दांतों को खोखला बना रहे ग्लूकोज और रोगाणु, रात के भोजन के बाद यह सावधानी बचाएगी मुस्कान मुंह में मौजूद रोगाणु ग्लूकोज के संपर्क में आते ही तेजी से पनपते हैं, जो बच्चों और बड़ों में कैविटी की मुख्य वजह बन रहे हैं। दिन में दो वक्त उचित सफाई और खानपान की आदतों में बदलाव से दांत सुरक्षित रह सकते हैं। मुस्कान को प्रभावित करने वाली दांतों की कैविटी अब किसी एक उम्र तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, बड़ी तादाद में लोग इस गंभीर परेशानी से दो-चार हो रहे हैं। दांतों में खोखलापन या सड़न पैदा होने से न केवल असहनीय टीस उठती है, बल्कि कुछ भी चबाना या सामान्य तरल पदार्थ पीना भी बेहद दूभर हो जाता है। रोजमर्रा के खानपान और दांतों की देखभाल से जुड़ी मामूली लापरवाहियां इस तकलीफ को और बढ़ा देती हैं, जबकि कुछ आसान आदतों को नियम में शामिल करके इस परेशानी से पूरी तरह दूरी बनाई जा सकती है। ग्लूकोज और रोगाणुओं का तालमेल बनता है सड़न की वजह पूर्वी चंपारण जिले के प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉक्टर श्रीकांत ने दांतों के क्षरण की आंतरिक प्रक्रिया को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार मनुष्य के मुंह के भीतर बैक्टीरिया और फंगस स्वाभाविक रूप से पहले से मौजूद रहते हैं। जब भी कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा मीठी खाद्य सामग्री खाता है, तो मुंह में पहुंचे ग्लूकोज के संपर्क में आते ही इन सूक्ष्मजीवों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ने लगती है। बैक्टीरिया की यह अचानक बढ़ती सक्रियता ही दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाकर कैविटी का रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए उन्होंने कुछ बेहद व्यावहारिक और असरदार सावधानियां अपनाने पर जोर दिया है। दो पहर की सफाई और चिपचिपे भोजन से परहेज जरूरी दांतों को सड़न से दूर रखने के लिए डॉक्टर श्रीकांत ने नियमित सफाई की बुनियादी प्रक्रिया समझाई है। हर व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर कम से कम दो बार पूरी एकाग्रता के साथ ब्रश करना चाहिए। पहली बार सुबह सोकर उठने के बाद और दूसरी बार रात के वक्त, जब भोजन पूरी तरह समाप्त हो चुका हो और सोने की तैयारी हो। भोजन के बाद मुंह में बचे अन्न कण ही इन रोगाणुओं का मुख्य आहार बनते हैं। अत्यधिक मीठे और दांतों से चिपक जाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसे पदार्थ दांतों की सतह पर जमे रहकर कैविटी के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। रात के भोजन के तुरंत बाद ठीक से ब्रश करने से यह परत साफ हो जाती है और सड़न का खतरा टल जाता है। दो से तीन साल के बच्चों में भी बढ़ रहा है संक्रमण दांतों की यह दुर्दशा अब बड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुत छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। डॉक्टर श्रीकांत के मुताबिक आज के दौर में महज दो से तीन साल के नन्हे बच्चों के दूध के दांतों में भी कैविटी तेजी से उभर रही है। इसका सीधा संबंध बच्चों को लगातार दी जाने वाली टॉफियों, मीठी गोलियों और चिपचिपी मिठाइयों से है। बच्चों की हिफाजत के लिए उन्होंने अभिभावकों को सख्त नसीहत दी है कि जब भी बच्चे को दूध पिलाया जाए, उसके फौरन बाद या तो बच्चे का मुंह सादे पानी से अच्छी तरह साफ कराया जाए या उसे थोड़ा पानी अवश्य पिलाया जाए। दैनिक दिनचर्या में इन मामूली सुधारों को अपनाकर दांतों की गंभीर बीमारियों से लंबे समय तक सुरक्षा पाई जा सकती है। इसका आप पर असर खानपान और सफाई की सही आदतें अपनाकर आप दांतों की असहनीय पीड़ा और इलाज के भारी खर्च से बच सकते हैं। • दैनिक दिनचर्या: दिन में दो बार ब्रश करने का कड़ा नियम बनाएं। सुबह उठते ही और रात को भोजन के तुरंत बाद दांत साफ करने से सड़न का जोखिम खत्म हो जाता है। • आहार में बदलाव: चिपचिपे मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। टॉफी और अत्यधिक ग्लूकोज वाली चीजें दांतों में चिपककर रोगाणुओं को न्योता देती हैं। • अभिभावकों के लिए: छोटे बच्चों को दूध पिलाने के तुरंत बाद सादा पानी जरूर दें। दो से तीन साल के बच्चों के मुंह में दूध की परत साफ करने से उनके दूध के दांत सुरक्षित रहते हैं। • स्वास्थ्य सुरक्षा: दांतों की शुरुआती सड़न को नजरअंदाज न करें। समय रहते रोकथाम करने से भविष्य में होने वाली दर्दनाक रूट कैनाल या दांत निकालने की नौबत से बचा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ मुंह में मौजूद स्वाभाविक रोगाणु जब खानपान के अवशेषों और शर्करा के संपर्क में आते हैं, तो वे तेजी से पनपकर दांतों के क्षरण का कारण बनते हैं। भोजन के बाद ठीक से सफाई न होने पर यह प्रक्रिया गंभीर रूप ले लेती है। • ग्लूकोज और रोगाणुओं की प्रतिक्रिया: मुंह में बैक्टीरिया और फंगस पहले से मौजूद रहते हैं। जब इन्हें भोजन से ग्लूकोज मिलता है, तो इनकी तादाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है जो इनेमल को खोखला करती है। • रात में सफाई की कमी: रात के भोजन के अवशेष घंटों तक दांतों के बीच फंसे रह जाते हैं। सोते समय यही फंसे हुए कण रोगाणुओं के पनपने का मुख्य जरिया बन जाते हैं। • चिपचिपे खाद्य पदार्थों की अधिकता: टॉफी और अन्य चिपचिपी मिठाइयां लंबे समय तक दांतों की सतह पर चिपकी रहती हैं। लार द्वारा आसानी से न धुल पाने के कारण ये तेजी से कैविटी बनाती हैं। • दूध के बाद कुल्ला न करना: बच्चों को दूध पिलाने के बाद मुंह में बची दूध की शर्करा दांतों पर जम जाती है। पानी से सफाई न करने की चूक नन्हे बच्चों में सड़न का बड़ा कारण बनती है। सवाल-जवाब 1. दांतों में कैविटी होने का मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या है? मुंह में पहले से मौजूद बैक्टीरिया और फंगस जब ग्लूकोज के संपर्क में आते हैं, तो उनकी संख्या तेजी से बढ़ती है और यही दांतों में कैविटी पैदा करता है। 2. दांतों की सुरक्षा के लिए दिन में कितनी बार और कब ब्रश करना चाहिए? दिन में दो बार ब्रश करना जरूरी है; पहली बार सुबह उठने के बाद और दूसरी बार रात में भोजन करने के ठीक बाद। 3. क्या बहुत छोटे बच्चों के दांतों में भी कैविटी हो सकती है? हां, अत्यधिक टॉफी खाने और चिपचिपी चीजें लेने के कारण दो से तीन साल तक के नन्हे बच्चों में भी कैविटी की समस्या देखी जा रही है। 4. बच्चों को दूध पिलाने के बाद क्या सावधानी बरतनी चाहिए? बच्चों को दूध पिलाने के तुरंत बाद उनका मुंह सादे पानी से साफ करना चाहिए या उन्हें थोड़ा पानी पिला देना चाहिए। 5. किस प्रकार के खाद्य पदार्थों से कैविटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है? ज्यादा मीठी और दांतों से चिपक जाने वाली खाद्य सामग्री खाने से कैविटी होने का जोखिम कई गुना अधिक बढ़ जाता है। https://trendkia.com/health/danton-ko-khokhala-bana-rahe-glukoja-aura-roganu-rata-ke-bhojana-ke-bada-yaha-savadhani-bachaegi-muskana-47445 TrendKia — Har trend, sabse pehle.