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  "type": "article",
  "title": "दीवाली के शोर और धुएं से बेजुबान पेट्स को बचाएं, आगरा के विशेषज्ञों ने दी खास सलाह",
  "summary": "दीपावली के दौरान होने वाली आतिशबाजी और पटाखों के शोर से पालतू जानवरों को गंभीर तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। आगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सकों ने पेट्स को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी और उपयोगी सुझाव साझा किए हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश में दीपोत्सव का पर्व बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। त्योहार के इन दिनों में लोग जमकर आतिशबाजी करते हैं, जिसका सबसे बुरा असर बेजुबान जानवरों पर पड़ता है। घरों में रहने वाले पालतू जानवर पटाखों की तेज आवाज से बुरी तरह डर जाते हैं और कई बार तनाव में आकर भोजन करना भी छोड़ देते हैं। ऐसे में यह बेहद आवश्यक है कि इस त्योहारी सीजन में पेट्स की विशेष देखभाल की जाए। आगरा के अनुभवी पशु चिकित्सकों ने पालतू जानवरों को पटाखों के शोर और जहरीले धुएं से महफूज रखने के लिए कुछ खास उपाय सुझाए हैं।\n\n \n\nपटाखों की तेज आवाज से जानवरों में बढ़ता है तनाव\n\nआगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू का कहना है कि पटाखों की गड़गड़ाहट पालतू जानवरों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। अत्यधिक भय और तनाव की स्थिति में उनकी सेहत अचानक बिगड़ सकती है। आतिशबाजी के चरम पर होने के दौरान पेट्स को कभी भी खुले में नहीं छोड़ना चाहिए। उन्हें घर के किसी ऐसे कमरे में बंद रखना चाहिए जो अपेक्षाकृत शांत हो। कमरे की रोशनी को हल्का रखें और वहां धीमी आवाज में संगीत बजाएं, ताकि बाहर से आने वाले पटाखों के धमाकों का प्रभाव कम से कम पड़े।\n\n डॉक्टर ने यह भी सुझाव दिया कि पेट्स के कानों में रुई के छोटे टुकड़े रखे जा सकते हैं, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि रुई कान के अंदर बहुत गहराई तक न जाए। समय-समय पर जाकर उनकी गतिविधियों और स्थिति का जायजा लेते रहें। यदि आवश्यक हो तो केवल पशु चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवाएं दी जानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी मर्जी से कोई भी दवा बिल्कुल न दें। इसके अलावा उनके पास हमेशा साफ पानी और उनका मनपसंद खाना मौजूद रखें। यदि वे डर जाएं तो उन्हें डांटने के बजाय प्यार से सहलाएं और दिलासा दें।\n\n \n\nजहरीला धुआं बिगाड़ सकता है सांस और आंखों की सेहत\n\nडॉ. संजीव नेहरू के अनुसार, दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी केवल इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि बेजुबान जीवों के स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक है। पटाखों से उठने वाला जहरीला धुआं पेट्स के श्वसन तंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसके संपर्क में आने से उन्हें सांस लेने में कठिनाई, खांसी उठने और अस्थमा जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।\n\n उन्होंने आगे बताया कि आतिशबाजी के कारण हवा में फैलने वाले सूक्ष्म कण जानवरों की आंखों में तेज जलन, लाचारी, लालिमा और संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कई बार धुएं की अधिकता से पालतू जीवों की आंखों को स्थायी रूप से गंभीर क्षति पहुंच सकती है। इसलिए पालतू पशुओं के मालिकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे आतिशबाजी के वक्त जानवरों को धुएं वाले स्थानों से दूर रखें और उन्हें घर के भीतर ही सुरक्षित माहौल प्रदान करें। यदि सांस लेने में तकलीफ या आंखों से जुड़ी कोई भी परेशानी दिखाई दे तो तुरंत किसी नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।\n\n \n\nपर्याप्त पानी और पसंदीदा भोजन का रखें विशेष प्रबंध\n\nडॉ. संजीव नेहरू का मानना है कि दीवाली के दौरान पटाखों की भयानक आवाज से घबराकर पेट्स की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। कई बार घबराहट और बेचैनी के कारण वे सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी पीने लगते हैं। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि जिस सुरक्षित कमरे में उन्हें रखा गया है, वहां पीने के लिए साफ और ताजा पानी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो। इसके साथ ही उनका प्रिय आहार भी उनके पास ही रखा जाना ताकि तनाव के माहौल के बीच वे खानपान से मुंह न मोड़ें।\n\n उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की देखरेख में पेट्स को शांत रखने वाली दवाइयां दी जा सकती हैं। हालांकि, बिना चिकित्सीय परामर्श के किसी भी प्रकार की गोली या दवा देना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। इसलिए दीवाली के इन खास दिनों में पालतू जानवरों की सुरक्षा और तंदुरुस्ती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nदीवाली के दौरान पटाखों और धुएं से पालतू जानवरों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।\n\n• भारत में: देश भर में पालतू पशु पालने वाले लोगों को अपने जानवरों को तेज आवाज और प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष इंतजाम करने चाहिए। ऐसा करने से पेट्स को तनाव और सांस की गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।\n• आगरा में: आगरा के स्थानीय निवासियों को विशेष रूप से अपने पेट्स को खुले में छोड़ने से बचना चाहिए और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उन्हें शांत कमरे में रखना चाहिए। इससे क्षेत्र के पालतू जानवरों को त्योहारी सीजन में सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपटाखों का शोर और जहरीला धुआं जानवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करता है, जिसके पीछे स्पष्ट चिकित्सीय कारण हैं।\n\n• अत्यधिक शोर का प्रभाव: पटाखों की तेज आवाज जानवरों की सुनने की बेहद संवेदनशील क्षमता को प्रभावित करती है, जिससे उन्हें गंभीर मानसिक तनाव और घबराहट होती है।\n• श्वसन तंत्र को नुकसान: आतिशबाजी से निकलने वाले जहरीले रसायन और बारीक कण हवा में फैलकर पेट्स के फेफड़ों और सांस की नली में संक्रमण पैदा करते हैं।\n• व्यवहार में बदलाव: डर और असुरक्षा की भावना के कारण पालतू जानवर अपनी सामान्य दिनचर्या छोड़ देते हैं और खाना-पीना त्याग देते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दीपावली के शोर से पेट्स पर क्या असर पड़ता है?\nपटाखों की तेज आवाज से पालतू जानवर अत्यधिक डर जाते हैं, तनाव में आ जाते हैं और कई बार खाना-पीना भी छोड़ देते हैं।\n\n2. आगरा में किसने पेट्स की सुरक्षा के लिए टिप्स दिए हैं?\nआगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू ने पेट्स को पटाखों के शोर और धुएं से बचाने के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं।\n\n3. आतिशबाजी के दौरान पेट्स को कहां रखना चाहिए?\nपेट्स को खुले में छोड़ने के बजाय घर के किसी शांत कमरे में रखना चाहिए जहां लाइट धीमी हो और हल्का संगीत बजाया जा सके।\n\n4. क्या पटाखों के धुएं से पेट्स को सांस की समस्या हो सकती है?\nहां, पटाखों का जहरीला धुआं उनके श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है जिससे सांस लेने में परेशानी और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।\n\n5. क्या पेट्स को बिना डॉक्टर की सलाह के शांत करने की दवा दे सकते हैं?\nनहीं, बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी टैबलेट देना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।",
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  "publishedAt": "2026-11-08",
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