धुलाई के बाद भी पानी के टैंक से दुर्गंध आ रही है तो आजमाएं ये घरेलू नुस्खे अगर पूरी धुलाई के बाद भी पानी के टैंक में सीलन या दुर्गंध बरकरार है, तो घरेलू सामग्रियों और वेंटिलेशन के कुछ आसान तरीकों से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। घरों में छत पर लगे पानी के ओवरहेड टैंक को नियमित अंतराल पर खाली करके मांझना स्वच्छता के लिहाज से जरूरी माना जाता है। इसके बावजूद कई घरों में यह परेशानी देखने को मिलती है कि पूरी मेहनत से रगड़कर साफ करने के बाद भी नलों से आने वाले पानी में अजीब सी महक बनी रहती है। ऐसा दूषित पानी रोजमर्रा के नहाने, कपड़े धोने और पीने के काम को मुश्किल बना देता है, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी खड़े करता है। टैंक के भीतरी कोनों में छिपे सूक्ष्म कीटाणुओं और फफूंद को समाप्त करने के लिए कुछ साधारण किंतु बेहद कारगर तरीके अपनाए जा सकते हैं। सिरका और बेकिंग सोडा का संयुक्त घोल लगाएं रसोई में काम आने वाले बेकिंग सोडा और सिरके का मिश्रण एक बेहतरीन प्राकृतिक शोधक साबित होता है। जब टैंक पूरी तरह खाली हो, तब एक बाल्टी साफ पानी लेकर उसमें चार से पांच बड़े चम्मच बेकिंग सोडा घोलें और साथ में एक कप सफेद सिरका मिला दें। तैयार किए गए इस मिश्रण को टैंक की भीतरी सतहों, तलहटी और कोनों पर स्पंज या ब्रश से भलीभांति फैला दें। इस लेप को कुछ घंटों तक दीवारों पर ही लगा रहने दें ताकि रासायनिक क्रिया से फफूंद ढीली पड़ जाए। बाद में तेज पानी की धार से पूरे टैंक को खंगालकर गंदा पानी बाहर निकाल दें। क्लोरीन अथवा ब्लीचिंग पाउडर से कीटाणुशोधन अक्सर पानी की आपूर्ति लाइन और टैंक की प्लास्टिक दीवारों की सूक्ष्म परतों में बैक्टीरिया अपना घर बना लेते हैं, जो निरंतर दुर्गंध छोड़ते रहते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए टैंक को सुखाकर उसमें संतुलित अनुपात में ब्लीचिंग पाउडर अथवा क्लोरीन का छिड़काव किया जा सकता है। इस कीटाणुनाशक लेप को थोड़ी देर सतह पर टिके रहने दें और उसके बाद तेज दबाव वाले पानी की बौछार से अच्छी तरह प्रक्षालित करें। धुलाई समाप्त होने के उपरांत टैंक का ऊपरी ढक्कन कुछ घंटों के लिए खुला छोड़ना अनिवार्य है, ताकि क्लोरीन की तीखी गंध हवा के साथ उड़ जाए। धूप और खुली ताजी हवा का वेंटिलेशन अधिकांश लोग टैंक को धोने के तुरंत बाद उसका ढक्कन कसकर बंद कर देते हैं, जिससे भीतरी वाष्प और नमी अंदर ही कैद हो जाती है। नमी का यह ठहराव सीलन भरी बदबू पैदा करने का मुख्य कारण बनता है। धुलाई पूरी होते ही ढक्कन को खुला रखें ताकि तेज धूप और प्राकृतिक वायु का प्रवाह अंदर तक पहुंच सके। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें दीवारों में बची रह गई नमी और सूक्ष्म जीवाणुओं को प्राकृतिक तरीके से नष्ट कर देती हैं, जिससे सीलन की समस्या जड़ से समाप्त हो जाती है। नींबू के रस का भीतरी छिड़काव नींबू में मौजूद प्राकृतिक सिट्रिक एसिड और उसकी प्राकृतिक भीनी सुगंध पानी के भंडारण स्थल को ताजगी प्रदान करती है। एक मग पानी में ताजे नींबू का रस निचोड़कर उसे स्प्रे बोतल में भर लें और टैंक के आंतरिक हिस्सों पर समान रूप से छिड़क दें। थोड़ी देर के विश्राम के बाद सामान्य पानी से एक बार पुनः खंगाल लें। यह सरल उपाय टैंक के भीतर किसी भी प्रकार की अवशिष्ट बास को मिटाकर लंबे समय तक ताजी महक बनाए रखता है। इसका आप पर असर पानी की टंकी में लंबे समय तक दुर्गंध रहने से दैनिक उपयोग और त्वचा स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है, लेकिन इन उपायों से साधारण घरेलू सामान के जरिए पानी स्वच्छ रखा जा सकता है। • दैनिक उपयोग: दुर्गंधयुक्त पानी से त्वचा में खुजली और पेट संबंधी संक्रमण का खतरा टल जाता है। शुद्ध पानी मिलने से नहाने और बर्तनों की धुलाई सहज हो जाती है। • आर्थिक बचत: महंगे केमिकल या बाहरी सफाई एजेंसियों पर बार-बार होने वाले खर्च से मुक्ति मिलती है। बेकिंग सोडा और सिरका जैसे किफायती उपाय बजट को प्रभावित नहीं करते। • पाइपलाइन सुरक्षा: नियमित प्राकृतिक शोधन से नलों और पाइपों में काई व बैक्टीरिया का जमाव रुकता है। इससे घरेलू प्लंबिंग सिस्टम लंबे समय तक टिकाऊ बना रहता है। • सरल रखरखाव: हर महीने वेंटिलेशन और धूप दिखाने की आदत से टैंक बार-बार गंदा नहीं होता। परिवार के सदस्यों को हर दिन ताजे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। ऐसा क्यों हुआ पानी की टंकी में बार-बार सफाई के बाद भी बदबू आने का मुख्य कारण दीवारों की सूक्ष्म परतों में फफूंद का जमाव और धोने के तुरंत बाद ढक्कन बंद कर देना है। • बैक्टीरिया का छिपाव: प्लास्टिक और सीमेंट की दीवारों पर काई व सूक्ष्म जीवाणु अपनी परत बना लेते हैं। सामान्य पानी की धुलाई से इनकी गहरी जड़ें नष्ट नहीं हो पातीं। • अत्यधिक नमी और वेंटिलेशन की कमी: टैंक धोने के फौरन बाद ढक्कन बंद करने से भाप और पानी की बूंदें भीतर कैद रह जाती हैं। यह बंद वातावरण सीलन की तीखी गंध को जन्म देता है। • पाइपलाइन में रुका हुआ पानी: आपूर्ति से जुड़ी इनलेट और आउटलेट पाइपों में तलछट जमा रहने से भी महक टैंक के पानी में घुलती रहती है। जब तक कीटाणुनाशक उपचार न हो, यह बदबू बार-बार लौटती है। सवाल-जवाब 1. बेकिंग सोडा और सिरके का घोल कैसे तैयार करें? एक बाल्टी पानी में चार से पांच बड़े चम्मच बेकिंग सोडा और एक कप सफेद सिरका मिलाकर घोल बनाएं। 2. ब्लीचिंग पाउडर से धोने के बाद ढक्कन खुला रखना क्यों आवश्यक है? ढक्कन खुला रखने से क्लोरीन की तीखी गंध पूरी तरह बाहर निकल जाती है और पानी में उसकी बास नहीं रहती। 3. धोने के तुरंत बाद ढक्कन बंद करने से क्या नुकसान होता है? तुरंत ढक्कन बंद करने से भीतरी नमी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे सीलन और बदबू दोबारा पैदा हो जाती है। 4. टैंक में नींबू के रस का छिड़काव किस प्रकार लाभ पहुंचाता है? नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड दुर्गंध को खत्म करता है और टैंक के भीतरी हिस्से में ताजी महक बनाए रखता है। https://trendkia.com/health/dhulai-ke-bada-bhi-pani-ke-tainka-se-durgndha-a-rahi-hai-to-ajamaen-ye-gharelu-nuskhe-48968 TrendKia — Har trend, sabse pehle.