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  "type": "article",
  "title": "ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में प्रतिबंधित हुआ जेल पॉलिश केमिकल TPO, भारत में मैनिक्योर कराने वाले रहें सावधान",
  "summary": "यूके और ईयू ने जेल नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले केमिकल TPO पर प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी खतरों के कारण प्रतिबंध लगा दिया है। भारत में जेल मैनिक्योर कराने वालों के लिए लेबल की जांच और सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।",
  "content": "खूबसूरत और हफ्तों तक चमकने वाले नाखूनों की चाहत में जेल मैनिक्योर आजकल बेहद लोकप्रिय हो चुका है। पहले यह सुविधा केवल मेट्रो शहरों के महंगे सैलून तक सीमित थी, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी जेल नेल पॉलिश और UV/LED लैंप मैनिक्योर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बीच एक खास केमिकल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं गहरा गई हैं। इस रसायन का नाम TPO यानी ट्राइमेथिलबेंज़ॉयल डिफेनाइलफॉस्फिन ऑक्साइड है। ब्रिटेन ने 15 अगस्त 2026 से TPO से बने नए कॉस्मेटिक सामानों की बिक्री और सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है।\n\n \n\nक्या है TPO और जेल पॉलिश में इसका काम?\n\nजेल नेल पॉलिश की मुख्य खासियत यह है कि यह सामान्य नेल पॉलिश की तरह खुली हवा में नहीं सूखती। इसे सुखाने के लिए एक विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, जिसमें TPO एक फोटोइनिशिएटर के रूप में काम करता है। जब जेल पॉलिश लगे नाखूनों को अल्ट्रावायलेट (UV) या LED लैंप की रोशनी में रखा जाता है, तब TPO उस प्रकाश को सोखकर केमिकल रिएक्शन शुरू करता है। इस प्रक्रिया से तरल पॉलिश महज कुछ ही सेकंड में तेजी से सख्त और मजबूत हो जाती है। इसी रसायन की बदौलत जेल मैनिक्योर लंबे समय तक चमकदार और बिना टूटे टिका रहता है।\n\n \n\nसेहत पर खतरे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध की समयसीमा\n\nबेहतरीन चमक और मजबूती देने के बावजूद TPO को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर चिंता जता रहे हैं। पशुओं पर किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सामने आया है कि इस केमिकल का प्रजनन स्वास्थ्य पर हानिकारक असर पड़ सकता है। यह रसायन प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने का जोखिम पैदा करता है, जिसके आधार पर सुरक्षा निकायों ने कड़े कदम उठाए हैं।\n\nयूरोपीय संघ ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सितंबर 2025 से ही TPO युक्त कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया था। इसके बाद ब्रिटेन ने भी 15 अगस्त 2026 से ऐसे नए प्रॉडक्ट्स की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने का ऐलान किया है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जेल मैनिक्योर लेते ही तुरंत बीमार होने का तय खतरा नहीं होता। सेहत पर जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉडक्ट में केमिकल की कितनी सांद्रता है, त्वचा या नाखूनों से संपर्क का समय कितना है और इसका इस्तेमाल कितनी बार किया जाता है। फिर भी, संभावित खतरों से बचने के लिए सतर्कता बरतना ही सबसे बेहतर उपाय है।\n\n \n\nभारत का बढ़ता बाजार और उपभोक्ताओं के लिए सावधानियां\n\nअंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इन बदलावों का असर भारत पर पड़ना तय है, क्योंकि यहां ब्यूटी और नेल केयर का कारोबार रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ रहा है। IMARC की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत का नेल पॉलिश बाजार लगभग 605 मिलियन डॉलर का था, जिसके वर्ष 2034 तक बढ़कर करीब 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। बाजार में नए-नए प्रॉडक्ट्स की भरमार के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को अपने इस्तेमाल में आने वाले सामान की जांच करना सीखना होगा।\n\nअगर आप सैलून में जेल मैनिक्योर करवा रहे हैं, तो ब्यूटी टेक्निशियन से इस्तेमाल होने वाली पॉलिश के बारे में जानकारी जरूर मांगें। डिब्बे पर लिखी सामग्री की सूची देखें और पुष्टि करें कि पॉलिश TPO-फ्री है या नहीं। यदि किसी प्रॉडक्ट की पैकेजिंग पर इंग्रेडिएंट्स साफ तौर पर नहीं लिखे हैं, तो बिना पूरी जानकारी के उसका इस्तेमाल कराने से बचना ही समझदारी है।\n\n \n\nसुरक्षित मैनिक्योर के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें\n\nजेल मैनिक्योर के दौरान केवल पॉलिश के रसायन ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया पर ध्यान देना आवश्यक है। बार-बार UV और LED लैंप की रोशनी के संपर्क में आने से त्वचा और नाखूनों पर प्रभाव पड़ता है। डॉक्टरों की सलाह है कि लगातार मैनिक्योर कराने के बजाय बीच-बीच में नाखूनों को कुछ दिनों का आराम दें, ताकि वे अपनी प्राकृतिक नमी और मजबूती बनाए रख सकें।\n\nइसके अलावा सैलून में नाखूनों के आसपास की त्वचा यानी क्यूटिकल्स को बहुत ज्यादा काटने से बचना चाहिए, क्योंकि क्यूटिकल्स इंफेक्शन से बचाने वाली प्राकृतिक परत होते हैं। अगर नाखूनों में दर्द, लाली या किसी प्रकार का संक्रमण दिखाई दे, तो तुरंत मैनिक्योर टाल दें। सौंदर्य की दौड़ में सेहत की सुरक्षा को नजरअंदाज न करना ही सबसे बुद्धिमानी भरा कदम है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: सैलून ग्राहक TPO-फ्री जेल पॉलिश लेबल की जांच करें और असत्यापित प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करने से बचें।\n\n• उपभोक्ताओं के लिए: लगातार जेल मैनिक्योर के बजाय नाखूनों को ब्रेक दें और UV/LED लैंप एक्सपोजर को सीमित करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जेल नेल पॉलिश में TPO केमिकल क्यों मिलाया जाता है?\nTPO एक फोटोइनिशिएटर है जो UV या LED लैंप की रोशनी में जेल पॉलिश को बहुत तेजी से सुखाने और सख्त बनाने में मदद करता है।\n\n2. TPO रसायन से सेहत को क्या मुख्य खतरा है?\nपशु अध्ययनों में पाया गया है कि TPO के संपर्क में आने से प्रजनन स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।\n\n3. यूके और ईयू में TPO बैन कब से लागू हो रहा है?\nयूरोपीय संघ में यह प्रतिबंध सितंबर 2025 से लागू है, जबकि ब्रिटेन में TPO वाले नए कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर 15 अगस्त 2026 से रोक लगी है।\n\n4. सैलून में जेल मैनिक्योर कराते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए?\nसैलून में इस्तेमाल होने वाले प्रॉडक्ट का लेबल चेक करें, स्टाफ से TPO-फ्री पॉलिश के बारे में पूछें और बिना इंग्रेडिएंट लेबल वाले सामान का उपयोग न करें।\n\n5. 2025 में भारत के नेल पॉलिश बाजार की स्थिति क्या है?\nIMARC रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत का नेल पॉलिश बाजार लगभग 605 मिलियन डॉलर का था, जो 2034 तक 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-08-26",
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    "जेल नेल पॉलिश",
    "टीपीओ बैन",
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