दीवाली पर पटाखों से आंख या हाथ जले तो तुरंत अपनाएं ये उपाय, डॉक्टर नितिन धीरा ने दी जरूरी चेतावनी दीवाली के पावन अवसर पर आतिशबाजी करते समय बरती गई थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। जमशेदपुर के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नितिन धीरा ने आंखों और शरीर को पटाखों से बचाने के लिए खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दीवाली का पावन पर्व अपने साथ रोशनी और उमंग लेकर आता है। इस दिन हर आयु वर्ग के लोग आतिशबाजी का भरपूर आनंद लेते हैं। हालांकि, जरा सी भी असावधानी उत्सव के आनंद को गंभीर संकट में बदल सकती है। हर साल इस पर्व के दौरान पटाखों के कारण हाथ झुलसने, उंगलियों में चोट लगने और आंखों में बारूद तथा चिंगारी घुसने के ढेरों मामले सामने आते हैं। कई बार लोग उचित जानकारी के अभाव में ऐसे घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर बैठते हैं, जो जख्म को और ज्यादा गहरा कर देते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जमशेदपुर के आई सर्जन डॉ. नितिन धीरा ने लोगों को आतिशबाजी के दौरान अत्यधिक सतर्कता बरतने और कोई दुर्घटना होने की स्थिति में सही प्राथमिक उपचार करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इस उत्सव के दौरान बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आंखों और शरीर के अंगों को पटाखों से सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए रखें कड़ा पहरा डॉ. नितिन धीरा के अनुसार, दीवाली के मौके पर सबसे पहले बच्चों की हिफाजत पर पूरा ध्यान देना चाहिए। कम उम्र के बच्चों को तेज आवाज करने वाले और भारी खतरे वाले पटाखे बिल्कुल नहीं सौंपने चाहिए। बच्चों को कभी भी अकेले आतिशबाजी करने के लिए नहीं भेजना चाहिए। उनके पास हमेशा किसी वयस्क व्यक्ति का होना बेहद आवश्यक है। पटाखे हमेशा खुले और महफूज जगह पर ही जलाए जाने चाहिए। बच्चों को सुलगते हुए पटाखे अपने हाथों में उठाने, दूसरों की तरफ पटाखे उछालने या आतिशबाजी के साथ किसी भी तरह की मस्ती करने से सख्ती से रोकना चाहिए। आंखों की सुरक्षा के लिए प्रोटेक्टिव चश्मा पहनना भी एक समझदारी भरा कदम साबित होता है। हाथ झुलसने पर तुरंत करें ये जरूरी काम यदि पटाखों से निकलने वाली चिंगारी या आग की वजह से हाथ या शरीर का कोई अन्य हिस्सा झुलस जाए, तो सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ और सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखना चाहिए। ऐसा करने से जलन की तीव्रता कम होती है और त्वचा को ठंडक मिलती है। जले हुए हिस्से पर भूलकर भी टूथपेस्ट, शुद्ध घी, खाद्य तेल, बर्फ या किसी भी प्रकार की क्रीम और जेल का लेप नहीं करना चाहिए। इन चीजों के इस्तेमाल से घाव और अधिक गंभीर हो सकता है। जख्म वाले स्थान को किसी साफ, ढीले वस्त्र या नॉन-स्टिक ड्रेसिंग से हल्के हाथों से ढक देना चाहिए। डॉ. धीरा के मुताबिक, त्वचा जलने के बाद वहां सूजन आने का अंदेशा बना रहता है। ऐसी स्थिति में यदि हाथ में कोई अंगूठी, चूड़ी, कड़ा या कलाई घड़ी पहनी हुई है, तो सूजन बढ़ने से पहले उसे बेहद सावधानी के साथ निकाल देना चाहिए। इसी प्रकार शरीर के कसे हुए कपड़ों को भी ढीला कर देना चाहिए। हालांकि, यदि कपड़ा झुलसी हुई त्वचा के साथ चिपक गया है, तो उसे जबरदस्ती खींचकर अलग करने की कोशिश न करें। बड़ा घाव होने, अधिक गहराई तक जलने या छाले उभर आने की दशा में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। गंभीर रूप से जलने की स्थिति में घरेलू उपायों के भरोसे बिल्कुल नहीं बैठना चाहिए। आंख में बारूद या चिंगारी जाने पर भूलकर भी न करें ये भूल पटाखों की वजह से आंखों को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। डॉ. नितिन धीरा ने नेत्र सुरक्षा को लेकर अत्यंत सावधानी बरतने का आह्वान किया है। उनके मुताबिक, यदि पटाखे की कोई चिंगारी, बारूद या धूल का अन्य कण आंख के अंदर चला जाए, तो आंख को कतई नहीं रगड़ना चाहिए। आंख के भीतर फंसी किसी भी चीज को उंगली या किसी कपड़े के टुकड़े से बाहर निकालने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। यदि बारूद या कोई रासायनिक तत्व आंख में प्रवेश कर चुका है, तो फौरन साफ बहते पानी से अपनी आंख को कम से कम 20 मिनट तक अच्छी तरह धोएं और इसके बाद फौरन किसी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। आंख में भयंकर दर्द, लाचारी, लाली छा जाना, रोशनी सहन न होना या अचानक देखने की क्षमता कमजोर पड़ने पर एक पल की भी देरी किए बिना अस्पताल पहुंचना चाहिए। आंख में चोट लगने पर अपनी तरफ से कोई भी आई ड्रॉप या दवा डालने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। वक्त पर उचित चिकित्सा मिलने से बड़े नुकसान के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। थोड़ी सी मुस्तैदी से टल सकती है बड़ी अनहोनी डॉ. नितिन धीरा ने आम जनता से आग्रह किया है कि दीवाली का पर्व मनाते वक्त यदि थोड़ी सी भी चौकसी बरती जाए, तो बड़ी दुर्घटनाओं से आसानी से बचा जा सकता है। आतिशबाजी हमेशा खुले और महफूज मैदान या जगह पर ही करें। बच्चों को बड़ों की निगरानी के दायरे में ही पटाखे जलाने की अनुमति दें और आंखों की हिफाजत के लिए प्रोटेक्टिव चश्मों का उपयोग करें। किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर दादी-नानी के घरेलू नुस्खों के फेर में पड़ने के बजाय सही फर्स्ट-एड दें और योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। त्योहारी उल्लास का असली मज़ा तभी है जब परिवार का हर एक सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे और दीवाली बिना किसी बाधा के खुशी-खुशी मनाई जाए। इसका आप पर असर पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान सही कदम उठाने से गंभीर नुकसान और स्थायी विकलांगता से बचा जा सकता है। • भारत में: त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में हर साल आतिशबाजी से हजारों लोग घायल होते हैं, इसलिए बच्चों की निगरानी और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। • जमशेदपुर में: स्थानीय नागरिकों और बच्चों के अभिभावकों को नेत्र चिकित्सक डॉ. नितिन धीरा द्वारा बताए गए प्राथमिक उपचार के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ पटाखों के दौरान होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूकता की कमी के कारण होती हैं। • लापरवाही और उच्च जोखिम: तेज आवाज वाले पटाखों का असुरक्षित स्थानों पर प्रयोग और बच्चों का बड़ों की निगरानी के बिना आतिशबाजी करना मुख्य हादसों की वजह बनता है। • गलत घरेलू नुस्खे: जलने या आंख में बारूद जाने पर टूथपेस्ट, तेल या बर्फ जैसे गलत उपाय करने से संक्रमण और घाव की गंभीरता बढ़ जाती है। • रासायनिक प्रभाव: पटाखों में मौजूद बारूद और खतरनाक रसायन आंखों के नाजुक ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। सवाल-जवाब 1. दीवाली पर पटाखों से आंख में बारूद जाने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? आंख को बिल्कुल न रगड़ें और साफ बहते पानी से कम से कम 20 मिनट तक धोकर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं। 2. हाथ जलने पर कौन सी चीजें लगाने से बचना चाहिए? जलने वाली जगह पर भूलकर भी टूथपेस्ट, घी, तेल, बर्फ या किसी तरह की क्रीम और जेल नहीं लगाना चाहिए। 3. हाथ जलने पर प्राथमिक उपचार के तौर पर क्या करना चाहिए? प्रभावित जगह को सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट तक रखना चाहिए और साफ ढीले कपड़े से ढकना चाहिए। 4. बच्चों को पटाखे जलाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें, हमेशा किसी बड़े की मौजूदगी रखें और खुले एवं सुरक्षित स्थान का चयन करें। 5. किस डॉक्टर ने दीवाली सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी है? जमशेदपुर के आई सर्जन डॉ. नितिन धीरा ने दीवाली पर सुरक्षा बरतने की सलाह दी है। https://trendkia.com/health/divali-para-patakhon-se-ankha-ya-hatha-jale-to-turnta-apanaen-ye-upaya-doctor-nitin-dhira-ne-di-jaruri-chetavani-57564 TrendKia — Har trend, sabse pehle.