दैनिक आहार में घी का संतुलन क्यों है जरूरी, फरीदाबाद के डॉक्टर निशांत राइज़ादा ने बताए सही नियम खाने में घी का सीमित उपयोग सेहत को गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। अमृता अस्पताल फरीदाबाद के विशेषज्ञ ने रोजाना एक से दो चम्मच घी सेवन की सलाह दी है। भारतीय खान-पान में घी का एक विशेष स्थान रहा है। दाल में तड़का लगाना हो, रोटियों पर घी चुपड़ना हो या फिर पारंपरिक मिठाइयां बनानी हों, घी स्वाद को दोगुना कर देता है। स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यह ऊर्जा का भी बड़ा स्रोत है। हालांकि, स्वाद के फेर में अत्यधिक घी खाना शरीर के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। घी में वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसके कारण इसका अत्यधिक सेवन वजन बढ़ाने के साथ-साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। कई बार लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि दिनभर में कितना घी खाना सुरक्षित है और क्या खाना पकाने के लिए तेल से ज्यादा घी बेहतर है। इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर निशांत राइज़ादा ने विस्तृत जानकारी दी है। दैनिक आहार में घी की सुरक्षित मात्रा डॉक्टर निशांत राइज़ादा के अनुसार, चाहे घी हो या कुकिंग ऑयल, दोनों का ही इस्तेमाल संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। यदि आहार में फैट की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जिससे मोटापा बढ़ता है। जब वजन अनियंत्रित होता है, तो उसके साथ ही शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य चयापचय से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। सेहतमंद रहने के लिए घी को भोजन से पूरी तरह हटाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि इसकी मात्रा को सीमित करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिनभर में एक से दो चम्मच घी खाना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, भोजन पकाते समय भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अतिरिक्त घी या तेल का उपयोग न हो। ज्यादा घी खाने से होने वाले मुख्य स्वास्थ्य जोखिम अत्यधिक घी का सेवन शरीर के वजन को तेजी से बढ़ा सकता है। वजन में होने वाली यह वृद्धि शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों पर दबाव डालती है। डॉक्टर निशांत राइज़ादा बताते हैं कि जब शरीर में वसा का स्तर बढ़ता है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। इसके साथ ही, रक्त वाहिकाओं में वसा जमा होने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार, केवल घी खाने की आदत ही कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकती है। इसलिए आहार में घी को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसकी दैनिक खुराक पर ध्यान देना सबसे अनिवार्य है। घी और कुकिंग ऑयल: सेहत के लिए कौन है बेहतर? अतीत में यह माना जाता था कि घी स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से हानिकारक है और तेल ही बेहतर विकल्प है। हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने इस दृष्टिकोण में बदलाव लाया है। डॉक्टर निशांत राइज़ादा के अनुसार, घी और तेल दोनों के अपने-अपने पोषण संबंधी गुण हैं और संतुलित आहार में दोनों का अपना स्थान है। समस्या तब आती है जब इनका उपयोग सीमित सीमा से बाहर निकल जाता है। दैनिक खाना पकाने के लिए वनस्पति तेल या अन्य कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल करना ज्यादा व्यावहारिक और बेहतर माना जाता है। वहीं, घी का उपयोग स्वाद और पोषण के लिए सीमित मात्रा में ऊपर से डालकर किया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर घी का प्रभाव यदि कोई व्यक्ति लगातार जरूरत से ज्यादा घी का सेवन करता है, तो उसके रक्त में कोलेस्ट्रॉल, विशेषकर एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। डॉक्टर निशांत राइज़ादा का कहना है कि एक से दो चम्मच की सीमित मात्रा आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नुकसान नहीं पहुंचाती है। लेकिन जिन लोगों को पहले से ही उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या दिल की बीमारी है, उन्हें अपनी डाइट में फैट की कुल मात्रा पर विशेष नजर रखनी चाहिए। जरा सी लापरवाही भी कोलेस्ट्रॉल के संतुलन को बिगाड़ सकती है। उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आहार में बदलाव यह एक आम धारणा है कि बढ़ती उम्र के साथ घी खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, लेकिन डॉक्टर निशांत राइज़ादा स्पष्ट करते हैं कि घी की मात्रा सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करती। मुख्य बात यह है कि व्यक्ति की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति कैसी है। यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे उम्र चाहे जो भी हो, फैट के सेवन में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। उम्र बढ़ने मात्र से घी को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, बशर्ते व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय हो और उसे कोई गंभीर बीमारी न हो। घी अपने आप में खराब नहीं है, लेकिन अनियंत्रित मात्रा में इसका सेवन नुकसान पहुंचाता है। संतुलित फैट सेवन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का अति सेवन नुकसानदेह होता है। दिनभर में घी और तेल के माध्यम से ली जाने वाली कुल वसा की मात्रा पर नजर रखना बेहद जरूरी है। यदि आप एक या दो चम्मच घी ले रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके बाकी खाने में अत्यधिक तेल या डीप फ्राइड चीजें शामिल न हों। जिन लोगों को पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं, उन्हें अपनी दैनिक डाइट में कोई भी बदलाव करने या घी की मात्रा तय करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लेना चाहिए। इसका आप पर असर आहार प्रबंधन: रोजाना एक से दो चम्मच तक घी का सीमित सेवन वजन और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद करता है। मरीजों के लिए सलाह: डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को घी की मात्रा तय करने से पहले डॉक्टरी परामर्श लेना चाहिए। सवाल-जवाब 1. दिनभर में कितना घी खाना सुरक्षित माना जाता है? डॉक्टर के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिनभर में एक से दो चम्मच घी का सेवन करना सुरक्षित है। 2. क्या ज्यादा घी खाने से वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है? हां, अत्यधिक घी खाने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होती है, जिससे वजन और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। 3. खाना पकाने के लिए घी और तेल में से क्या बेहतर है? रोजाना खाना पकाने के लिए कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है, जबकि घी का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है। 4. क्या बढ़ती उम्र के साथ घी खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए? नहीं, उम्र के कारण घी बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर डायबिटीज या बीपी जैसी बीमारी है तो मात्रा नियंत्रित रखनी चाहिए। https://trendkia.com/health/dainika-ahara-men-ghee-ka-sntulana-kyon-hai-jaruri-faridabad-ke-doktara-nishant-raizada-ne-batae-sahi-niyama-15302 TrendKia — Har trend, sabse pehle.