# बुढ़ापे में सेहतमंद रहने के लिए जेरियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. प्रसून चटर्जी के 5 महत्वपूर्ण लाइफस्टाइल नियम

> साठ वर्ष की आयु के बाद शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव आते हैं। जेरियाट्रिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रसून चटर्जी ने बुजुर्गों को निरोगी और लंबी उम्र पाने के लिए खान-पान, व्यायाम और दिनचर्या से जुड़े 5 खास उपाय बताए हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/burhape-men-bimariyon-se-bachane-ke-lie-jeriyatrika-visheshajna-dr-prasun-chatterjee-ke-5-mahatvapurna-laiphastaila-niyama-19962 · **Language:** Hindi
**Tags:** हेल्थ टिप्स, सीनियर सिटीजन, डॉ प्रसून चटर्जी, बुढ़ापा और सेहत, लॉन्गिविटी साइंस, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज

जीवन में 60 वर्ष की उम्र का पड़ाव आते ही शरीर की स्वाभाविक कार्यक्षमता और शारीरिक सक्रियता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यदि इस उम्र के आसपास दैनिक जीवनशैली और खान-पान पर सही ध्यान न दिया जाए, तो कई तरह की गंभीर बीमारियां घेरने लगती हैं। बुजुर्गों में जोड़ों का दर्द, हड्डियों का कमजोर होना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मानसिक रूप से भूलने की समस्या यानी डिमेंशिया काफी आम मानी जाती हैं। आमतौर पर लोग इस उम्र को ढलती अवस्था मानकर दवाइयों के सहारे जिंदगी बिताने लगते हैं। हालांकि, यदि शुरुआत से ही सही अनुशासन और अनुशासित जीवनचर्या अपना ली जाए, तो बुढ़ापे में भी स्वस्थ और ऊर्जावान रहा जा सकता है। अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में जेरियाट्रिक मेडिसिन एंड लॉन्गिविटी साइंस के कंट्री हेड डॉ. प्रसून चटर्जी का मानना है कि सही देखभाल और रूटीन की मदद से 60 के बाद भी जीवन को पूरी तरह रोगमुक्त रखा जा सकता है।

## 60 की उम्र के बाद बढ़ने वाली 5 प्रमुख बीमारियां
उम्र के 60वें साल को आमतौर पर सेवानिवृत्ति का समय मान लिया जाता है, लेकिन अगर शरीर का ध्यान समय रहते रखा जाए, तो उम्र कोई बाधा नहीं बनती। जिस प्रकार किसी पुरानी गाड़ी की नियमित सर्विसिंग करने से वह सालों-साल सुचारू रूप से चलती रहती है, ठीक उसी तरह मानव शरीर के अंगों की देखभाल करने से बुढ़ापे में भी शरीर फिट रहता है। 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद सबसे अधिक मामले हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के देखने को मिलते हैं। इसके अलावा हड्डियों की सघनता घटने से जोड़ों में तेज दर्द और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। हाल के वर्षों में भारत में बुजुर्गों के बीच भूलने की बीमारी और मानसिक अवसाद के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही शारीरिक सुस्ती और मांसपेशियों की कमजोरी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करती है।

## सूर्य चक्र और ऋषि-मुनियों की प्राचीन दिनचर्या
आज से लगभग 70 से 80 वर्ष पहले हमारे देश में औसत जीवन प्रत्याशा 40 से 50 वर्ष के आसपास हुआ करती थी, लेकिन उस दौर में भी हमारे ऋषि-मुनि 100 वर्ष से अधिक समय तक पूरी तरह स्वस्थ जीवन व्यतीत करते थे। इसका मुख्य कारण उनका अत्यंत सरल, प्राकृतिक और अनुशासित जीवन था। वे शरीर की आंतरिक बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार अपनी गतिविधियां संचालित करते थे। उनका सबसे बड़ा नियम सूर्योदय और सूर्यास्त के समय से जुड़ा था। वे हमेशा सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही भोजन ग्रहण करते थे और सूर्यास्त के बाद कुछ भी खाने से परहेज करते थे। यदि वर्तमान समय में भी इस जैविक चक्र को दैनिक जीवन में अपना लिया जाए, तो 60 वर्ष की उम्र के बाद भी कई असाध्य रोगों से बचा जा सकता है।

## कैलोरी नियंत्रण और 20 प्रतिशत खाली पेट का सिद्धांत
हम प्रतिदिन क्या खाते हैं और कितनी मात्रा में खाते हैं, यही बात तय करती है कि 80 वर्ष की आयु में हमारी सेहत कैसी रहेगी। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सिद्ध हो चुका है कि नियंत्रित आहार लेने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर बना रहता है। जापान में बच्चों पर किए गए एक विशेष अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत कम कैलोरी का सेवन करते थे, वे जीवन भर अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान रहे। आहार में संयम यानी डाइट रिस्ट्रिक्शन लंबी उम्र का एक प्रमुख आधार है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी सीमित भोजन को औषधि समान माना गया है। इसलिए बुजुर्गों को सलाह दी जाती है कि वे जब भी भोजन करें, अपनी भूख का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा हमेशा खाली रखें ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

## हाइब्रिड डाइट, शाकाहार और आवश्यक पोषक तत्व
पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित यानी हाइब्रिड डाइट अपनाना बेहद लाभकारी माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि थाली में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में शामिल होने चाहिए। इसका मतलब बाहर का जंक फूड या फास्ट फूड खाना बिल्कुल नहीं है। घर का बना सादा और ताजा खाना सबसे उत्तम माना गया है। अपनी खुराक में साबुत अनाज, चावल, दालें, ताजी हरी सब्जियां, फल और विभिन्न प्रकार के बीजों को पर्याप्त स्थान दें। एक अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि जो लोग अपनी कुल दैनिक खुराक का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट के रूप में लेते हैं, उनकी जीवन प्रत्याशा काफी अधिक होती है। इसके अलावा पूर्ण शाकाहारी भोजन दिल की बीमारियों और कैंसर के खतरे को 20 से 25 प्रतिशत तक घटा देता है। संतरा, कीवी, अनानास, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और नींबू जैसे साइट्रस फ्रूट्स का नियमित सेवन भी दीर्घायु बनाने में मदद करता है।

## चीनी, नमक और हानिकारक आदतों का त्याग
लंबी और निरोगी उम्र पाने के लिए यह जानना भी बेहद आवश्यक है कि किन चीजों के सेवन से बचना चाहिए। जंक फूड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शरीर को तुरंत कैलोरी तो दे देते हैं, लेकिन वे वास्तविक ऊर्जा प्रदान नहीं करते और शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। भोजन में नमक और चीनी का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर के आंतरिक अंगों के लिए बहुत हानिकारक होता है और यह किसी इंजन में खराब ईंधन की तरह काम करता है, जो प्रदूषण फैलाने के साथ-साथ उम्र को भी कम करता है। इसके अलावा रेड मीट के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। धूम्रपान और शराब जैसी बुरी आदतें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त कर देती हैं, इसलिए लंबी उम्र की चाह रखने वालों को इनसे पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।

## मांसपेशियों की मजबूती के लिए नियमित व्यायाम
खान-पान में सुधार के साथ-साथ शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों की सेहत के लिए सबसे जरूरी खुराक है। 1 मिनट का हल्का या मध्यम व्यायाम जीवन प्रत्याशा को लगभग 7 मिनट तक बढ़ा सकता है। यदि बुजुर्ग प्रतिदिन कम से कम 7 हजार कदम चलने की आदत डाल लें, तो इससे उनके दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता दुरुस्त रहती है। इसके अलावा प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट का व्यायाम या योग करना अनिवार्य माना गया है। इससे शरीर में लचीलापन बना रहता है और ढलती उम्र में गिरने या चोट लगने की आशंका कम हो जाती है।

## सामाजिक जुड़ाव और मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
आने वाले समय में सामाजिक अकेलापन या अपनों से दूरी बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है। अध्ययनों में पाया गया है कि जो बुजुर्ग परिवार या समाज से कटे रहते हैं, उनमें डिप्रेशन और डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एकाकीपन की वजह से लोगों में नकारात्मक विचार और आत्महत्या की प्रवृत्ति भी पनपने लगती है। इस समस्या से बचने के लिए अपने आसपास एक सकारात्मक और जीवंत सामाजिक माहौल तैयार करना चाहिए। बुजुर्गों को रोज नए मित्र बनाने, उनसे बातें करने, परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने, पार्क में टहलने और पिकनिक या छोटी यात्राओं पर जाने की सलाह दी जाती है। इससे मन प्रसन्न रहता है और दिमाग सक्रिय बना रहता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग इन सरल लाइफस्टाइल बदलावों को अपनाकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से खुद का बचाव कर सकते हैं और दवाइयों पर निर्भरता कम कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 60 साल की उम्र के बाद कौन सी 5 प्रमुख बीमारियां सबसे ज्यादा परेशान करती हैं?
60 की उम्र के बाद हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, जोड़ों का दर्द व हड्डियों की कमजोरी, भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) और शारीरिक सुस्ती की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है।

### 2. डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार भोजन करने का सबसे सही समय क्या है?
ऋषि-मुनियों की दिनचर्या के अनुसार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही भोजन कर लेना चाहिए और सूर्यास्त के बाद खाने से बचना चाहिए।

### 3. बुजुर्गों को अपनी डाइट में कितना खाली पेट रखना चाहिए?
भोजन करते समय हर बार अपनी भूख का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा खाली रखना चाहिए ताकि पाचन तंत्र स्वस्थ रहे।

### 4. लंबी उम्र के लिए रोजाना कितने कदम चलना फायदेमंद माना गया है?
बुजुर्गों को रोजाना कम से कम 7 हजार कदम चलने और सप्ताह में 150 मिनट एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।

### 5. शाकाहारी भोजन से बीमारियों का खतरा कितना कम हो जाता है?
शाकाहारी भोजन अपनाने से कैंसर और दिल की बीमारियों का जोखिम लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

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