीसरी बार छाती खोलना जानलेवा हो सकता था।\n\n3. लीडलेस पेसमेकर को लगाने में कितना समय लगता है?\nइस कैप्सूल जैसे छोटे पेसमेकर को दिल में स्थापित करने में केवल 15 मिनट का समय लगता है।\n\n4. लीडलेस पेसमेकर की अनुमानित कीमत और लाइफ कितनी है?\nइसकी लागत करीब 15 से 16 लाख रुपये होती है और यह 15 से 20 साल तक कार्य करता है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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    "पेसमेकर",
    "लीडलेस पेसमेकर",
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