बिना दर्द वाली ब्रेस्ट गांठ को ना समझें मामूली, फरीदाबाद की डॉक्टर शिवेता रजदान ने दिए जरूरी सुझाव ब्रेस्ट में बिना दर्द की गांठ को अक्सर महिलाएं साधारण समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि 80 से 90 प्रतिशत कैंसर गांठों में शुरुआत में दर्द नहीं होता। फरीदाबाद अमृता अस्पताल की डॉक्टर शिवेता रजदान ने इसके शुरुआती लक्षणों और जरूरी सावधानियों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। ब्रेस्ट में किसी भी प्रकार की गांठ महसूस होते ही महिलाओं के मन में घबराहट होना स्वाभाविक है। अधिकांश महिलाएं यह सोचकर निश्चिंत हो जाती हैं कि अगर गांठ में दर्द नहीं है, तो वह खतरे से बाहर है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दर्द न होना हमेशा सामान्य स्थिति की गारंटी नहीं होता। ब्रेस्ट में पाई जाने वाली हर गांठ कैंसर की नहीं होती, लेकिन शरीर में आए किसी भी नए बदलाव की तुरंत डॉक्टरी जांच कराना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान होने से सटीक निदान और प्रभावी इलाज संभव हो पाता है। हर गांठ कैंसर नहीं होती, पर जांच कराना जरूरी सामान्य शल्य चिकित्सा के स्तन रोग विभाग की वरिष्ठ सलाहकार और सहायक प्रोफेसर डॉक्टर शिवेता रजदान के अनुसार, ब्रेस्ट में बनने वाली गांठें कई तरह की हो सकती हैं। इनमें से कुछ गांठें कैंसरयुक्त हो सकती हैं, जबकि कई पूरी तरह से बेनाइन या सामान्य होती हैं। कम उम्र की महिलाओं में पानी वाली गांठें यानी सिस्ट और फाइब्रोएडीनोमा जैसी सामान्य गांठें काफी देखने को मिलती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन गांठों में दर्द नहीं होता, वे भी कैंसर की गांठें हो सकती हैं। इसलिए किसी भी गांठ को बिना जांच के सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। छोटी गांठ को भी न करें नजरअंदाज कैंसर की गांठ शुरुआत में बहुत छोटी होती है और धीरे-धीरे विकसित होती है। यदि किसी महिला को अपने ब्रेस्ट में कोई गांठ महसूस होती है और वह दो से तीन सप्ताह के भीतर खुद समाप्त नहीं होती या उसके आकार में बढ़ोतरी होने लगती है, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती चरण में ही बीमारी पकड़े जाने पर इलाज के बेहतर और असरदार विकल्प उपलब्ध होते हैं। यही कारण है कि छोटी गांठ समझकर लापरवाही बरतना घातक साबित हो सकता है। गांठ के अलावा इन शुरुआती लक्षणों पर दें ध्यान ब्रेस्ट कैंसर का सबसे मुख्य और आम लक्षण गांठ ही है, लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य शारीरिक बदलाव दिखाई दे सकते हैं। यदि निप्पल से किसी भी तरह का पानी या खून जैसा रिसाव आ रहा हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा निप्पल का अंदर की तरफ खिंच जाना या उसकी सामान्य बनावट में बदलाव आना भी अस्वाभाविक संकेत है। ब्रेस्ट की त्वचा में अचानक कोई बदलाव दिखना, आकार का बिगड़ना, लालिमा आना या बार-बार संक्रमण जैसा प्रतीत होना भी जांच कराने की चेतावनी देता है। कम उम्र की महिलाओं और पारिवारिक इतिहास का जोखिम यह एक आम धारणा है कि ब्रेस्ट कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं को प्रभावित करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। 20, 22 और 30 साल की युवा महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर देखा जा सकता है, हालांकि इस आयु वर्ग में मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम होती है। जिन महिलाओं के परिवार में मां, मौसी या नानी को ब्रेस्ट कैंसर या अंडाशय का कैंसर रहा हो, उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए। यदि परिवार में एक या दो से ज्यादा सदस्यों को यह बीमारी रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर 30 साल की उम्र से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए। हर महीने खुद कैसे करें ब्रेस्ट की जांच? महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। इसके लिए हर महीने पीरियड्स खत्म होने के 4 से 5 दिन बाद खुद ब्रेस्ट की जांच की जा सकती है। यदि इस स्व-जांच के दौरान कोई नई गांठ, आकार में विषमता या अन्य परेशानी महसूस होती है, तो उसे टालना नहीं चाहिए। पीरियड्स खत्म होने के बाद भी यदि कोई गांठ बनी रहती है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर उसकी जांच करानी चाहिए। 80 से 90 प्रतिशत कैंसर गांठों में नहीं होता दर्द अधिकांश लोगों में यह भ्रम फैला हुआ है कि कैंसर की गांठ में दर्द जरूर होता है। डॉक्टरी आंकड़ों के अनुसार, 80 से 90 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर की गांठों में शुरुआती अवस्था में कोई दर्द नहीं महसूस होता। जब कैंसर की गांठ में दर्द शुरू होता है, तो कई बार यह बीमारी के अगले चरण में पहुंचने का इशारा होता है। ऐसा तब होता है जब कैंसर कोशिकाएं आसपास की नसों या मांसपेशियों तक फैलने लगती हैं। इसलिए दर्द होने का इंतजार किए बिना किसी भी गांठ की समय पर जांच कराना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम है। इसका आप पर असर यह स्वास्थ्य चेतावनी देश भर की महिलाओं के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है, क्योंकि शुरुआती चरण में पहचान से ब्रेस्ट कैंसर का इलाज बेहद सुलभ हो जाता है। • भारत में: करीब 80 से 90 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर मामलों में शुरुआत में दर्द नहीं होता, इसलिए दर्द का इंतजार किए बिना महिलाओं को हर महीने स्व-जांच की आदत डालनी चाहिए। • फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में: अमृता अस्पताल जैसे क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों में स्तन रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेकर समय रहते आवश्यक टेस्ट और स्क्रीनिंग कराई जा सकती है। • पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं के लिए: यदि परिवार में मां, मौसी या नानी को ब्रेस्ट या अंडाशय का कैंसर रहा हो, तो 30 साल की उम्र से ही डॉक्टर की देखरेख में नियमित स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए। • युवा महिलाओं के लिए: 20, 22 या 30 वर्ष की आयु में गांठ दिखने पर उसे साधारण समझकर न छोड़ें, 2 से 3 सप्ताह में ठीक न होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें। सवाल-जवाब 1. क्या ब्रेस्ट में बिना दर्द वाली गांठ भी कैंसर हो सकती है? हां, 80 से 90 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर की गांठों में शुरुआती दौर में बिल्कुल दर्द नहीं होता है। दर्द न होने पर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। 2. ब्रेस्ट में गांठ महसूस होने पर कब तक इंतजार किया जा सकता है? यदि कोई गांठ 2 से 3 सप्ताह के भीतर अपने आप समाप्त नहीं होती या उसका आकार बढ़ता है, तो तुरंत ब्रेस्ट कैंसर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। 3. क्या 20 या 30 साल की कम उम्र में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है? हां, हालांकि कम उम्र में मामले कम होते हैं, लेकिन 20, 22 और 30 साल की उम्र में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले देखे गए हैं। 4. घर पर खुद ब्रेस्ट की जांच करने का सही समय क्या है? महिलाओं को हर महीने पीरियड्स खत्म होने के 4 से 5 दिन बाद खुद ब्रेस्ट की जांच करनी चाहिए। 5. किन महिलाओं को 30 वर्ष की आयु से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए? जिनके परिवार में मां, मौसी या नानी को ब्रेस्ट या अंडाशय का कैंसर रहा हो, उन्हें 30 वर्ष की उम्र से ही डॉक्टर की सलाह पर जांच करानी चाहिए। 6. गांठ के अलावा ब्रेस्ट कैंसर के अन्य क्या लक्षण होते हैं? निप्पल से खून या पानी जैसा रिसाव, निप्पल का अंदर खिंचना, त्वचा या आकार में बदलाव और बार-बार लालिमा या संक्रमण दिखना इसके लक्षण हैं। https://trendkia.com/health/bina-darda-vali-bresta-gantha-ko-na-samajhen-mamuli-faridabad-ki-dr-shiveta-rajdan-ne-die-jaruri-sujhava-22811 TrendKia — Har trend, sabse pehle.