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  "title": "छात्रों की चिंता की जड़ पकड़ेगा कानपुर विश्वविद्यालय का नया स्केल, टेस्ट महज 20 मिनट का",
  "summary": "कानपुर के सीएसजेएमयू ने 17 से 25 साल के युवाओं के लिए एक नया जनरल एंग्जायटी स्केल तैयार किया है, जो महज 18 से 20 मिनट में बता देगा कि छात्र की चिंता पढ़ाई, भावनाओं, सामाजिक माहौल या भविष्य को लेकर है।",
  "content": "पढ़ाई का बढ़ता दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर को लेकर चिंता और भविष्य की अनिश्चितता, इन सबने आज देश के लाखों युवाओं को तनाव और एंग्जायटी की चपेट में ला दिया है। बहुत बार छात्र अपनी उलझन किसी को बता ही नहीं पाते और यह मानसिक दबाव अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। इसी समस्या से निपटने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना तैयार किया है, जो चंद मिनटों में यह बता देगा कि कोई छात्र किस तरह की चिंता से जूझ रहा है।\n\nटीम ने मिलकर तैयार किया एंग्जायटी स्केल\n\nकुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर यह जनरल एंग्जायटी स्केल तैयार किया है। यह खासतौर पर 17 से 25 साल के युवाओं के लिए बनाया गया है, यानी वह उम्र जिसमें ज्यादातर छात्र स्कूल से कॉलेज और फिर करियर की दहलीज पार करते हैं। इस स्केल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सिर्फ यह नहीं बताती कि छात्र तनाव में है या नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि उसकी चिंता पढ़ाई को लेकर है, भावनाओं से जुड़ी है, सामाजिक माहौल की वजह से है, ज्यादा सोचने की आदत से उपजी है या फिर भविष्य को लेकर है। इस तरह शिक्षक और काउंसलर सीधे जड़ तक पहुंच सकते हैं, बजाय इसके कि सिर्फ यह पता चले कि छात्र परेशान है।\n\n65 सवालों से घटकर 35 पर टिका फॉर्मेट, 800 छात्रों पर परीक्षण\n\nइस स्केल को अंतिम रूप देने से पहले शोधकर्ताओं ने शुरुआत में 65 सवाल तैयार किए थे। विशेषज्ञों की राय के बाद इनकी संख्या घटाकर 35 कर दी गई, ताकि यह छात्रों के लिए ज्यादा आसान और व्यावहारिक बन सके। इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया। यह पैमाना फाइव-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है, जिसमें छात्रों को हर सवाल के जवाब में पूर्णतः सहमत से लेकर पूर्णतः असहमत तक के विकल्प चुनने होते हैं। खास बात यह है कि इसे पूरा करने में मुश्किल से 18 से 20 मिनट लगते हैं और इसे किसी एक छात्र पर या पूरे समूह पर एक साथ भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्कूल और कॉलेज बड़े पैमाने पर भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।\n\n0.94 की विश्वसनीयता, जीएडी-7 से भी हुई जांच\n\nडॉ. विमल सिंह के मुताबिक इस स्केल की विश्वसनीयता 0.94 है, जो इसे बेहद भरोसेमंद पैमाना बनाती है। इतना ही नहीं, इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से इस्तेमाल हो रहे जीएडी-7 स्केल के साथ भी परखा गया, जिसमें भी अच्छे नतीजे सामने आए। इसी विश्वसनीयता के आधार पर देश की जानी-मानी संस्था प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड ने इस स्केल को प्रकाशित भी किया है, जो इसे शैक्षणिक और मनोवैज्ञानिक हलकों में और मजबूती देता है।\n\nअब समय रहते मिल सकेगी सही काउंसिलिंग\n\nइस स्केल के आने के बाद शिक्षक, काउंसलर और मनोवैज्ञानिक चंद मिनटों में यह समझ सकेंगे कि किसी खास छात्र को किस तरह की परेशानी सबसे ज्यादा घेरे हुए है। इसके आधार पर उसे जरूरत के हिसाब से सही समय पर काउंसिलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद दी जा सकेगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे कई युवाओं को गंभीर मानसिक समस्याओं की चपेट में आने से पहले ही राहत मिल सकेगी, क्योंकि दिक्कत की पहचान जितनी जल्दी होगी, इलाज और मदद उतनी ही असरदार होगी।\n\nकुलपति बोले, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी उपलब्धि\n\nकुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय हमेशा से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और आने वाले समय में इसका फायदा देशभर के शिक्षण संस्थानों और लाखों छात्र-छात्राओं को मिलेगा।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह स्केल आने वाले समय में देशभर के स्कूल-कॉलेजों में इस्तेमाल हो सकता है, जिससे लाखों छात्रों की मानसिक परेशानी की सही वजह जल्दी पकड़ में आ सकेगी और उन्हें समय पर काउंसिलिंग मिल सकेगी।\n• कानपुर और उत्तर प्रदेश में: यहां के शिक्षण संस्थान और काउंसलर सबसे पहले इस स्केल का फायदा उठा सकते हैं, क्योंकि इसका परीक्षण उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर ही किया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सीएसजेएमयू का जनरल एंग्जायटी स्केल क्या है?\nयह एक वैज्ञानिक पैमाना है जो 17 से 25 साल के युवाओं में तनाव और एंग्जायटी की पहचान करता है और बताता है कि चिंता किस वजह से है।\n\n2. यह स्केल किसने और किसके मार्गदर्शन में तैयार किया?\nकुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में डॉ. विमल सिंह, शुभी रस्तोगी, देश दीपक और डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर इसे तैयार किया।\n\n3. इस टेस्ट का परिणाम आने में कितना समय लगता है?\nइसे पूरा करने में केवल 18 से 20 मिनट लगते हैं।\n\n4. यह स्केल कितना भरोसेमंद है?\nइसकी विश्वसनीयता 0.94 है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के जीएडी-7 स्केल से भी जांचा जा चुका है।\n\n5. इसका परीक्षण कितने छात्रों पर किया गया?\nइसे उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर परखा गया।\n\n6. इस स्केल में सवालों की संख्या कितनी है?\nशुरुआत में 65 सवाल बनाए गए थे, जिन्हें विशेषज्ञों की सलाह के बाद घटाकर 35 कर दिया गया।\n\n7. इसे किस संस्था ने प्रकाशित किया है?\nइसे प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड ने प्रकाशित किया है।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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