# दीवाली पर त्वचा झुलसने पर तुरंत करें ये जरूरी उपाय, भूलकर भी न करें ये बड़ी गलतियां

> दीवाली पर पटाखे जलाते समय त्वचा झुलसने पर तुरंत बहते ठंडे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए और फफोले पड़ने पर उन्हें खुद से फोड़ने की गलती से बचना चाहिए।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/diwali-par-tvacha-zhulasne-par-turant-kare-ye-zaroori-upay-58032 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिवाली बर्न, पटाखे से जलना, प्राथमिक उपचार, त्वचा रोग विशेषज्ञ, अमृता अस्पताल

त्योहारों के मौसम में उत्साह और उमंग के साथ थोड़ी सी असावधानी भी बड़ी मुसीबत का सबब बन सकती है, खासकर जब बात बच्चों की हो जो आतिशबाजी को लेकर बेहद रोमांचित रहते हैं। कई बार इस दीवाली के दौरान लापरवाही के कारण बच्चों या बड़ों के हाथ, चेहरे और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों पर पटाखे से जलने के घाव हो जाते हैं। ऐसी आपातकालीन स्थिति में अकसर माता-पिता और परिजन घबराकर टूथपेस्ट, हल्दी या बर्फ जैसी घरेलू चीजों का इस्तेमाल करने की भूल कर बैठते हैं, जबकि चोट लगने के बाद शुरुआती 15 से 20 मिनट बेहद अहम होते हैं। इस दौरान मिलने वाला सटीक प्राथमिक उपचार त्वचा को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है। फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पंखुरी दुदानी ने इस विषय पर बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी जानकारियां साझा की हैं।

## तुरंत पानी से ठंडक पहुंचाना है जरूरी
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि यदि पटाखे से त्वचा के झुलसने का थोड़ा भी अंदेशा हो या केवल लालिमा ही क्यों न दिखाई दे, तो बिना देर किए प्रभावित हिस्से को तुरंत बहते हुए पानी के नीचे रख देना चाहिए। शरीर का कोई भी हिस्सा चाहे हाथ हो, चेहरा हो या कोई अन्य अंग जला हो, उसे कम से कम 15 से 20 मिनट तक लगातार ठंडे पानी से धोना बहुत जरूरी होता है। इस प्रक्रिया के लिए बर्फ का सीधा इस्तेमाल करने के बजाय बहता हुआ पानी ज्यादा असरदार और बेहतर साबित होता है। इसके अलावा, ठंडे पानी में बर्फ मिलाकर भी उस घोल में प्रभावित हिस्से को रखा जा सकता है। इस प्रारंभिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद चोट की गंभीरता का आकलन करते हुए बिना किसी विलंब के नजदीकी अस्पताल का रुख करना चाहिए।

## घरेलू नुस्खों से बचें और सावधानी बरतें
डॉक्टर पंखुरी का कहना है कि लोग अक्सर जलने के बाद राहत पाने के लिए टूथपेस्ट, हल्दी या सीधी बर्फ मल देते हैं, लेकिन इन पारंपरिक घरेलू उपायों से कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता है। जले हुए स्थान पर टूथपेस्ट लगा देने से डॉक्टर को घाव की गहराई और स्थिति की सही जांच करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर पंखुरी ने सिल्वर आधारित कोलॉइडल ऑइंटमेंट का हवाला देते हुए सिल्वरेक्स जैसे उत्पादों का जिक्र किया है, जिनका उपयोग ठंडक प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। घायल मरीज को अस्पताल ले जाते समय यह बेहतर रहता है कि प्रभावित हिस्से को किसी साफ, गीले और सूती कपड़े से हल्के से लपेटकर ले जाया जाए ताकि बाहरी संक्रमण से बचाव हो सके।

## फफोले नजर आने पर न करें लापरवाही
डॉक्टर पंखुरी स्पष्ट करती हैं कि यदि त्वचा के जलने के बाद उस पर फफोले उभर आए हैं, तो उन्हें कभी भी अपनी तरफ से खुद फोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। त्वचा पर फफोले पड़ना इस बात का संकेत होता है कि चोट काफी गंभीर प्रकृति की है। ऐसी स्थिति में घर पर इलाज करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से चिकित्सीय परामर्श लेना अनिवार्य हो जाता है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए एंटीबायोटिक क्रीम लगाकर पट्टी करते हैं। यदि फफोले की वजह से बहुत ज्यादा असहजता या परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर उसे पूरी चिकित्सीय सुरक्षा के साथ खोल सकते हैं, लेकिन उसके ऊपर की मृत त्वचा को भी खुद से खींचकर हटाना सही नहीं है।

## दर्द न महसूस होना भी हो सकता है बड़ा खतरा
डॉक्टर पंखुरी यह भी बताती हैं कि कई बार पटाखे से जलने का निशान ऊपर से बहुत छोटा या मामूली दिखाई देता है, लेकिन अंदरूनी त्वचा को गहरा और गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है। यदि झुलसने के बाद दर्द 15 से 20 मिनट से अधिक समय तक लगातार बना रहे, फफोले उभर आएं या फिर इसके विपरीत बिल्कुल भी दर्द महसूस न हो और त्वचा पर कालापन नजर आने लगे, तो इसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अत्यधिक गहरे बर्न के मामलों में अंदर की नसें डैमेज हो जाने के कारण व्यक्ति को दर्द का अहसास नहीं होता है। ऐसे में यदि बच्चा खेल भी रहा हो और सामान्य नजर आ रहा हो, तब भी उसे तुरंत अस्पताल ले जाना अत्यंत आवश्यक है।

## संवेदनशील अंगों और हिस्सों का रखें खास ख्याल
डॉक्टर पंखुरी का मानना है कि चेहरे, आंखों के आसपास के क्षेत्र तथा हाथ की उंगलियों पर पटाखे से जलने की चोटें बेहद गंभीर हो सकती हैं। इन नाजुक हिस्सों पर चोट लगने से केवल त्वचा ही नहीं बल्कि शरीर की बनावट और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। खासकर हाथों की उंगलियों और पंजों में चोट लगने पर यदि समय पर उचित इलाज न मिले, तो ऐसी जटिल समस्याएं पैदा हो सकती हैं जिन्हें बाद में ठीक करना बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए किसी भी दुर्घटना की स्थिति में सबसे पहले प्रभावित अंग को बहते पानी से ठंडा करें, फिर उसे साफ गीले सूती वस्त्र में सुरक्षित लपेटकर बिना देर किए अस्पताल पहुंचे और विशेषज्ञ की देखरेख में पूरा इलाज करवाएं।

## इसका आप पर असर
पटाखे से त्वचा जलने की स्थिति में तुरंत उठाया गया कदम और सही प्राथमिक उपचार मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।

- **भारत में:** त्योहारों के दौरान आतिशबाजी करते समय बरती जाने वाली जरा सी सावधानी अनहोनी टाल सकती है और गंभीर मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है।
- **फरीदाबाद में:** अमृता अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी दुर्घटना के समय स्थानीय लोग तुरंत बहते पानी का उपयोग कर सही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचें।

## ऐसा क्यों हुआ
पटाखे जलाते समय होने वाली दुर्घटनाएं मुख्य रूप से अत्यधिक गर्मी, रासायनिक प्रतिक्रिया और थोड़ी सी लापरवाही या असुरक्षित तरीके से आतिशबाजी चलाने के कारण होती हैं।

- **सीधा कारण:** पटाखों में मौजूद बारूद और उच्च तापमान के सीधे संपर्क में आने से त्वचा की कोशिकाएं झुलस जाती हैं।
- **गलत उपाय:** जलने पर टूथपेस्ट या हल्दी जैसे घरेलू नुस्खे लगाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और डॉक्टरों को घाव जांचने में कठिनाई होती है।
- **गंभीरता:** त्वचा की गहरी परतों और नसों के क्षतिग्रस्त होने पर दर्द महसूस नहीं होता है, जो बड़े नुकसान का संकेत है।

## सवाल-जवाब

### 1. पटाखे से त्वचा जलने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
प्रभावित हिस्से को कम से कम 15 से 20 मिनट तक बहते हुए ठंडे पानी के नीचे रखना चाहिए।

### 2. जलने पर टूथपेस्ट या हल्दी क्यों नहीं लगानी चाहिए?
इससे कोई फायदा नहीं होता और डॉक्टर को जले हुए हिस्से की सही जांच करने में परेशानी होती है।

### 3. त्वचा पर फफोले पड़ने पर क्या करना चाहिए?
फफोलों को खुद से फोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और अस्पताल जाकर इलाज कराना चाहिए।

### 4. दर्द महसूस न होने पर क्या करना चाहिए?
दर्द न होना गहरी चोट और नसों के नुकसान का संकेत है, इसलिए तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._