बिना सरकारी सहायता के चित्रकूट में डॉ. विभांशु गुप्ता की मुफ्त कैंसर जांच मुहिम, समय पर पहचान से बच रही है जान चित्रकूट के डॉक्टर विभांशु गुप्ता बीते करीब 17 सालों से बिना किसी सरकारी मदद के गांव-गांव मुफ्त कैंसर जांच शिविर लगाकर लोगों को समय रहते बीमारी पहचानने के लिए जागरूक कर रहे हैं। चित्रकूट के गांवों में इन दिनों एक डॉक्टर की मुफ्त कैंसर जांच मुहिम खूब चर्चा में है। पिछले करीब 17 सालों से स्वास्थ्य सेवा में जुटे डॉक्टर विभांशु गुप्ता बिना किसी सरकारी मदद या आर्थिक सहयोग के गांव-गांव पहुंचकर लोगों की मुफ्त कैंसर जांच कर रहे हैं। उनका मकसद साफ है, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करना और समय रहते इसकी पहचान कराना, ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां बचाई जा सकें। देर से पहचान बनती है सबसे बड़ा खतरा कैंसर को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि इसकी पहचान अक्सर देर से हो पाती है। चित्रकूट के ग्रामीण इलाकों में आज भी जानकारी की कमी और आर्थिक तंगी की वजह से ज्यादातर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक बीमारी आखिरी स्टेज में पहुंच चुकी होती है। इस स्टेज पर इलाज न सिर्फ मुश्किल हो जाता है बल्कि बेहद महंगा भी साबित होता है, और कई बार मरीज की जान बचाना नामुमकिन हो जाता है। गांव-गांव पहुंचकर लगा रहे जांच शिविर यही सोचकर डॉक्टर विभांशु गुप्ता ने गांव-गांव जाकर मुफ्त कैंसर जांच अभियान शुरू किया। इन शिविरों में आने वाले हर व्यक्ति की पहले प्रारंभिक जांच की जाती है। अगर किसी में कैंसर के संभावित लक्षण नजर आते हैं, तो उसे आगे की जांच और इलाज के लिए सही सलाह भी दी जाती है, ताकि बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ जाए। नशे से दूरी और संतुलित खानपान की सलाह डॉक्टर विभांशु गुप्ता के मुताबिक कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उनका कहना है कि तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसी आदतें कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। यही वजह है कि वे हर शिविर में लोगों को इन नशीली चीजों से दूर रहने, संतुलित भोजन करने और शरीर में दिखने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह जरूर देते हैं। अंतिम स्टेज के मरीजों को देखकर लिया संकल्प डॉक्टर विभांशु गुप्ता ने बताया कि अपने चिकित्सकीय जीवन में उन्होंने ऐसे कई मरीज देखे हैं, जो कैंसर की अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचे। इन घटनाओं ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने बताया, "उन घटनाओं ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया और तभी से मैंने संकल्प लिया कि मैं लोगों को समय रहते जागरूक करूंगा, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सके और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।" इसका आप पर असर • भारत में: कैंसर के शुरुआती लक्षणों को न पहचानना और नशे की आदतें आज भी इस बीमारी से होने वाली मौतों की बड़ी वजह हैं, ऐसे में समय पर जांच कराना हर परिवार के लिए जरूरी है। • चित्रकूट में: गांवों में मुफ्त कैंसर जांच शिविर लगने से यहां के लोगों को बिना पैसे खर्च किए बीमारी की शुरुआती पहचान का मौका मिल रहा है, जिससे इलाज पर बाद में आने वाला भारी खर्च बच सकता है। सवाल-जवाब 1. डॉक्टर विभांशु गुप्ता कौन हैं? वे चित्रकूट के एक डॉक्टर हैं जो करीब 17 सालों से स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं और अब गांव-गांव मुफ्त कैंसर जांच शिविर लगा रहे हैं। 2. यह कैंसर जांच शिविर कैसे काम करता है? शिविर में आने वाले हर व्यक्ति की प्रारंभिक जांच की जाती है और कैंसर के संभावित लक्षण दिखने पर आगे की जांच व इलाज की सलाह दी जाती है। 3. क्या इस मुहिम के लिए कोई सरकारी मदद ली जाती है? नहीं, डॉक्टर विभांशु गुप्ता बिना किसी सरकारी सहायता या आर्थिक सहयोग के अपने स्तर पर यह शिविर आयोजित करते हैं। 4. कैंसर के प्रमुख कारण क्या बताए गए हैं? तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और शराब जैसी आदतों को कैंसर के प्रमुख कारणों में गिनाया गया है। 5. डॉक्टर विभांशु गुप्ता ने यह मुहिम शुरू करने का फैसला क्यों किया? कैंसर की अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचे कई मरीजों को देखकर वे अंदर तक झकझोर गए थे, जिसके बाद उन्होंने लोगों को समय रहते जागरूक करने का संकल्प लिया। 6. शिविर में लोगों को क्या सलाह दी जाती है? लोगों को नशीली चीजों से दूर रहने, संतुलित भोजन करने और शरीर में दिखने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जाती है। प्रेरणा और सबक • लगातार सेवा भाव: डॉक्टर विभांशु गुप्ता पिछले 17 सालों से स्वास्थ्य सेवा में जुटे हैं, जो दिखाता है कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए लंबे समय तक जुटे रहना जरूरी है। • बिना संसाधनों के भी शुरुआत संभव: उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद या आर्थिक सहयोग के अपने दम पर गांव-गांव जांच शिविर शुरू किए, यानी संसाधनों की कमी बहाना नहीं बन सकती। • कठिन अनुभवों से मिली प्रेरणा: अंतिम स्टेज के मरीजों को देखकर झकझोरने वाले अनुभव ने उनके अंदर बदलाव लाने का संकल्प जगाया, यानी मुश्किल अनुभवों को भी सकारात्मक मकसद में बदला जा सकता है। • जागरूकता को बनाया हथियार: इलाज से पहले जागरूकता पर जोर देकर उन्होंने दिखाया कि सही जानकारी देना भी जान बचाने जितना ही जरूरी है। https://trendkia.com/health/bina-sarakari-sahayata-ke-chitrakoot-men-dr-vibhanshu-gupta-ki-muphta-kainsara-jancha-muhima-samaya-para-pahachana-se-bacha-rahi-h-4366 TrendKia — Har trend, sabse pehle.