दिल्ली में जहरीली हवा का संकट गहराया, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताए बचाव के 7 जरूरी उपाय राजधानी दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस खतरनाक प्रदूषण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए सात अहम सावधानियां बरतने की सलाह दी है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हवा का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे आम जनजीवन और सेहत पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। आगरा स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी कंसलटेंट डॉ ऋषि यादव का कहना है कि वायु प्रदूषण का नुकसान केवल सांस की तकलीफों तक सीमित नहीं है। प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से आंखों में लगातार जलन, गले में खराश, तेज खांसी और सिरदर्द जैसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा हृदय रोगों का जोखिम भी काफी हद तक बढ़ जाता है, इसलिए सही समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स पर रखें पैनी नजर प्रदूषित हवा की चपेट में आने से खुद को बचाने का सबसे पहला और आसान तरीका यह है कि घर से बाहर निकलने से पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स की जांच जरूर करें। जब वायु गुणवत्ता का स्तर बहुत ज्यादा खराब हो, तो खुली हवा में की जाने वाली गतिविधियों को टाल देना चाहिए। खासकर उन लोगों को इस बारे में ज्यादा सतर्क रहना चाहिए जिन्हें प्रदूषण से गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। हवा की मौजूदा स्थिति के आधार पर ही अपनी दिनचर्या तय करके आप दूषित हवा के संपर्क में आने से काफी हद तक बच सकते हैं। सही मास्क का करें इस्तेमाल जब हवा में जहर घुला हो, तो बाहर निकलते समय एन95 या इसी श्रेणी का कोई उच्च गुणवत्ता वाला रेस्पिरेटर पहनना चाहिए ताकि खतरनाक कण सांस के रास्ते शरीर के भीतर न जा सकें। मास्क ऐसा होना चाहिए जो आपकी नाक और मुंह को पूरी तरह से ढक ले और चेहरे पर कसकर फिट बैठे ताकि किसी भी तरफ से हवा अंदर आने की जगह न बचे। साधारण कपड़े के मास्क या सामान्य सर्जिकल मास्क बहुत छोटे कणों को रोकने में नाकाफी साबित होते हैं। खुले में कसरत से बनाएं दूरी खराब हवा में बाहर व्यायाम करने से इस बात का खतरा बहुत बढ़ जाता है कि आप गहरी सांसों के जरिए भारी मात्रा में प्रदूषित हवा अंदर खींच रहे हैं। जब एक्यूआई खतरनाक स्तर पर हो, तो लोगों को बाहर दौड़ने, साइकिल चलाने या किसी भी तरह के भारी वर्कआउट से बचना चाहिए। इसके बजाय घर के भीतर किसी हवादार और सुरक्षित कोने में योग या हल्की स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। घर के भीतर की हवा को रखें शुद्ध अपने घर के अंदर के वातावरण को यथासंभव साफ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखना बहुत आवश्यक है। इसके लिए खिड़कियां और दरवाजे बंद रखे जा सकते हैं ताकि बाहर की जहरीली हवा भीतर न घुस सके, हालांकि जब बाहर प्रदूषण का स्तर कुछ कम हो तो ताजी हवा के वास्ते खिड़कियां खोली जा सकती हैं। घर के भीतरी हिस्से की हवा को स्वच्छ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग किया जाना एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है। खानपान और पोषण पर दें खास ध्यान शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा और सही पोषण होने से प्रदूषण के इस दौर में भी अंदरूनी अंग सुचारू रूप से काम करते रहते हैं और सेहत दुरुस्त बनी रहती है। अपने दैनिक भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, बीन्स, नट्स और अन्य स्वास्थ्यवर्धक चीजों को अवश्य शामिल करें। इनमें तमाम जरूरी विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। लक्षण दिखने पर तुरंत अपनाएं ये उपाय खराब वायु गुणवत्ता के कारण आंखों और फेफड़ों के नाजुक ऊतकों में गंभीर जलन पैदा हो सकती है। इससे आंखें लाल होना, गले में खराश, खांसी उठना, सांस लेते समय घरघराहट होना या सांस फूलने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। यदि इस तरह के लक्षण महसूस हों तो अपनी आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और उन्हें भूलकर भी हाथों से न रगड़ें। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, विशेष रूप से सांस या दिल की बीमारी, उन्हें अपने चिकित्सक से संपर्क कर यह जान लेना चाहिए कि हालात बिगड़ने पर उन्हें किन बातों का ध्यान रखना है। इसका आप पर असर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में खराब होती हवा का असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और कामकाज पर सीधा पड़ता है। • भारत में: जिन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहां बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन का सामना करना पड़ सकता है। आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वे प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान अनावश्यक यात्रा और भारी व्यायाम से बचें। • दिल्ली एनसीआर में: राजधानी क्षेत्र के निवासियों को तुरंत एन95 मास्क पहनने और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल शुरू करने की जरूरत है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना सुबह की सैर पर जाने से बचना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में हवा के जहरीले होने के पीछे कई मौसमी और स्थानीय कारक जिम्मेदार होते हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट और हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक कण निचले वायुमंडल में फंस जाते हैं। • मौसम में बदलाव और हवा की गति: सर्दियों के महीनों में तापमान कम होने और मंद हवा के कारण धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक तत्व वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते और सतह के पास ही ठहर जाते हैं। • पराया धुआं और स्थानीय उत्सर्जन: आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल मिलकर हवा को पूरी तरह जहरीला बना देते हैं। • भौगोलिक स्थितियां: उत्तर भारत का भौगोलिक दायरा और मौसमी परिस्थितियां इन हानिकारक कणों को रोककर रखती हैं, जिससे एक्यूआई लगातार खतरनाक श्रेणी में बना रहता है। सवाल-जवाब 1. दिल्ली में हवा खराब होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? घर से बाहर निकलने से पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स की जांच करें और अधिक प्रदूषण होने पर बाहरी गतिविधियों से बचें। 2. प्रदूषण से बचने के लिए किस तरह का मास्क पहनना चाहिए? साधारण कपड़े या सर्जिकल मास्क की जगह एन95 या इसी श्रेणी का उच्च गुणवत्ता वाला रेस्पिरेटर पहनना चाहिए जो चेहरे पर अच्छी तरह फिट हो। 3. खराब एक्यूआई के दौरान बाहर व्यायाम करना क्यों खतरनाक है? इस दौरान भारी कसरत करने से आप गहरी सांसों के जरिए अत्यधिक मात्रा में जहरीले कण अपने फेफड़ों के भीतर खींच लेते हैं। 4. घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखने के लिए क्या उपाय हैं? खिड़की-दरवाजे बंद रखकर बाहर का धुआं अंदर आने से रोकें और हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। 5. प्रदूषित हवा से आंखों और गले में परेशानी होने पर क्या करें? आंखों को साफ पानी से धोएं और उन्हें हाथों से बिल्कुल न रगड़ें। लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह लें। https://trendkia.com/health/delhi-aqi-crisis-toxic-air-returns-health-experts-recommend-7-crucial-safety-steps-51491 TrendKia — Har trend, sabse pehle.