# कसावा की जड़ों से बिना मावा और घी के घर पर बनाएं पारंपरिक स्टीम्ड मिठाई

> साबूदाना तैयार करने वाली टैपियोका या कसावा की ताजी जड़ों, कच्चे नारियल और गुड़ के मेल से बिना घी या मावे के 15 मिनट में भाप में पकने वाला पौष्टिक मीठा तैयार किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/cassava-ki-jaron-se-bina-mava-aura-ghi-ke-ghara-para-banaen-parnparika-stimda-mithai-41124 · **Language:** Hindi
**Tags:** कसावा रेसिपी, टैपियोका मिठाई, साबूदाना की जड़, हेल्दी स्वीट, बिना घी की मिठाई, गुड़ की मिठाई

साबूदाना बनाने के लिए काम आने वाला कसावा का कंद अपने बेहतरीन स्टार्च और पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। आमतौर पर लोग साबूदाने से खिचड़ी या खीर बनाना पसंद करते हैं, लेकिन इसी पौधे की ताजी जड़ों से बिना किसी भारी वसा के एक हल्का और बेहद स्वादिष्ट पारंपरिक मिष्ठान भी तैयार किया जा सकता है। इसे टैपियोका नाम से भी पहचाना जाता है। इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न तो किसी प्रकार के मावे की आवश्यकता पड़ती है और न ही घी या तेल की। फाइबर से भरपूर होने की वजह से यह सुपाच्य रहता है और पेट को काफी देर तक भरा हुआ महसूस कराता है। प्राकृतिक मिठास और खुशबू के लिए इसमें केवल गुड़ का पाउडर, इलायची और ताजा कसा हुआ नारियल मिलाया जाता है।

## कसावा कंद की तैयारी और छीलने का तरीका
इस व्यंजन को पकाने की शुरुआत कंद की सफाई और प्राथमिक तैयारी से होती है। मुख्य घटक के तौर पर टैपियोका अथवा कसावा की 500 ग्राम ताजी जड़ें ली जाती हैं। ये जड़ें आकार में आम शकरकंद की तुलना में काफी मोटी होती हैं और इनके छिलके को हटाने पर अंदर से पूरी तरह चमकदार सफेद गूदा दिखाई देता है। सबसे पहले इन जड़ों के दोनों किनारों को काटकर अलग कर लें और फिर चाकू की मदद से इनका कड़ा बाहरी छिलका पूरी तरह उतार लें।

## घिसने और अतिरिक्त नमी अलग करने की प्रक्रिया
छिलका हटाने के बाद इन जड़ों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि बची हुई मिट्टी या गंदगी पूरी तरह साफ हो जाए। इसके बाद एक बारीक कद्दूकस की मदद से पूरी जड़ को अच्छी तरह कस लें। घिसने के बाद इसमें प्राकृतिक तरल काफी मात्रा में मौजूद रहता है। इसे निकालने के लिए एक साफ सूती मलमल का कपड़ा लें और उसमें कसा हुआ सारा गूदा रख दें। कपड़े को चारों कोनों से समेटकर हाथों से दबाते हुए पूरा अतिरिक्त पानी अच्छी तरह निचोड़ लें, जिससे कद्दूकस किया हुआ मिश्रण सूखा और हल्का हो जाए।

## नारियल, गुड़ और इलायची का सुगंधित मिश्रण बनाना
पानी अलग हो जाने के बाद सूखे गूदे को एक बड़े बर्तन में निकाल लें। अब इस बेस में स्वाद और बनावट जोड़ने के लिए आधा कप ताजा कद्दूकस किया हुआ कच्चा नारियल मिलाया जाता है। साथ ही मिठास के लिए आधा कप गुड़ वाली शक्कर शामिल करें। बेहतरीन पारंपरिक महक और स्वाद के लिए इसमें आधा छोटा चम्मच हरी इलायची का ताजा पिसा पाउडर डालें। अब इन सभी सामग्रियों को अपने हाथों की सहायता से तब तक अच्छी तरह मिलाएं जब तक कि गुड़, नारियल और कसावा एकसार होकर एक समान मिश्रण न बन जाएं।

## केले के पत्तों में लपेटकर भाप में पकाने की विधि
इस मिठाई को अंतिम रूप देने के लिए केले के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे पकाने के दौरान एक विशिष्ट प्राकृतिक सुगंध भी देते हैं। तैयार किए गए मीठे मिश्रण को केले के साफ पत्तों पर रखें और उन्हें घुमाते हुए एक सुंदर बेलनाकार गोल रोल का आकार दें। पत्तों के किनारों को अच्छी तरह पैक कर लें ताकि भाप में पकाते समय मिश्रण बाहर न बिखरे। इसके बाद एक स्टीमर तैयार करें और इन तैयार रोल्स को पत्तों सहित स्टीमर की जाली पर रख दें। गैस के चूल्हे को तेज आंच पर रखें और इसे ठीक 15 मिनट तक भाप में पकने दें। तेज आंच पर भाप लगने से कसावा का स्टार्च पककर मुलायम हो जाता है और रोल पूरी तरह जम जाता है। पकने के बाद इसे ठंडा करके परोसें।

## इसका आप पर असर
पारंपरिक मिठाई के इस सेहतमंद विकल्प को अपनाकर आप बिना अतिरिक्त वसा के हल्का मीठा तैयार कर सकते हैं।

- **आहार और पोषण:** बिना घी और मावे के बनने के कारण यह कम कैलोरी और शून्य अतिरिक्त वसा वाला विकल्प है। इसमें मौजूद प्रचुर फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है।
- **किचन का बजट:** इस मिठाई में किसी भी महंगे मेवे, रिफाइंड तेल या बाजारू मावे का उपयोग नहीं होता। सिर्फ 500 ग्राम कसावा, थोड़ा कच्चा नारियल और गुड़ जैसी सुलभ सामग्री से इसे कम खर्च में तैयार किया जा सकता है।
- **तैयारी का समय:** स्टीमर में हाई फ्लेम पर इसे पकने में केवल 15 मिनट का समय लगता है। व्यस्त दिनचर्या में भी इसे तुरंत ताजी सामग्री के साथ बनाया जा सकता है।
- **पर्यावरण अनुकूल कुकिंग:** केले के पत्तों में लपेटकर भाप में पकाने से किसी एल्युमिनियम फॉयल या प्लास्टिक रैप की जरूरत नहीं पड़ती। पत्तों से मिलने वाली प्राकृतिक महक भोजन के स्वाद को भी बेहतर बनाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक मिठाइयों में अत्यधिक घी, रिफाइंड चीनी और मावे के बढ़ते उपयोग के बीच प्राकृतिक कंदमूल आधारित व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कंद और ताजी पत्तियों का उपयोग करके भाप में पकाने की यह प्राचीन तकनीक सुपाच्य और पोषक तत्वों से भरपूर व्यंजन तैयार करने के उद्देश्य से अपनाई जाती है।

- **कसावा स्टार्च की प्राकृतिक बनावट:** कसावा कंद में प्राकृतिक बाइंडिंग स्टार्च होता है जो भाप में पकते ही गाढ़ा और मुलायम हो जाता है। इसी गुण के कारण इसे बांधने के लिए किसी मैदा, सूजी या वसायुक्त पदार्थ की जरूरत नहीं पड़ती।
- **फाइबर और नमी संतुलन:** कंद को घिसकर पानी निचोड़ने से अतिरिक्त कड़वा तरल निकल जाता है और फाइबर का ठोस हिस्सा बचता है। यह प्रक्रिया गुड़ और नारियल के रस को अच्छी तरह सोखने में मदद करती है।
- **केले के पत्तों का पारंपरिक महत्व:** स्टीमिंग के दौरान भाप के सीधे संपर्क से बचाने और नमी को अंदर सुरक्षित रखने के लिए केले के पत्ते सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक आवरण माने जाते हैं। इससे मिठाई बिखरती नहीं और उसका आकार सुंदर बना रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. कसावा की जड़ से मिठाई बनाने के लिए कितनी मात्रा की जरूरत होती है?
इस रेसिपी के लिए 500 ग्राम ताजा कसावा या टैपियोका कंद की आवश्यकता होती है।

### 2. कद्दूकस करने के बाद कसावा का पानी निचोड़ना क्यों जरूरी है?
सूती मलमल के कपड़े से अतिरिक्त पानी निचोड़ देने से मिश्रण सूखा बनता है और सामग्री अच्छी तरह आपस में बंध पाती है।

### 3. इस मिठाई में मिठास और खुशबू के लिए क्या मिलाया जाता है?
इसमें आधा कप गुड़ वाली शक्कर, आधा कप ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल और आधा चम्मच हरी इलायची का पाउडर मिलाया जाता है।

### 4. मिठाई को स्टीमर में कितनी देर और किस आंच पर पकाना चाहिए?
केले के पत्ते में लपेटे गए रोल को स्टीमर में तेज आंच पर ठीक 15 मिनट तक भाप में पकाया जाता है।

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