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  "type": "article",
  "title": "चीन में डॉक्टरों का बड़ा कमाल, मां के गर्भ में ही सुई से नष्ट किया बच्चे के फेफड़े का ट्यूमर",
  "summary": "चीनी चिकित्सकों ने 22 सप्ताह के भ्रूण के फेफड़े में पनपे ट्यूमर को माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक से बिना चीर-फाड़ नष्ट कर दिया। इसके बाद 37वें हफ्ते में पूरी तरह स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ।",
  "content": "चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक असाधारण सफलता सामने आई है, जहाँ डॉक्टरों ने गर्भ में पल रहे शिशु के फेफड़े में बने गंभीर ट्यूमर को बिना किसी बड़े ऑपरेशन के सफलतापूर्वक खत्म कर दिया। जब एक गर्भवती महिला की नियमित जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड किया गया, तो उसके गर्भस्थ शिशु के फेफड़ों के पास एक बड़ा और खतरनाक ट्यूमर देखा गया। ऐसी जटिल परिस्थितियों में अक्सर गर्भपात का रास्ता चुना जाता था या फिर अत्यंत जोखिम भरी सर्जरी की नौबत आती थी। चीनी चिकित्सकों ने इस बार पारंपरिक तरीकों से हटकर एक नई रणनीति तैयार की और बिना कोई बड़ा चीरा लगाए ट्यूमर को गर्भ के अंदर ही निष्क्रिय कर दिया।\n\nक्या है CPAM और यह गर्भ में क्यों बन जाता है जानलेवा\nगर्भ में पल रहे शिशु को CPAM यानी कंजेनिटल पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन नाम की समस्या थी। यह फेफड़ों से जुड़ी एक जन्मजात विसंगति है जो विकास के शुरुआती चरणों में पनपती है। चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार, लगभग 25 से 35 हजार गर्भाधान के मामलों में से किसी एक बच्चे में यह स्थिति देखने को मिलती है। आमतौर पर यह विकार हर मामले में घातक नहीं होता, लेकिन जब ट्यूमर असामान्य रूप से बहुत तेजी से बढ़ने लगता है, तो यह शिशु के अन्य अंगों के लिए भारी खतरा पैदा कर देता है।\n\nजब यह ट्यूमर बड़ा आकार ले लेता है, तो गर्भस्थ शिशु के नाजुक दिल और फेफड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगता है। इस दबाव के चलते रक्तसंचार प्रभावित होता है और शिशु के पेट के भीतर खतरनाक तरीके से तरल पदार्थ यानी पानी जमा होना शुरू हो जाता है। इस जटिल स्थिति से गर्भ के भीतर ही शिशु की जान जाने का सीधा जोखिम पैदा हो जाता है। वर्तमान समय में इस बीमारी के लिए कोई एक सर्वमान्य तय उपचार उपलब्ध नहीं है। हल्के मामलों में ट्यूमर का विस्तार रोकने के लिए गर्भवती महिला को स्टेरॉयड दवाइयां दी जाती हैं। वहीं जब बड़े सिस्ट बन जाते हैं, तो पेट के रास्ते एक पतली नली डालकर तरल पदार्थ को बाहर निकाला जाता है। यदि फेटल लोबेक्टॉमी जैसी खुली सर्जरी की जाए तो उसमें खतरे बहुत बढ़ जाते हैं, क्योंकि शोध के मुताबिक ऐसी बड़ी प्रक्रियाओं के बाद केवल आधे बच्चों के ही जीवित बचने की उम्मीद रहती है।\n\nमाइक्रोवेव एब्लेशन से निकाला गया बिना चीर-फाड़ का रास्ता\nचीनी डॉक्टरों ने इस गंभीर चुनौती का हल निकालने के लिए माइक्रोवेव एब्लेशन पद्धति का सहारा लिया। यह पूरा मामला 40 वर्ष की एक गर्भवती महिला से जुड़ा था, जिसके 22 सप्ताह के गर्भस्थ शिशु के फेफड़े में 5 सेंटीमीटर बड़ा ट्यूमर पनप चुका था। इस विशाल ट्यूमर के दबाव से दिल और फेफड़े दब रहे थे और पेट में खतरनाक ढंग से पानी भर गया था। इस गंभीर संकट को देखते हुए डॉक्टरों ने एक अत्यंत सटीक और मिनिमली इनवेसिव रणनीति पर अमल किया।\n\nडॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड की बारीक निगरानी में मां के पेट के माध्यम से एक बेहद महीन सुई को सीधे शिशु के फेफड़े में मौजूद ट्यूमर तक पहुंचाया। सुई के सही स्थान पर पहुंचते ही उसके जरिए माइक्रोवेव ऊर्जा भेजी गई। इस विशेष ऊर्जा ने ट्यूमर के ऊतकों में मौजूद पानी के सूक्ष्म कणों में तीव्र कंपन पैदा किया, जिससे वहां भारी गर्मी उत्पन्न हुई। इस नियंत्रित आंतरिक ताप ने ट्यूमर की कोशिकाओं को भीतर से ही सुखाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया, और इसके लिए किसी चीरे की आवश्यकता नहीं पड़ी।\n\nतीन दिन में सिमट गया ट्यूमर और स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म\nइस आधुनिक प्रक्रिया के परिणाम बेहद तीव्र और चौंकाने वाले रहे। उपचार पूरा होने के महज तीन दिनों के भीतर ट्यूमर का आकार बहुत तेजी से छोटा हो गया और शिशु के पेट में जमा सारा तरल पदार्थ पूरी तरह गायब हो गया। इस सुधार से बच्चे के दिल और फेफड़ों पर बना दबाव समाप्त हो गया और गर्भ में उसका सामान्य विकास फिर से शुरू हो गया।\n\nइसके बाद गर्भावस्था सामान्य रूप से आगे बढ़ी और 37वें सप्ताह में सिजेरियन डिलीवरी के माध्यम से एक स्वस्थ शिशु का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्चे का वजन लगभग 2.9 किलोग्राम दर्ज किया गया। चिकित्सा जगत में इस सफल प्रक्रिया को एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि गर्भस्थ शिशु के CPAM ट्यूमर के इलाज के लिए माइक्रोवेव एब्लेशन का इस्तेमाल दुनिया में पहली बार किया गया है। चिकित्सकों ने साफ किया है कि यह तकनीक बेहद उम्मीद जगाने वाली है, लेकिन केवल एक सफल मामले के आधार पर इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा पर अंतिम मुहर नहीं लगाई जा सकती। यदि व्यापक शोध में यह पद्धति खरी उतरती है, तो यह भविष्य में गंभीर CPAM मामलों के लिए जीवनरक्षक विकल्प बन सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह सफल प्रक्रिया भविष्य में गर्भस्थ शिशुओं में होने वाली जटिल बीमारियों के इलाज को पूरी तरह बदल सकती है।\n\n• गर्भवती महिलाओं के लिए: गर्भ में ट्यूमर जैसी गंभीर विसंगतियां पाए जाने पर अब केवल गर्भपात या भारी जोखिम वाली ओपन सर्जरी ही एकमात्र रास्ता नहीं रहेगा। आने वाले समय में मिनिमली इनवेसिव तकनीक की मदद से मां और अजन्मे बच्चे दोनों की जान को होने वाले खतरे काफी कम हो सकेंगे।\n• सुरक्षित इलाज का विकल्प: पारंपरिक ओपन फेटल सर्जरी में जहां नवजात के बचने की संभावना केवल पचास प्रतिशत रहती थी, यह तकनीक बिना चीरा लगाए इलाज संभव बनाती है। इससे मां के शरीर पर ऑपरेशन के निशान या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।\n• भविष्य की उपलब्धता: अभी यह तकनीक शुरुआती परीक्षण के दौर में है और केवल एक मामले में सफल रही है। बड़े पैमाने पर क्लीनिकल ट्रायल्स पूरे होने के बाद ही यह आम अस्पतालों में नियमित इलाज के तौर पर उपलब्ध हो सकेगी।\n• प्रसव पूर्व जांच की अहमियत: गर्भावस्था के दौरान समय पर अल्ट्रासाउंड कराना बेहद आवश्यक साबित होता है। 20 से 22 सप्ताह के बीच समय पर जांच कराने से ऐसी दुर्लभ विकृतियों को समय रहते पहचानकर तुरंत इलाज की योजना बनाई जा सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगर्भ में पल रहे बच्चे के फेफड़े में बने बड़े ट्यूमर ने उसके महत्वपूर्ण अंगों पर जानलेवा दबाव बना दिया था, जिसके चलते डॉक्टरों को इस नई तकनीक का प्रयोग करना पड़ा।\n\n• ट्यूमर का भारी आकार: 22 सप्ताह के भ्रूण के फेफड़े में 5 सेंटीमीटर बड़ा CPAM ट्यूमर विकसित हो गया था। इस बड़े आकार की वजह से शिशु के दिल और फेफड़ों की कार्यप्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित हो रही थी।\n• पेट में पानी का जमाव: ट्यूमर द्वारा अंगों को दबाए जाने के कारण भ्रूण के पेट में खतरनाक स्तर पर तरल पदार्थ जमा होने लगा था। इस स्थिति से गर्भ के अंदर ही बच्चे की मृत्यु का बहुत अधिक जोखिम उत्पन्न हो गया था।\n• पारंपरिक सर्जरी के खतरे: फेटल लोबेक्टॉमी जैसी खुली सर्जरी में भ्रूण के जीवित बचने की संभावना केवल पचास प्रतिशत रहती है। ऐसे में चिकित्सकों ने बच्चे और मां की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कम जोखिम वाली माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक को चुना।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. CPAM किस प्रकार की बीमारी है और यह कितनी दुर्लभ है?\nCPAM फेफड़ों की एक जन्मजात विसंगति है जो गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के फेफड़ों में ट्यूमर के रूप में विकसित होती है। यह लगभग 25 से 35 हजार गर्भाधान के मामलों में से किसी एक में पाई जाती है।\n\n2. डॉक्टरों ने गर्भ के अंदर ट्यूमर को नष्ट करने के लिए किस तकनीक का प्रयोग किया?\nचिकित्सकों ने माइक्रोवेव एब्लेशन तकनीक का सहारा लिया, जिसमें सुई के जरिए भेजी गई माइक्रोवेव ऊर्जा की गर्मी से ट्यूमर को अंदर ही अंदर नष्ट कर दिया गया।\n\n3. इस प्रक्रिया के बाद ट्यूमर पर कितना असर पड़ा?\nउपचार के केवल तीन दिनों के भीतर ट्यूमर का आकार काफी छोटा हो गया और बच्चे के पेट में जमा सारा तरल पदार्थ पूरी तरह समाप्त हो गया।\n\n4. बच्चे का जन्म कब हुआ और उसका वजन कितना था?\nगर्भावस्था के 37वें सप्ताह में सिजेरियन डिलीवरी के माध्यम से एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ, जिसका वजन करीब 2.9 किलोग्राम था।\n\n5. क्या यह प्रक्रिया अब दुनिया भर के अस्पतालों में नियमित रूप से उपलब्ध है?\nनहीं, यह दुनिया में इस तकनीक का पहला सफल मामला है और इसे व्यापक रूप से लागू करने से पहले आगे और अधिक परीक्षणों की आवश्यकता होगी।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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    "माइक्रोवेव एब्लेशन",
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