# धूम्रपान और बीपी-शुगर से दूरी 13 साल बढ़ा सकती है दिमाग की सेहत, अमेरिका के अध्ययन में बड़ा खुलासा

> एक नए 26 वर्षीय अमेरिकी अध्ययन के अनुसार, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से रहित लोग इन जोखिम कारकों से जूझने वालों की तुलना में लगभग 13 साल अधिक समय तक डिमेंशिया से सुरक्षित रह सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/dhumrapana-aura-bipi-shugara-se-duri-13-sala-barha-sakati-hai-dimaga-ki-sehata-us-ke-adhyayana-men-bara-khulasa-19983 · **Language:** Hindi
**Tags:** डिमेंशिया, धूम्रपान के नुकसान, याददाश्त और स्मोकिंग, एम्स स्टडी, मस्तिष्क स्वास्थ्य, ब्लड प्रेशर और शुगर

धूम्रपान करने वाले लोग अक्सर फेफड़ों के कैंसर और सांस की बीमारियों के खतरों से वाकिफ होते हैं, लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सिगरेट का धुआं इंसानी दिमाग की याददाश्त को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। यह आदत व्यक्ति को डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी की ओर धकेल सकती है, जिसमें इंसान रोजमर्रा की बुनियादी बातें भी भूलने लगता है। पीड़ित व्यक्ति को यह याद नहीं रहता कि उसने हाल ही में खाना खाया है या नहीं, वह कुछ देर पहले मिले परिचितों को पहचान नहीं पाता और कई बार अपने घर का रास्ता तक भूल जाता है। एक लंबे अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि धूम्रपान और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना देती हैं।

## अध्ययन के आंकड़े और डिमेंशिया से बचाव की अवधि
अमेरिका में 12,409 लोगों पर 26 साल से अधिक समय तक किए गए एक गहन अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि सेहतमंद आदतें दिमाग को लंबी उम्र तक तंदुरुस्त रख सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को धूम्रपान की आदत नहीं होती और जो हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से पीड़ित नहीं हैं, वे तीनों जोखिम कारकों का सामना कर रहे लोगों की तुलना में लगभग 13 साल अधिक समय तक डिमेंशिया के लक्षणों से बचे रहते हैं। यह अंतर उम्र बढ़ने के साथ और अधिक स्पष्ट होता जाता है।

अध्ययन में 55 वर्ष की आयु के बाद के 30 सालों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसके तहत 85 वर्ष की उम्र तक पहुंचने पर पाया गया कि जिन प्रतिभागियों में धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और मधुमेह में से कोई भी समस्या नहीं थी, वे पूरे 30 वर्षों तक यानी 85 साल की उम्र तक डिमेंशिया से मुक्त रहे। इसके विपरीत, जो लोग सिगरेट पीते थे और साथ ही बीपी तथा शुगर दोनों बीमारियों से ग्रस्त थे, उनमें डिमेंशिया से बचे रहने की अवधि घटकर केवल 17.5 साल ही रह गई, जो शून्य जोखिम वाले समूह की तुलना में लगभग आधी है।

## जोखिम के स्तर और डिमेंशिया का बढ़ता खतरा
शोधकर्ताओं के अनुसार व्यक्ति के जीवन में जितने अधिक स्वास्थ्य जोखिम जुड़ते जाते हैं, डिमेंशिया का खतरा उतनी ही तेजी से बढ़ता है। 55 साल की उम्र के बाद बिना किसी जोखिम वाले लोग औसतन 30 साल तक दिमागी रूप से स्वस्थ रहे। वहीं केवल एक स्वास्थ्य जोखिम वाले प्रतिभागियों में यह अवधि 26 साल दर्ज की गई। दो स्वास्थ्य जोखिमों से जूझ रहे लोगों में डिमेंशिया मुक्त रहने का औसत 21 साल रहा, जबकि तीनों जोखिम वाले व्यक्तियों में यह घटकर महज 17.5 साल रह गया।

आंकड़ों के मुताबिक, सिगरेट पीने वाले और तीनों स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहे लोगों में डिमेंशिया विकसित होने की आशंका शून्य जोखिम वालों की तुलना में लगभग 2.7 गुना अधिक पाई गई। जब प्रतिभागी 85 वर्ष की आयु तक पहुंचे, तब बिना किसी जोखिम वाले समूह के 35 प्रतिशत लोग पूरी तरह से डिमेंशिया मुक्त थे। इसके विपरीत, तीनों जोखिमों से घिरे समूह में केवल 7 प्रतिशत लोग ही डिमेंशिया से सुरक्षित बच सके।

## विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी और एम्स विशेषज्ञ की सलाह
डिमेंशिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि जीवनशैली में सुधार करके इस बीमारी के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है। संगठन के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता या आलस्य जैसी आदतों पर नियंत्रण पाकर डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत खतरे को टाला जा सकता है या उसमें देरी लाई जा सकती है। सही समय पर सजग होना मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

एम्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, न्यूरोलॉजी की चीफ प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी का कहना है कि लोगों को 40 वर्ष की आयु से ही अपने ब्लड प्रेशर और शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि हर व्यक्ति को सिगरेट और अत्यधिक शराब के सेवन से दूरी बनानी चाहिए, अपने शरीर का वजन संतुलित रखना चाहिए और रोजाना हल्का व्यायाम करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योग निद्रा और विभिन्न प्राणायाम के अभ्यास से मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। धूम्रपान जैसी हानिकारक आदत को जल्द से जल्द छोड़कर दिमाग को लंबे समय तक सेहतमंद और क्रियाशील रखा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
**स्वास्थ्य और दिमागी सेहत पर असर:** धूम्रपान छोड़ने और 40 की उम्र से ही ब्लड प्रेशर व शुगर को नियंत्रित रखकर आप डिमेंशिया के जोखिम को 45% तक कम कर सकते हैं और अपने मस्तिष्क को 13 साल अधिक समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या सिगरेट पीने से डिमेंशिया या भूलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है?
हां, अध्ययन के अनुसार धूम्रपान करने और बीपी व शुगर जैसी बीमारियों से घिरे होने पर डिमेंशिया होने का खतरा बिना किसी जोखिम वाले लोगों की तुलना में 2.7 गुना बढ़ जाता है।

### 2. बिना किसी स्वास्थ्य जोखिम वाले लोग कितने साल अधिक डिमेंशिया से सुरक्षित रहते हैं?
जो लोग धूम्रपान नहीं करते और जिन्हें हाई बीपी या शुगर नहीं है, वे इन तीनों जोखिमों से जूझ रहे लोगों की तुलना में लगभग 13 साल अधिक समय तक डिमेंशिया से मुक्त रहते हैं।

### 3. अमेरिकी अध्ययन में कितने लोगों की और कितने समय तक निगरानी की गई?
इस अध्ययन में 12,409 लोगों की 26 साल से अधिक समय तक बारीकी से मॉनिटरिंग की गई।

### 4. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जीवनशैली में सुधार से डिमेंशिया का कितना खतरा टाला जा सकता है?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार हाई बीपी, डायबिटीज, धूम्रपान और शारीरिक आलस्य जैसी आदतों को नियंत्रित करके डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत खतरे को रोका या टाला जा सकता है।

### 5. एम्स के विशेषज्ञों ने डिमेंशिया से बचने के लिए किस उम्र से सावधानी बरतने की सलाह दी है?
एम्स की प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी ने 40 वर्ष की आयु से ही बीपी और शुगर नियंत्रित करने, धूम्रपान व शराब से दूर रहने, वजन संतुलित रखने और योग निद्रा व प्राणायाम करने की सलाह दी है।

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