चंपारण के जंगलों में उगने वाला महुआ बन रहा महिलाओं की सेहत का सहारा बिहार के चंपारण जिले और वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से सटे इलाकों में पाया जाने वाला महुआ आयरन, कैल्शियम और विटामिन सी से भरपूर है और महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई परेशानियों में असरदार माना जाता है। बिहार के चंपारण जिले में एक ऐसा जंगली फल पाया जाता है जो आयरन, कैल्शियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है और महिलाओं की सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। इसका नाम है महुआ। यह चंपारण के लगभग हर हिस्से में आसानी से मिल जाता है, लेकिन वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से सटे जंगली इलाकों में इसके पेड़ सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा गांवों में रहने वाली महिलाएं बरसों से महुआ के फल, फूल और छाल का इस्तेमाल करती आ रही हैं। जंगल से सटी बस्तियों में बसे थारू और उरांव जनजाति के लोग बड़ी बारीकी और खूबसूरती से इसे इकट्ठा करते हैं। इकट्ठा करने के बाद इसे घर लाकर पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर धूप में सुखाकर अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में महुआ को सुपरफूड का दर्जा बेतिया में करीब चार दशकों से आयुर्वेदाचार्य के तौर पर काम कर रहे भुवनेश पांडे कहते हैं कि महुआ असल में एक सुपर फूड है, लेकिन शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। गांवों में आज भी लोग इसे इकट्ठा कर खीर, हलवा और पूढ़ी बनाकर खाते हैं। सिर्फ फल और फूल ही नहीं, महुआ के पेड़ की छाल का इस्तेमाल दांतों और मुंह से जुड़ी दूसरी दिक्कतों के इलाज में भी किया जाता है। महिलाओं की कई परेशानियों में कारगर भुवनेश पांडे के मुताबिक, पीरियड्स, ल्यूकोरिया, स्तनपान, एनीमिया, त्वचा और बालों से जुड़ी परेशानियों से जूझ रही महिलाओं के लिए महुआ एक बेहतरीन औषधि साबित होता है। इसके फूल में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द, मूड स्विंग्स और अनियमितता को संतुलित करने में मदद करते हैं। हड्डियां मजबूत करे, दांत भी बचाए महुआ का फल कैल्शियम और आयरन का शानदार स्रोत माना जाता है। यह शरीर में खून की कमी दूर करने के साथ-साथ हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। भुवनेश पांडे बताते हैं कि अगर किसी के दांत हिलने लगें तो महुआ के पेड़ की छाल का अर्क निकालकर उससे कुल्ला करना चाहिए। ऐसा करने से हिलते हुए दांत भी स्थायी रूप से मजबूत और स्थिर हो जाते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: पीरियड्स, एनीमिया, त्वचा या बालों से जुड़ी दिक्कतों से जूझ रही महिलाएं महुआ जैसे पारंपरिक देसी नुस्खों को अपने खान-पान में शामिल करने पर विचार कर सकती हैं। • बिहार के चंपारण में: वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से सटे इलाकों में रहने वाले परिवार और थारू-उरांव जनजाति के लोग महुआ इकट्ठा कर खीर, हलवा जैसी चीजें बनाकर सेहत का सीधा फायदा उठा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. महुआ कहां पाया जाता है? बिहार के चंपारण जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में यह पाया जाता है, लेकिन वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से सटे जंगली इलाकों में इसकी सबसे ज्यादा भरमार है। 2. महुआ को कौन-सी जनजातियां इकट्ठा करती हैं? जंगल से सटी बस्तियों में रहने वाले थारू और उरांव जनजाति के लोग इसे बड़ी बारीकी से इकट्ठा करते हैं। 3. महुआ महिलाओं की किन समस्याओं में फायदेमंद है? पीरियड्स, ल्यूकोरिया, स्तनपान, एनीमिया, त्वचा और बालों से जुड़ी परेशानियों में यह फायदेमंद माना जाता है। 4. महुआ को घरों में कैसे इस्तेमाल किया जाता है? गांवों में इसे इकट्ठा कर खीर, हलवा और पूढ़ी बनाकर खाया जाता है। 5. दांत हिलने पर महुआ का इस्तेमाल कैसे किया जाता है? महुआ के पेड़ की छाल का अर्क निकालकर उससे कुल्ला करने से हिलते हुए दांत स्थायी रूप से मजबूत हो जाते हैं। 6. यह जानकारी किसने दी है? बेतिया के आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पांडे ने यह जानकारी दी है, जो करीब चार दशकों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। https://trendkia.com/health/champaran-ke-jngalon-men-ugane-vala-mahua-bana-raha-mahilaon-ki-sehata-ka-sahara-7700 TrendKia — Har trend, sabse pehle.