दिल्ली-एनसीआर में फ्लू का कहर: H1N1 स्वाइन फ्लू से जुड़ी गलतफहमियां और मेडिकल जांच की पूरी सच्चाई दिल्ली और आसपास के इलाकों में बुखार और खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे लोग H1N1 और स्वाइन फ्लू को लेकर चिंतित हैं। जानिए इस बीमारी से जुड़ी भ्रांतियां, बचाव के तरीके और डॉक्टरों की सटीक सलाह। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और आसपास के शहरों में इन दिनों घर-घर में बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश और तेज बदन दर्द के मरीज सामने आ रहे हैं। मौसमी बदलाव और हवा की गुणवत्ता के बीच H1N1 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जब भी किसी बीमारी के मामले अचानक बढ़ने लगते हैं, तो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर उससे जुड़ी अफवाहें और भ्रामक जानकारियां भी तेजी से फैलने लगती हैं। लोग आम सर्दी-जुकाम को स्वाइन फ्लू समझने की भूल कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स गोलियां खाने लगे हैं। इस तरह के भ्रम स्वास्थ्य के लिए काफी घातक साबित हो सकते हैं। इसीलिए H1N1 संक्रमण की वास्तविक स्थिति, इसके फैलने के तरीके और बचाव के उपायों को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी हो गया है। H1N1 का इतिहास और नाम का सच H1N1 वास्तव में इन्फ्लूएंजा A वायरस का ही एक रूप है। वर्ष 2009 में जब इसने पहली बार वैश्विक महामारी का रूप लिया था, तब इसके आनुवंशिक गुण सुअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस से काफी मिलते-जुलते थे। इसी वजह से आम बोलचाल में इसे स्वाइन फ्लू कहा जाने लगा। हालांकि, आम धारणा के उलट यह बीमारी खाना पकाने या सुअर का मांस खाने से बिल्कुल नहीं फैलती है। यदि सुअर का मांस सही तापमान पर पकाकर खाया जाए, तो उससे किसी भी प्रकार के वायरस के संक्रमण का खतरा नहीं रहता। यह संक्रमण प्राथमिक रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सांस की बूंदों, छींकने, खांसने और संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से ही फैलता है। क्या हर बुखार स्वाइन फ्लू होता है? मौसम बदलने पर शरीर का तापमान बढ़ना या बुखार आना एक सामान्य प्रक्रिया है। कई लोग केवल तेज बुखार या सिरदर्द होते ही यह मान लेते हैं कि उन्हें स्वाइन फ्लू हो गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर बुखार H1N1 का संकेत नहीं होता। इस मौसम में डेंगू, सामान्य मौसमी इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और अन्य वायरल इंफेक्शन के कारण भी मरीज को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। लक्षणों में काफी समानता होने के कारण केवल शुरुआती लक्षणों के आधार पर खुद ही बीमारी का अंदाजा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। यदि बुखार लगातार बना रहे या स्थिति बिगड़े, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। संक्रमण की गंभीरता और जोखिम वाले वर्ग स्वाइन फ्लू को लेकर एक बड़ा भ्रम यह भी है कि यह हर मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है। हकीकत यह है कि H1N1 से संक्रमित होने वाले अधिकांश मरीज सही देखभाल, पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों के सेवन से पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि, कुछ विशेष वर्गों के लिए यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। बुजुर्ग लोग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से ही किसी पुरानी बीमारी जैसे अस्थमा, हृदय रोग, डायबिटीज या किडनी की समस्या से पीड़ित मरीजों में जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है। ऐसे संवेदनशील लोगों को शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकीय निगरानी में जाना चाहिए। वैक्सीन और दवाओं से जुड़े तथ्य अक्सर लोग सोचते हैं कि फ्लू की वैक्सीन लगवाने के बाद उन्हें कभी भी इन्फ्लूएंजा या स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता। डॉक्टरी तथ्य यह है कि मौसमी फ्लू वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, लेकिन यह बीमारी की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम कर देती है। यह टीका संबंधित मौसम में घूमने वाले संभावित वायरस स्ट्रेन से रक्षा करने के लिए तैयार किया जाता है। इसके अलावा, H1N1 एक वायरल इंफेक्शन है, इसलिए इसमें साधारण एंटीबायोटिक्स दवाएं बिल्कुल असरदार नहीं होती हैं। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को ठीक करती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर मामलों में डॉक्टर मरीज को एंटीवायरल दवाएं लिखते हैं। गंभीर चेतावनी संकेत और सावधानियां H1N1 के आम लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में दर्द, बहती नाक, थकान और मांसपेशियों में जकड़न शामिल हैं। लेकिन यदि मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही हो, छाती में तेज दर्द या दबाव महसूस हो रहा हो, बहुत अधिक कमजोरी आ गई हो, शरीर में पानी की गंभीर कमी हो जाए या उलझन की स्थिति बने, तो बिना समय गंवाए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, बीमार लोगों से उचित दूरी बनाना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना और अस्वस्थ होने पर घर पर ही रहना सबसे कारगर उपाय हैं। किसी भी भ्रामक संदेश पर विश्वास करने के बजाय केवल डॉक्टरी सलाह का ही पालन करें। इसका आप पर असर भारत में: मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स दवाएं खाने से बचें और भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें। दिल्ली-एनसीआर में: घरों में फैल रहे सर्दी-बुखार के मामलों को देखते हुए स्वच्छता बनाए रखें और सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें। सवाल-जवाब 1. क्या सुअर का मांस खाने से H1N1 स्वाइन फ्लू हो सकता है? नहीं, सही तरीके से पका हुआ सुअर का मांस खाने से H1N1 स्वाइन फ्लू नहीं फैलता है। यह वायरस मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सांस की बूंदों और निकट संपर्क से फैलता है। 2. क्या इन्फ्लूएंजा या फ्लू वैक्सीन H1N1 से 100% सुरक्षा देती है? कोई भी वैक्सीन 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देती है, लेकिन फ्लू का टीका संक्रमण की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है। 3. क्या एंटीबायोटिक दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जा सकता है? नहीं, H1N1 एक वायरल संक्रमण है इसलिए एंटीबायोटिक्स इस पर काम नहीं करती हैं। डॉक्टर गंभीर मामलों में केवल एंटीवायरल दवाएं लेने की सलाह देते हैं। 4. स्वाइन फ्लू के वे कौन से लक्षण हैं जिनके दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए? सांस लेने में तकलीफ, छाती में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, डिहाइड्रेशन या अचानक मानसिक उलझन महसूस होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। 5. क्या हर तेज बुखार स्वाइन फ्लू का ही लक्षण होता है? नहीं, तेज बुखार डेंगू, कोविड-19, सामान्य मौसमी फ्लू या अन्य वायरल इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद बीमारी तय न करें। https://trendkia.com/health/delhi-ncr-men-svaina-phlu-ki-ahata-h1n1-snkramana-ko-lekara-bhrama-aura-unaki-doktari-sachchai-21058 TrendKia — Har trend, sabse pehle.