डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स गिरते ही न करें भारी डाइट की भूल, जानिए मरीज के लिए जरूरी पोषण और सावधानियां डेंगू की चपेट में आने पर गलत खानपान मरीज की परेशानी बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ के अनुसार भारी और फैटी भोजन से बचकर हल्का आहार व तरल पदार्थ लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है। डेंगू संक्रमण की चपेट में आते ही मरीज और उसके परिजन अक्सर खानपान को लेकर भारी असमंजस में पड़ जाते हैं। खासकर जैसे ही ब्लड टेस्ट में प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है, तरह-तरह के घरेलू नुस्खे अपनाने की होड़ लग जाती है। लोग बकरी के दूध से लेकर अत्यधिक वसायुक्त चीजों के सेवन की सलाह देने लगते हैं, जबकि ऐसी भारी चीजें बीमार शरीर के पाचन तंत्र पर उल्टा असर डाल सकती हैं। मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल की डाइटिशियन डॉ. ज्योति सिंह का कहना है कि इस बीमारी के दौरान सबसे अहम बात हल्का, सुपाच्य भोजन लेना और शरीर में पानी तथा आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना है। चिकित्सीय दिशा-निर्देशों में भी तरल पदार्थों के पर्याप्त सेवन को सबसे बुनियादी जरूरत माना गया है। बीमारी के दौरान कैसा हो भोजन संक्रमण के दौर में शरीर की पाचन क्षमता काफी धीमी पड़ जाती है। ऐसे समय में भारी या अधिक तेल-मसाले वाला खाना मरीज की दिक्कतें बढ़ा देता है। डॉ. ज्योति सिंह के अनुसार रोगी को मूंग दाल, खिचड़ी, दलिया और इडली जैसे अत्यंत हल्के और सुपाच्य विकल्प देने चाहिए। ये खाद्य पदार्थ पेट पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना शरीर को आवश्यक ऊर्जा और प्रोटीन प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, बहुत ज्यादा फैटी और चिकनाई वाली चीजों से पूरी तरह परहेज रखना चाहिए ताकि लीवर और पेट पर बेवजह भार न पड़े। हाइड्रेशन और पोषक तत्वों की भूमिका डेंगू के प्रबंधन में डिहाइड्रेशन से बचाव सबसे अहम कड़ी है। शरीर में तरल की कमी न होने पाए, इसके लिए नारियल पानी, ओआरएस का घोल और अन्य उपयुक्त पेय पदार्थों का नियमित सेवन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही ताजे फलों को भी आहार में शामिल करना फायदेमंद रहता है। हालांकि हर मरीज की शारीरिक स्थिति और बीमारी की गंभीरता अलग होती है, इसलिए तरल पदार्थों और खानपान की सटीक मात्रा डॉक्टर के परामर्श से ही तय की जानी चाहिए। सब्जियां और पारंपरिक नुस्खे शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स देने के लिए आंवला और हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। हरी सब्जियों का उपयोग करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, इसलिए इन्हें अच्छी तरह धोकर और पूरी तरह पकाकर ही परोसें। इसके अतिरिक्त सहजन की पत्तियों के उपयोग की सलाह भी दी जाती है, लेकिन यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि कोई भी घरेलू उपाय मुख्य चिकित्सीय उपचार का विकल्प कभी नहीं हो सकता। प्लेटलेट्स की गिरावट और चेतावनी संकेत बीमारी के दौरान प्लेटलेट्स का कम होना एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है और मरीज की समग्र सेहत का फैसला केवल प्लेटलेट काउंट के आधार पर नहीं किया जाता। सीडीसी के अनुसार, मरीज के शरीर में तरल की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना और उसके लक्षणों पर लगातार निगरानी रखना ही प्राथमिक उपचार है। बिना डॉक्टर की सलाह के प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन भी सामान्य तौर पर नहीं किया जाता। यदि मरीज में पेट का तेज दर्द, लगातार उल्टियां, नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव, उल्टी या मल में खून आना अथवा अत्यधिक कमजोरी व बेचैनी जैसे लक्षण नजर आएं, तो यह गंभीर डेंगू के लक्षण हो सकते हैं और ऐसे में फौरन अस्पताल पहुंचना चाहिए। इसका आप पर असर डेंगू के दौरान खानपान की सही समझ मरीज को अनावश्यक जटिलताओं और गलत घरेलू उपचारों से बचा सकती है। • खानपान में बदलाव: मरीज को तली-भुनी चीजें या अत्यधिक फैट वाला खाना देने से तुरंत बचें। इसके बदले मूंग दाल, खिचड़ी और दलिया जैसे पचने में आसान भोजन ही परोसें। • तरल पदार्थों का नियम: शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए ओआरएस और नारियल पानी का नियमित उपयोग सुनिश्चित करें। सही हाइड्रेशन अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को काफी हद तक घटा देता है। • घरेलू उपायों की सीमा: पपीते के पत्ते या बकरी के दूध जैसे नुस्खों को डॉक्टर के इलाज का विकल्प न बनाएं। किसी भी नए नुस्खे को आजमाने से पहले हमेशा फिजिशियन से सलाह लें। • गंभीर लक्षणों पर नजर: केवल प्लेटलेट संख्या देखकर घबराने के बजाय ब्लीडिंग या पेट दर्द जैसे चेतावनी संकेतों पर नजर रखें। ऐसा कोई भी लक्षण दिखते ही बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं। ऐसा क्यों हुआ डेंगू संक्रमण के दौरान पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और शरीर में प्लाज्मा लीकेज या डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, जिसके कारण खानपान में विशेष सावधानी की जरूरत होती है। • पाचन तंत्र पर दबाव: वायरल संक्रमण के समय लीवर और आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे में फैटी और भारी चीजें खाने से अपच, उल्टी और पेट दर्द की समस्या बढ़ जाती है। • शरीर में तरल की कमी: डेंगू वायरस के प्रभाव से रक्त वाहिकाओं से तरल का रिसाव हो सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन का जोखिम पैदा होता है। यही कारण है कि मेडिकल गाइडलाइंस में ओआरएस और तरल पदार्थों पर सबसे अधिक बल दिया जाता है। • भ्रांतियों का प्रसार: समाज में प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ाने के लिए कई असत्यापित नुस्खे प्रचलित हैं। इन भ्रामक जानकारियों के चलते मरीज अक्सर सही पोषण और डॉक्टरी निगरानी से वंचित रह जाते हैं। सवाल-जवाब 1. डेंगू के मरीज को किस तरह का भोजन देना चाहिए? मरीज को मूंग दाल, खिचड़ी, दलिया और इडली जैसे अत्यंत हल्के और सुपाच्य आहार देने चाहिए। 2. बीमारी के दौरान किन चीजों को खाने से बचना चाहिए? बहुत ज्यादा वसायुक्त, चिकनाई वाली और भारी चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। 3. शरीर में पानी की कमी दूर करने के लिए क्या लेना फायदेमंद है? ओआरएस का घोल, नारियल पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थों का नियमित सेवन करना चाहिए। 4. क्या हरी सब्जियों को बिना पकाए या कच्चा खाया जा सकता है? नहीं, हरी पत्तेदार सब्जियों को हमेशा अच्छी तरह धोकर और पूरी तरह पकाकर ही खाना चाहिए। 5. गंभीर डेंगू के मुख्य चेतावनी संकेत क्या हैं? पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना और अत्यधिक कमजोरी दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। https://trendkia.com/health/dengue-bukhara-men-pletaletsa-girate-hi-na-karen-bhari-daita-ki-bhula-janie-marija-ke-lie-jaruri-poshana-aura-savadhaniyan-36349 TrendKia — Har trend, sabse pehle.