दीपावली पर आंखों की सुरक्षा: जौनपुर में डॉ. आकांक्षा यादव ने दिए खास एहतियात दीपावली के पर्व पर पटाखे जलाते समय बरती गई जरा सी लापरवाही आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। जौनपुर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा यादव ने बच्चों की सुरक्षा और चोट लगने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी है। दिपावली का पर्व आते ही बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में आतिशबाजी को लेकर भारी उत्साह देखा जाता है। हालांकि, यह उमंग कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण भारी पड़ सकती है। पटाखों से निकलने वाली तीखी चिंगारी और खतरनाक बारूद आंखों को गंभीर रूप से जख्मी कर सकता है। त्योहार की चमक-दमक के बीच यह बहुत जरूरी है कि लोग अपनी और अपनों की हिफाजत के लिए पूरे एहतियात बरतें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा यादव ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। बच्चों की सुरक्षा और बड़ों की निगरानी डॉ. आकांक्षा यादव ने खास तौर पर जोर दिया है कि दीपावली के दौरान बच्चों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। उन्हें कभी भी अकेले पटाखे हाथ में नहीं लेने देने चाहिए। हमेशा बड़ों की मौजूदगी और देखरेख में ही आतिशबाजी की जानी चाहिए। इसके अलावा, आतिशबाजी करते समय उससे एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखना भी बेहद जरूरी है। बच्चों को तेज आवाज वाले या अत्यधिक खतरनाक पटाखे, विशेष तौर पर बम जैसी चीजें बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। कई बार अत्यधिक उत्साह में बच्चे सुलगते हुए पटाखे के बेहद करीब चले जाते हैं, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बढ़ जाती है। बड़ों को भी यह समझना होगा कि पटाखे जलाते वक्त वे खुद भी अपनी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें और आग के सामानों के बिल्कुल करीब खड़े होकर उन्हें न जलाएं। आंख में चोट लगने पर तत्काल उठाएं कदम यदि दुर्भाग्यवश किसी की आंख में आतिशबाजी से चोट लग जाती है, तो इसे एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। डॉ. आकांक्षा यादव ने आगाह किया है कि लोग अक्सर चोट लगने के बाद घर पर ही इसके खुद ठीक होने का इंतजार करते रहते हैं, जो कि स्थिति को और बिगाड़ सकता है। अगर पटाखे की कोई चिंगारी, बारूद या किसी भी तरह का बाहरी कण आंख के अंदर चला जाए, तो भूलकर भी आंख को हाथों से रगड़ना नहीं चाहिए। इसके अलावा, आंख में फंसी हुई किसी भी वस्तु को घर पर खुद निकालने का प्रयास करना भी खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर बिना एक पल की देरी किए फौरन नजदीकी अस्पताल का रुख करना चाहिए। चोट के प्रकार और समय पर इलाज का महत्व आतिशबाजी के कारण आंखों में लगने वाली चोटें अलग-अलग स्तर की हो सकती हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति को मामूली चोट आ सकती है, तो वहीं कुछ अन्य मामलों में आंख को बहुत गहरा और स्थाई नुकसान भी पहुंच सकता है। यही वजह है कि किसी भी प्रकार की आंख की चोट को सामान्य या मामूली समझकर नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। सही समय पर अस्पताल पहुंचकर विशेषज्ञ से इलाज करवाने पर आंखों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। त्योहार की खुशियों के साथ सतर्कता है जरूरी डॉ. आकांक्षा यादव ने अंत में सभी नागरिकों से यही अपील की है कि वे दीपावली का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएं, लेकिन अपनी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न करें। बच्चों को पटाखे सौंपते वक्त अत्यधिक सावधानी बरतें और उन्हें हर हाल में खतरनाक किस्म की आतिशबाजी से दूर रखें। पटाखे जलाते वक्त किसी भी तरह की जल्दबाजी न दिखाएं और आंखों में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या चोट होने पर घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत किसी योग्य चिकित्सक की सहायता लें। थोड़ी सी सजगता और एहतियात आपके पूरे परिवार के इस त्योहार की खुशियों को सुरक्षित रख सकती है। इसका आप पर असर पटाखे जलाते समय बरती गई थोड़ी सी लापरवाही आपकी आंखों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है, जिसके लिए तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है। • भारत में: देश भर में दीपावली के दौरान आतिशबाजी करते समय सभी नागरिकों को अपनी आंखों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बच्चों को हमेशा बड़ों की देखरेख में ही पटाखे जलाने की अनुमति देनी चाहिए। • जौनपुर में: जौनपुर और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों को नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह का पालन करते हुए बच्चों को खतरनाक पटाखों से दूर रखना चाहिए। आंख में चोट लगने की स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत स्थानीय अस्पतालों में संपर्क करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ दीपावली के दौरान आंखों की चोटें मुख्य रूप से आतिशबाजी से निकलने वाले तीव्र रसायन, बारूद और अचानक उठने वाली चिंगारियों के कारण होती हैं। त्योहार के उत्साह में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और बच्चों द्वारा बिना देखरेख के पटाखे चलाना इन दुर्घटनाओं को बढ़ावा देता है। • सीधा कारण: पटाखों के फटने से निकलने वाले गर्म कण और उड़ने वाले बारूद के टुकड़े सीधे आंखों के संपर्क में आते हैं, जिससे कॉर्निया डैमेज या अन्य गंभीर नुकसान होता है। • जोखिम के कारक: बच्चों में सुरक्षा को लेकर समझ की कमी और बड़ों की अनुपस्थिति इस तरह के हादसों की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है। • चिकित्सकीय चेतावनी: डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि चोट लगने के बाद की गई देरी या आंख को रगड़ने जैसी हरकतें संक्रमण और स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं। सवाल-जवाब 1. दीपावली पर पटाखे जलाते समय बच्चों के लिए क्या सावधानी जरूरी है? बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे नहीं जलाने देने चाहिए और उन्हें हमेशा बड़ों की निगरानी में ही आतिशबाजी करनी चाहिए। 2. आंख में चिंगारी जाने पर सबसे पहले क्या नहीं करना चाहिए? आंख में चिंगारी या बाहरी कण जाने पर उसे कभी भी रगड़ना नहीं चाहिए और न ही फंसी हुई वस्तु को खुद निकालने की कोशिश करनी चाहिए। 3. पटाखे से आंख में चोट लगने पर क्या कदम उठाना चाहिए? घर पर इलाज का इंतजार करने के बजाय बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। 4. यह सलाह किस विशेषज्ञ द्वारा दी गई है? यह महत्वपूर्ण सलाह जौनपुर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा यादव द्वारा दी गई है। https://trendkia.com/health/dipavali-para-ankhon-ki-suraksha-jaunpur-men-dr-akanksha-yadav-ne-die-khasa-ehatiyata-52211 TrendKia — Har trend, sabse pehle.