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  "type": "article",
  "title": "दीपावली समारोह में नीता अंबानी का पारंपरिक परिधान बना आकर्षण का केंद्र, जानिए स्वदेश रामावली साड़ी की खासियत",
  "summary": "रिलायंस के दीपोत्सव में नीता अंबानी ने हाथ से बुनी विशेष सिंदूरी सिल्क साड़ी पहनी, जिस पर भगवान विष्णु के चरण और श्री राम नाम अंकित हैं।",
  "content": "जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित रिलायंस दीपावली उत्सव के दौरान नीता अंबानी का सांस्कृतिक और पारंपरिक परिधान सभी की नजरों में छाया रहा। इस विशेष पर्व पर उन्होंने गेरुआ आभा से सजी 'स्वदेश रामावली' सिल्क साड़ी का चयन किया। यह पूरा परिधान भगवान विष्णु और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की भक्ति भावना को समर्पित है। साड़ी की महीन बनावट और बुनावट में आध्यात्मिक प्रतीकों के साथ मनमोहक कमल के फूलों को खूबसूरती से उभारा गया है। इस अनुपम परिधान को तैयार करने में कुशल कारीगरों को करीब 5 महीने का लंबा समय लगा।\n\nमास्टर बुनकर अजय भोज की शिल्पकारी और कड़वा तकनीक\nइस साड़ी के निर्माण के पीछे प्राचीन भारतीय वस्त्र कला के पुनरुद्धार की गहरी सोच नजर आती है। प्रसिद्ध टेक्सटाइल रिवाइवलिस्ट और मास्टर शिल्पकार श्री अजय भोज ने लगभग पांच महीनों तक शुद्ध रेशम के धागों से इसे अपने हाथों से बुना है। गहरे सिंदूरी-लाल रंग वाली इस रेशमी साड़ी की पूरी जमीन पर पवित्र नाम 'श्री राम' को बार-बार बहुत ही आदर और सुंदरता के साथ पिरोया गया है। साड़ी का नाम 'राम' और 'नामावली' शब्दों के मेल से बना है, जिसका अर्थ है पवित्र और दिव्य नामों की माला। इस पूरे वस्त्र को तैयार करने में बनारस की प्रसिद्ध और जटिल 'कड़वा' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कड़वा बुनाई की खासियत यह होती है कि इसमें प्रत्येक आकृति और शब्द को अलग-अलग धागे से बुना जाता है, जिससे कपड़े पर लिखे गए भक्तिमय शब्द साक्षात श्रद्धा की अभिव्यक्ति बन जाते हैं।\n\n \n\nपल्लू की बनावट और बनारसी ब्रोकेड का संगम\nबनारस के हुनरमंद कारीगरों ने इस वस्त्र के जरिए भारतीय संस्कृति के सदियों पुराने इतिहास और आध्यात्मिक आस्था को एक नए रूप में पेश किया है। 'स्वदेश' मंच के माध्यम से नीता अंबानी ने भारत की पारंपरिक विरासत और हस्तशिल्प कला को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। साड़ी के किनारों पर शुद्ध सोने की जरी से बना भारी ब्रोकेड बॉर्डर दिया गया है, जिस पर पारंपरिक फूलों की बेलें उकेरी गई हैं। साड़ी का सबसे मुख्य आकर्षण इसका पल्लू है, जिस पर भगवान विष्णु के चरण-चिह्न, ॐ का पावन चिन्ह और खिले हुए कमल के फूलों को बेहद बारीक कढ़ाई के साथ सजाया गया है। इस साड़ी के साथ उन्होंने मैचिंग गहरे लाल रंग का सिल्क ब्लाउज पहना, जिस पर सुनहरे तारों का बारीक जाल और बूटी पैटर्न बना हुआ है। ब्लाउज की आस्तीनों और किनारों पर भी भारी ब्रोकेड बॉर्डर का काम किया गया है।\n\nटेम्पल ज्वेलरी और सम्पूर्ण पारंपरिक श्रृंगार\nनीता अंबानी अपने शाही और खास आभूषणों के चयन के लिए जानी जाती हैं। इस उत्सव में उन्होंने साड़ी के साथ टेम्पल ज्वेलरी शैली में बना एक भव्य मल्टी-लेयर्ड नेकलेस पहना। इस हार को सोने की बारीक नक्काशी के साथ तैयार किया गया है, जिसमें अनकट हीरे, पोल्की और पन्ना यानी हरे एमरल्ड मोतियों की खूबसूरत लड़ियां पिरोई गई हैं। इसके किनारों पर लटकती मोतियों की बूंदें इसके शाही स्वरूप को बढ़ा रही थीं। इसके साथ उन्होंने मैचिंग भारी ओवरसाइज्ड स्टेटमेंट झुमके पहने, जो नेकलेस के रूपांकनों से पूरी तरह मेल खा रहे थे। हाथों में सोने के बारीक कंगन और ब्रेसलेट थे, जिनमें साड़ी के रंग से मिलता-जुलता लाल टच मौजूद था। उन्होंने मेकअप बेहद सौम्य और स्वाभाविक रखा, जिसे माथे पर लगी एक छोटी सी लाल बिंदी ने पूरी तरह निखार दिया।\n\nइसका आप पर असर\nयह परिधान भारतीय पारंपरिक हथकरघा शिल्प, विशेषकर बनारसी कड़वा बुनाई और स्वदेशी कला की लोकप्रियता को बढ़ावा देता है।\n\n• हथकरघा और कारीगरों के लिए: हस्तनिर्मित वस्त्रों को प्रमुखता मिलने से पारंपरिक बुनकरों के काम को वैश्विक पहचान और प्रोत्साहन मिलता है। इससे बनारस के कड़वा तकनीक के शिल्पकारों के काम की मांग बढ़ती है।\n• त्योहारी फैशन प्रेमियों के लिए: त्योहारों के दौरान पारंपरिक और आध्यात्मिक रूपांकनों वाले परिधानों का चलन बढ़ता है। पाठक शादी और त्योहारी सीजन के लिए शुद्ध सिल्क और जरी के परिधानों से प्रेरणा ले सकते हैं।\n• सांस्कृतिक वस्त्र विरासत: प्राचीन तकनीकों और धार्मिक रूपांकनों का आधुनिक उत्सवों में उपयोग सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में मदद करता है। लोग अब मशीनी कपड़ों की जगह हाथ की बुनाई के महत्व को समझ रहे हैं।\n• आभूषण और स्टाइलिंग: पारंपरिक सिल्क के साथ टेम्पल ज्वेलरी और पोल्की का संयोजन शादी के मौसम के लिए एक लोकप्रिय रुझान बन रहा है। इससे भारतीय आभूषण कला के प्रति खरीदारों का रुझान बढ़ता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विशेष परिधान रिलायंस दीपावली उत्सव के लिए तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय वस्त्र शिल्प का सम्मान और भगवान राम के प्रति श्रद्धा प्रकट करना था।\n\n• सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रेरणा: दिवाली का पावन पर्व भगवान राम के आगमन और भक्ति से जुड़ा है, इसलिए परिधान पर श्री राम और भगवान विष्णु के चरण-चिह्नों को प्रमुखता दी गई। वस्त्र पर कड़वा तकनीक से पवित्र नामों को पिरोया गया।\n• हस्तशिल्प का पुनरुद्धार: स्वदेश पहल के जरिए भारत के पारंपरिक कारीगरों और लुप्त होती बुनाई तकनीकों को मंच देना मुख्य उद्देश्य था। मास्टर कारीगर अजय भोज ने 5 महीनों तक शुद्ध रेशम पर यह काम किया।\n• आयोजन का महत्व: जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित वार्षिक दीपोत्सव के लिए एक गरिमामय और पूर्णतः पारंपरिक भारतीय परिधान का चयन आवश्यक माना गया था। इसी कारण पारंपरिक लाल रंग और सोने की जरी का काम चुना गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नीता अंबानी की इस विशेष साड़ी का नाम क्या है?\nइस परिधान का नाम 'स्वदेश रामावली' सिल्क साड़ी है, जो भगवान राम और विष्णु जी से प्रेरित है।\n\n2. इस साड़ी को तैयार करने में कितना समय लगा?\nकारीगरों को शुद्ध रेशम से इस साड़ी को हाथ से बुनने में करीब 5 महीने का समय लगा।\n\n3. इस साड़ी को किसने तैयार किया है?\nइसे प्रसिद्ध टेक्सटाइल रिवाइवलिस्ट और मास्टर कारीगर श्री अजय भोज ने तैयार किया है।\n\n4. साड़ी के पल्लू पर कौन से प्रमुख डिजाइन बने हैं?\nपल्लू पर भगवान विष्णु के चरण-चिह्न, ॐ का प्रतीक और कमल के फूलों की बारीक डिजाइन बनी है।\n\n5. साड़ी में बुनाई की किस विशेष तकनीक का उपयोग किया गया है?\nइसमें बनारस की जटिल 'कड़वा' तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें प्रत्येक रूपांकनों को अलग-अलग बुना जाता है।\n\n6. साड़ी के साथ उन्होंने किस प्रकार के आभूषण पहने थे?\nउन्होंने टेम्पल ज्वेलरी शैली का मल्टी-लेयर्ड नेकलेस, पोल्की, अनकट हीरे और एमरल्ड मोतियों के झुमके पहने थे।",
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  "category": "स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-11-05",
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    "बनारसी सिल्क",
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