# दांतों को सेहतमंद रखने के लिए नीम की दातुन क्यों है असरदार, जानिए इसके आयुर्वेदिक फायदे और सही तरीका

> दांतों की मजबूती और मुंह की दुर्गंध दूर करने में नीम की दातुन बेहद लाभकारी मानी जाती है। जानिए इसे इस्तेमाल करने की सही तकनीक और आयुर्वेदिक महत्व।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/danton-ko-sehatmand-rakhne-ke-liye-neem-ki-datun-kyon-hai-asardar-janie-iske-ayurvedic-fayde-aur-sahi-tareeka-19490 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीम की दातुन, आयुर्वेद, ओरल हेल्थ, दांतों की देखभाल, पायरिया, मसूड़ों की मजबूती

आज के दौर में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शारीरिक स्वच्छता को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है, जिसमें मौखिक स्वच्छता यानी ओरल केयर सबसे अहम हिस्सा है। बाजार में दांतों की सफाई के लिए तरह-तरह के आधुनिक टूथब्रश, केमिकल युक्त टूथपेस्ट और दंत मंजन उपलब्ध हैं, जिन्हें दांतों के लिए बेहद फायदेमंद बताकर बेचा जाता है। हालांकि, आधुनिक साधनों के प्रचलन से पहले हमारे पूर्वज दांतों की देखभाल के लिए प्राकृतिक दातुन का ही सहारा लेते थे। विभिन्न पेड़ों की पतली टहनियों से दातुन तैयार की जाती रही है, लेकिन टहनी का चुनाव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि उससे अच्छी कुची यानी ब्रिसल्स बन सकें और उसमें औषधीय गुण भी मौजूद हों। इन सभी मानकों पर नीम की लकड़ी सबसे उत्तम मानी जाती है, यही वजह है कि प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद में नीम की दातुन को सर्वोत्तम स्थान दिया गया है।

## नीम की दातुन तैयार करने का सही तरीका
आयुर्वेद डॉक्टर हर्ष के अनुसार, दातुन का पूरा लाभ उठाने के लिए सही टहनी का चयन और उसे इस्तेमाल करने का तरीका जानना बहुत आवश्यक है। दातुन बनाने के लिए हमेशा ऐसी टहनी चुननी चाहिए जो सूखी न हो, बल्कि उसमें ताजगी और नमी बरकरार हो। इस्तेमाल करने से पहले टहनी को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। इसके बाद टहनी के एक सिरे को दांतों से धीरे-धीरे चबाते हुए तब तक दबाना चाहिए जब तक कि वह टूथब्रश के रेशों की तरह नरम न हो जाए। जब यह कुची तैयार हो जाए, तब इससे दांतों और मसूड़ों की सफाई करनी चाहिए। सही तरीके से तैयार की गई दातुन से दांतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और मसूड़े सुरक्षित रहते हैं।

## दातुन का रस निगलने के अनूठे स्वास्थ्य लाभ
दातुन करने की प्रक्रिया के दौरान एक बहुत ही रोचक और स्वास्थ्यवर्धक पहलू सामने आता है। जब आप नीम की टहनी को दांतों से चबाकर कुची बनाते हैं, तो उस समय मुंह में नीम का कड़वा और प्राकृतिक रस बनता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस रस को बाहर थूकने के बजाय निगल लेना चाहिए। नीम का यह कड़वा रस पेट के अंदर जाकर आंतों की गहराई से सफाई करता है। इसके अलावा, यह रस रक्त शोधक यानी ब्लड प्यूरीफायर की तरह काम करता है, जिससे खून साफ होता है और चेहरे पर होने वाले कील-मुहासे तथा त्वचा से जुड़े अन्य रोगों से बचाव होता है। यह साधारण सा अभ्यास शरीर के आंतरिक डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है।

## मसूड़ों की मजबूती और सफाई की सही तकनीक
नीम की दातुन का एक मुख्य लाभ यह है कि यह मसूड़ों को प्राकृतिक रूप से मजबूती प्रदान करती है। दातुन करने की भी एक खास तकनीक होती है, जिसे सही तरीके से अपनाना चाहिए। ऊपरी दांतों की सफाई करते समय दातुन को ऊपर से नीचे की तरफ चलाना चाहिए, जबकि निचले दांतों की सफाई के दौरान दातुन को नीचे से ऊपर की ओर घुमाना चाहिए। दातुन को मुंह के चारों तरफ अच्छी तरह घुमाकर दांतों के कोने-कोने की सफाई करनी चाहिए। यदि नियमित रूप से इस तकनीक से सफाई की जाए, तो पायरिया जैसी गंभीर मौखिक बीमारी का खतरा खत्म हो जाता है। इसके अतिरिक्त, टहनी को चबाने की क्रिया से दांतों और जबड़ों की कसरत होती है, जिससे वे लंबे समय तक मजबूत बने रहते हैं।

## आयुर्वेद के अनुसार कफ दोष का निवारण और स्वाद का विज्ञान
आयुर्वेदिक सिद्धांतों के मुताबिक नीम और बबूल जैसे वृक्षों की टहनियों से बनी दातुन कटु और तिक्त रस यानी कड़वे और तीखे स्वाद से प्रधान होती हैं। आयुर्वेद में इस बात की स्पष्ट व्याख्या की गई है कि मुख क्षेत्र में कफ दोष की प्रधानता क्यों होती है। मीठा, खट्टा और नमकीन रस शरीर में कफ दोष को बढ़ाते हैं, जबकि कड़वा, तीखा और कसैला रस कफ दोष को नष्ट करता है। मानव शरीर में मुख प्रदेश को कफ का मुख्य केंद्र माना गया है। इसके अलावा, सुबह का समय कफ प्रधान होता है और रात भर सोने के कारण मुंह के भीतर कफ जमा हो जाता है। नीम की दातुन का कड़वा रस इस जमे हुए कफ को जड़ से समाप्त कर देता है और मुंह में ताजगी लाता है।

## कमर्शियल टूथपेस्ट बनाम प्राकृतिक नीम की दातुन
आजकल विभिन्न निजी कंपनियां अपने आकर्षक और लोक-लुभावन विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को भ्रमित करती हैं। कई व्यावसायिक मंजनों और टूथपेस्टों में नमक तथा अम्लीय रसों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अम्ल और लवण दांतों के ऊपरी हिस्से को साफ करके कुछ समय के लिए चमक दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये रसायन हमारे नाजुक मसूड़ों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आप नीम की दातुन का नियमित प्रयोग करते हैं, तो इससे मसूड़ों या दांतों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। नीम आपकी मौखिक शुद्धता को बिना किसी दुष्प्रभाव के बरकरार रखती है, इसलिए प्राकृतिक दातुन का प्रयोग ही सबसे सुरक्षित माना गया है।

## बैक्टीरिया, कैविटी और मुंह की बदबू से बचाव के नियम
नीम में प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो मुंह के भीतर मौजूद हानिकारक कीटाणुओं से लड़ते हैं। नियमित दातुन करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है और मसूड़ों से खून आने की समस्या से राहत मिलती है। यह दांतों पर जमने वाले प्लाक और कैविटी से बचाव करती है, जिससे दांत कुदरती रूप से साफ और चमकदार बनते हैं। नीम की दातुन एक नेचुरल माउथ फ्रेशनर का काम करती है और मुंह की दुर्गंध को पूरी तरह समाप्त कर देती है। दातुन करने की अवधि 5 मिनट से लेकर 15 मिनट तक हो सकती है। दातुन करने के बाद यदि तुरंत कुल्ला न किया जाए और 1 से 2 मिनट तक मुंह को ऐसे ही रहने दिया जाए, तो नीम का प्रभाव और अधिक गहरा होता है। बेहतर परिणामों के लिए सुबह और रात को दो बार दातुन की जा सकती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** प्राकृतिक और किफायती हर्बल मौखिक स्वच्छता विकल्पों को अपनाकर लोग रासायनिक टूथपेस्ट के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं।

**पाठकों के लिए:** नियमित दातुन के सही इस्तेमाल से पायरिया, मसूड़ों की सूजन और सांसों की बदबू जैसी समस्याओं का घर पर ही प्रभावी समाधान मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नीम की दातुन करने का सही तरीका क्या है?
नीम की ताजी टहनी को धोकर उसके एक सिरे को दांतों से चबाकर ब्रश जैसा रेशा बनाएं। ऊपरी दांतों पर ऊपर से नीचे और निचले दांतों पर नीचे से ऊपर की ओर सफाई करें।

### 2. दातुन करते समय निकलने वाले रस का क्या करना चाहिए?
दातुन चबाते समय बनने वाले प्राकृतिक रस को निगल लेना चाहिए, क्योंकि यह आंतों की सफाई करता है और रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है।

### 3. दिन में कितनी बार और कितने समय तक दातुन करनी चाहिए?
दातुन को सुबह और रात में दिन में दो बार 5 से 15 मिनट तक किया जा सकता है। दातुन के बाद 1 से 2 मिनट तक कुल्ला न करने पर अधिक लाभ मिलता है।

### 4. आयुर्वेद के अनुसार नीम की दातुन कफ दोष को कैसे दूर करती है?
मुख क्षेत्र में कफ का आधिक्य होता है। नीम का तिक्त और कटु रस कफ दोष को नष्ट करता है, जबकि मीठे या नमकीन मंजन कफ को बढ़ाते हैं।

### 5. क्या नीम की दातुन से पायरिया और मसूड़ों की सूजन कम होती है?
हां, नीम के प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करते हैं, मसूड़ों की सूजन व खून आने को रोकते हैं और पायरिया से बचाते हैं।

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