चिकनपॉक्स के जिद्दी निशानों से कैसे पाएं छुटकारा? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट की खास सलाह चेचक के बाद चेहरे पर रह जाने वाले दाग और गड्ढों को हटाने के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट ने असरदार तरीके बताए हैं। सही सनस्क्रीन, क्रीम और आधुनिक उपचारों की मदद से इन निशानों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। चेचक यानी चिकनपॉक्स के संक्रमण के बाद अक्सर त्वचा पर जिद्दी निशान छूट जाते हैं, जो विशेष रूप से चेहरे की खूबसूरती को प्रभावित करते हैं। इन निशानों का उपचार पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा पर उनका स्वरूप कैसा है। कुछ लोगों के चेहरे पर सूजन के बाद होने वाले पिगमेंटेशन के कारण केवल काले धब्बे उभर आते हैं, जबकि अन्य मामलों में त्वचा के ऊतकों को पहुंचे नुकसान के कारण गहरे गड्ढे या धंसे हुए निशान बन जाते हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए डॉ. रश्मि शर्मा, सलाहकार त्वचा विशेषज्ञ, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुड़गांव ने महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक तरीके साझा किए हैं। काले धब्बों और पिगमेंटेशन से निपटने के उपाय यदि चिकनपॉक्स के बाद आपकी त्वचा पर केवल काले निशान या पिगमेंटेशन रह गया है, तो वे आमतौर पर कुछ महीनों के भीतर स्वतः ही हल्के पड़ने लगते हैं। इस प्रक्रिया को गति देने और निशानों को और गहरा होने से बचाने के लिए धूप से बचाव करना सबसे जरूरी कदम है। इसके लिए कम से कम SPF 30 या उससे अधिक क्षमता वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन नियमित रूप से लगाना चाहिए, क्योंकि धूप की हानिकारक किरणें निशानों को और पक्का कर सकती हैं। इसके अलावा त्वचा विशेषज्ञ रोगी की त्वचा के प्रकार और उसकी मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद एजेलाइक एसिड, रेटिनॉइड या अन्य पिगमेंटेशनरोधी घटकों वाली विशेष क्रीम या सामयिक दवाएं निर्धारित कर सकते हैं। कुछ विशेष और पुराने मामलों में जिद्दी पिगमेंटेशन को हटाने के लिए लेजर ट्रीटमेंट का विकल्प भी आजमाया जाता है। गहरे गड्ढਿਆਂ और एट्रोफिक स्कार्स का आधुनिक उपचार जब चिकनपॉक्स के कारण त्वचा पर एट्रोफिक स्कार्स यानी गड्ढे या धंसे हुए निशान उभर आते हैं और त्वचा की बनावट पूरी तरह असमान हो जाती है, तो केवल क्रीम या लोशन लगाने से कोई खास फायदा नहीं होता। ऐसी गंभीर स्थितियों में निशानों की गहराई और उनकी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए माइक्रोनीडलिंग रेडियोफ्रीक्वेंसी, फ्रैक्शनल CO2 लेजर रिसर्फेसिंग और अन्य उन्नत स्कार-रिवीजन प्रक्रियाओं की मदद ली जाती है। ये आधुनिक तकनीकें त्वचा के भीतर कोलेजन के प्राकृतिक उत्पादन को तेजी से बढ़ावा देती हैं, जिससे त्वचा की ऊपरी सतह चिकनी और सुडौल होने लगती है। सही और पेशेवर उपचार मिलने पर इन एट्रोफिक स्कार्स के निशान काफी हद तक छिप जाते हैं। उपचार के परिणाम और जरूरी सावधानियां विशेषज्ञों के अनुसार, सही मेडिकल प्रक्रिया अपनाने से चुनिंदा मामलों में लगभग 60 से 80 प्रतिशत तक सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, ये परिणाम पूरी तरह से निशानों की गंभीरता, मरीज की त्वचा के प्रकार और उपचार के प्रति उसके शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करते हैं। त्वचा को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए यह बेहद आवश्यक है कि निशानों को बार-बार छुआ न जाए, उन पर नाखून न मारा जाए और उन्हें खुजलाने से बचा जाए। इसके अलावा, नींबू का रस, घर पर तैयार किए जाने वाले हार्श स्क्रब या किसी भी प्रकार के बिना पतले किए गए रसायनों जैसे पारंपरिक घरेलू नुस्खों के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। ऐसे नुस्खे त्वचा में गंभीर जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे पिगमेंटेशन और निशान ठीक होने के बजाय और अधिक खराब हो सकते हैं। इसका आप पर असर चिकनपॉक्स के निशानों और गड्ढों के सही उपचार से चेहरे की बनावट में काफी सुधार आ सकता है और कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं पर होने वाला अनावश्यक खर्च बच सकता है। • भारत में: देश भर में लोग चिकनपॉक्स के दाग हटाने के लिए घरेलू नुस्खों के बजाय सही डर्मेटोलॉजिकल सलाह और सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। • गुड़गांव में: फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे स्थानीय केंद्रों पर पेशेवर सलाह लेकर लेजर या माइक्रोनीडलिंग जैसी उन्नत प्रक्रियाएं कराई जा सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ चिकनपॉक्स के दौरान त्वचा के ऊतकों को होने वाले नुकसान और इंफेक्शन के कारण विभिन्न प्रकार के निशान और गड्ढे बनते हैं। • त्वचा की क्षति: वायरस के संक्रमण और बार-बार खुजलाने से कोलेजन फाइबर टूट जाते हैं, जिससे गहरे एट्रोफिक स्कार्स बनते हैं। • पिगमेंटेशन का कारण: हीलिंग प्रक्रिया के दौरान धूप के संपर्क में आने से मेलानिन का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे काले धब्बे पक्के हो जाते हैं। • गलत नुस्खों का प्रभाव: नींबू का रस या अनियोजित केमिकल लगाने से त्वचा में जलन होती है और सूजन के बाद की पिगमेंटेशन की समस्या और गंभीर हो जाती है। सवाल-जवाब 1. चिकनपॉक्स के बाद चेहरे पर किस तरह के निशान रह जाते हैं? चिकनपॉक्स के बाद त्वचा पर सूजन के कारण काले धब्बे या गहरे गड्ढे और धंसे हुए निशान (एट्रोफिक स्कार्स) बन सकते हैं। 2. चिकनपॉक्स के काले निशानों को ठीक करने के लिए क्या जरूरी है? धूप से बचाव के लिए कम से कम SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। 3. गहरे गड्ढों या एट्रोफिक स्कार्स के लिए कौन सी प्रक्रियाएं सुझाई जाती हैं? इनके लिए माइक्रोनीडलिंग रेडियोफ्रीक्वेंसी और फ्रैक्शनल CO2 लेजर रिसर्फेसिंग जैसी स्कार-रिवीजन प्रक्रियाओं की सलाह दी जाती है। 4. उचित उपचार से निशानों में कितना सुधार आ सकता है? कुछ चुनिंदा मामलों में सही उपचार से लगभग 60 से 80 प्रतिशत तक सुधार देखने को मिल सकता है। 5. त्वचा के निशानों पर कौन सी चीजें लगाने से बचना चाहिए? नींबू का रस, हार्श स्क्रब या बिना पतले किए केमिकल्स जैसे घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। https://trendkia.com/health/chikanapoksa-ke-jiddi-nishanon-se-kaise-paen-chhutakara-janen-dr-rashmi-sharma-ki-khasa-salaha-57902 TrendKia — Har trend, sabse pehle.