# डॉक्टर सौरभ सेठी के अनुसार शरीर के वजन से ज्यादा जरूरी है जांघों की ताकत, जानिए क्यों जरूरी हैं पैरों की मांसपेशियां

> सिर्फ पतला या मोटा होना सेहत की सही गारंटी नहीं है। कैलिफोर्निया के विशेषज्ञ डॉक्टर सौरभ सेठी के अनुसार जांघों की मांसपेशियों की ताकत मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/dr-saurabh-sethi-ke-anusara-sharira-ke-vajana-se-jyada-jaruri-hai-janghon-ki-takata-janie-kyon-jaruri-hain-pairon-ki-mansapeshiyan-22804 · **Language:** Hindi
**Tags:** जांघों की मांसपेशियां, फिटनेस टिप्स, हृदय स्वास्थ्य, इंसुलिन सेंसिटिविटी, डॉक्टर सौरभ सेठी, मेटाबॉलिज्म

शारीरिक स्वास्थ्य का आकलन करते समय अक्सर लोग केवल वजन, पतलेपन या मोटापे पर ध्यान देते हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान के अनुसार शरीर का दुबला या मोटा होना अकेले संपूर्ण सेहत की गारंटी नहीं देता। स्वास्थ्य का एक बेहद महत्वपूर्ण आधार शरीर की मांसपेशियों की ताकत और उनकी गुणवत्ता होती है। विशेष रूप से निचले शरीर यानी जांघों की मांसपेशियां शारीरिक सहनशक्ति, मेटाबॉलिज्म और समग्र दीर्घायु से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। डॉक्टर सौरभ सेठी, जो कैलिफोर्निया में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट तथा पेट और लीवर रोग विशेषज्ञ हैं, के अनुसार पैरों की मांसपेशियों को मजबूत रखना बीमारियों से बचाव और शरीर को सक्रिय बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। जांघों का आकार और उनमें मौजूद मांसपेशियों की कार्यक्षमता यह तय करने में मदद करती है कि शरीर ऊर्जा का सही उपयोग कैसे कर रहा है।

## जांघों के घेरे और हृदय स्वास्थ्य के बीच वैज्ञानिक संबंध
विभिन्न चिकित्सीय अध्ययनों में यह देखा गया है कि जिन व्यक्तियों की जांघों का घेरा या जांघों की मोटाई कम होती है, उनमें हृदय रोग होने की आशंका अधिक पाई जाती है। इसके साथ ही, ऐसे लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया है। हालांकि, इस तथ्य का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि केवल पतली जांघ होना ही अस्वस्थ होने का प्रमाण है या फिर शरीर में अत्यधिक चर्बी होना सेहत के लिए फायदेमंद है। असली महत्व इस बात का है कि जांघों में मांसपेशियों की गुणवत्ता और ताकत कैसी है। जब जांघों में मांसपेशियों का निर्माण अच्छा होता है, तो वे शरीर को कई गंभीर शारीरिक समस्याओं और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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## मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन और दिल की सेहत में मांसपेशियों की भूमिका
जांघों की मांसपेशियां मानव शरीर के सबसे बड़े और शक्तिशाली मांसपेशी समूहों में से एक हैं। ये मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज और ऊर्जा के कुशल प्रबंधन में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। मजबूत मांसपेशियां रक्त में मौजूद शर्करा का सही उपयोग करने में मदद करती हैं, जिससे शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है। जब इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर रहती है, तो मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को सीधा समर्थन मिलता है और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, रोजाना पैरों और जांघों की मांसपेशियों का सक्रिय उपयोग करने से पूरे शरीर का रक्त संचार बेहतर होता है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से न केवल वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, बल्कि यह दिल की सेहत को भी लंबे समय तक दुरुस्त बनाए रखता है।

## जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के आसान दैनिक उपाय
जांघों और पैरों की मांसपेशियों को सुदृढ़ करने के लिए अत्यधिक कठिन कसरत या भारी जिम उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों को शामिल करके भी मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है। नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ना पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करने का एक बेहद कारगर तरीका है। इसके अतिरिक्त, ढलान या चढ़ाई वाली जगहों पर पैदल चलने से जांघों पर सकारात्मक दबाव पड़ता है। बिना किसी उपकरण के किए जाने वाले बॉडीवेट स्क्वैट्स और बिना हाथों का सहारा लिए कुर्सी से बार-बार उठने और बैठने का अभ्यास भी मांसपेशियों की ताकत को तेजी से बढ़ाता है। रोजाना पैदल चलना भी मांसपेशियों के सुचारू संचालन और सहनशक्ति को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होता है।

## इसका आप पर असर
जांघों की मांसपेशियों की ताकत सीधे तौर पर आपके दैनिक जीवन, ऊर्जा स्तर और दीर्घकालिक बीमारियों से बचाव को प्रभावित करती है।

- **दैनिक गतिविधियों में सुधार:** जांघों की मजबूत मांसपेशियां चढ़ने, उठने और चलने-फिरने को आसान बनाती हैं, जिससे शरीर में थकान कम होती है।
- **ब्लड शुगर और इंसुलिन नियंत्रण:** एक्टिव मांसपेशियां शरीर में शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करती हैं, जिससे डायबिटीज का खतरा घटता है।
- **हृदय स्वास्थ्य की सुरक्षा:** नियमित रूप से पैरों की मांसपेशियों का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखकर दिल की बीमारियों से बचाता है।
- **उम्र बढ़ने पर संतुलन:** मजबूत पैरों से उम्र बढ़ने के साथ गिरने और हड्डियों में चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।
- **आसान कसरत विकल्प:** बिना जिम जाए केवल सीढ़ियां चढ़कर या कुर्सी से उठकर-बैठकर जांघों को मजबूत बनाया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या केवल दुबला होना स्वस्थ होने की गारंटी है?
नहीं, केवल दुबला होना स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। शरीर में मांसपेशियों की मात्रा और उनकी ताकत सेहत के लिए अधिक महत्वपूर्ण होती है।

### 2. जांघों का घेरा कम होने से क्या जोखिम हो सकता है?
अध्ययन दिखाते हैं कि जांघों का कम घेरा या कमजोर मांसपेशियां हृदय रोगों और असमय मृत्यु के खतरे से जुड़ी हो सकती हैं।

### 3. जांघों की मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म को कैसे सुधारती हैं?
मजबूत मांसपेशियां रक्त में ग्लूकोज का सही इस्तेमाल करती हैं, जिससे इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है और मेटाबॉलिक सेहत बेहतर होती है।

### 4. बिना जिम जाए जांघों की मांसपेशियों को कैसे मजबूत करें?
नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़कर, चढ़ाई पर पैदल चलकर, बॉडीवेट स्क्वैट्स करके और कुर्सी से बिना हाथ के उठकर-बैठकर जांघों को मजबूत बनाया जा सकता है।

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