ईयरबड और तीली से कान साफ करने की आदत पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने दी सुरक्षित तरीके से मैल हटाने की सलाह कान का मैल कोई गंदगी नहीं बल्कि प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जिसे ईयरबड या नुकीली चीजों से कुरेदना पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल ने इसे सुरक्षित रूप से साफ करने के उपाय साझा किए हैं। अक्सर लोग कान में हल्की सी भी खुजली या भारीपन महसूस होते ही ईयरबड, माचिस की तीली या हेयरपिन जैसी चीजें अंदर डालने लगते हैं। यह आदत कान की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। कान के भीतर तैयार होने वाला मैल जिसे मेडिकल भाषा में वैक्स कहा जाता है, असल में कोई बेकार गंदगी नहीं बल्कि कुदरती सुरक्षा प्रणाली का एक जरूरी हिस्सा है। यह आंतरिक नलिका को बाहरी धूल, मिट्टी, हानिकारक कीटाणुओं और छोटे कीटों से महफूज रखता है। हालांकि, समस्या तब खड़ी होती है जब यह वैक्स जरूरत से ज्यादा इकट्ठा होकर भीतर ही सूख जाता है। ऐसी स्थिति में कान में असहज दर्द, तेज खुजली, भारीपन या आवाजें कम सुनाई देने जैसी दिक्कतें जन्म ले सकती हैं। रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, लोग इस सूखे मैल को बाहर निकालने की जल्दी में कई बार गंभीर गलतियां कर बैठते हैं, जिससे कान के संवेदनशील हिस्सों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। कान के अंदर ईयरबड या तीली डालना क्यों है नुकसानदेह कान के भीतरी हिस्से की बनावट बेहद नाजुक होती है और वहां किसी भी बाहरी वस्तु का प्रवेश जोखिम भरा होता है। डॉ. मोहम्मद इकबाल बताते हैं कि कान में वैक्स एक सामान्य प्रक्रिया के तहत बनता है और यह कान के पर्दे को सुरक्षित रखने का काम करता है। कई लोग यह मानते हैं कि ईयरबड से कान पूरी तरह साफ हो जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है। जब आप ईयरबड को कान की नली में घुमाते हैं, तो वह मैल को बाहर खींचने के बजाय उसे धक्का देकर और गहराई में धकेल देता है। इसके अलावा, माचिस की तीली, पिन या अन्य नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल तो और भी ज्यादा घातक है। इन सख्त चीजों के प्रयोग से कान की भीतरी त्वचा छिल सकती है, वहां गंभीर इंजरी हो सकती है, सूजन आ सकती है और कान से खून बहने की नौबत आ सकती है। यदि यह चोट अंदर गहराई तक लग जाए, तो कान के पर्दे में छेद होने का खतरा भी बन जाता है, जो सुनने की क्षमता को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है। सूखे वैक्स को नरम करने का आसान और सुरक्षित तरीका यदि कान के भीतर वैक्स सूखकर सख्त हो चुका है और बेचैनी पैदा कर रहा है, तो उसे जबरन खुरचने के बजाय नरम बनाकर बाहर आने का मौका देना चाहिए। डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, सूखे मैल को ढीला करने के लिए मिनरल ऑयल या बेबी ऑयल का सहारा लिया जा सकता है। इसके लिए तेल को हल्का सा गुनगुना कर लें और फिर ड्रॉपर की मदद से 2 से 4 बूंदें कान में डालें। तेल डालने के बाद सिर को थोड़ी देर उसी करवट रखें ताकि बूंदें अंदर तक पहुंचकर सूखे मैल पर असर कर सकें। इस प्रक्रिया को कुछ दिनों तक लगातार दोहराया जा सकता है। जब जमा हुआ वैक्स अच्छी तरह नरम हो जाता है, तो वह कान की प्राकृतिक शारीरिक क्रियाओं के जरिए खुद ब खुद बाहर खिसक जाता है। इन गंभीर लक्षणों में घरेलू उपाय से बचें तेल डालने का यह घरेलू तरीका केवल सामान्य और सूखे वैक्स के लिए ही उचित है। डॉ. इकबाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी व्यक्ति को कान में तेज दर्द हो रहा हो, किसी प्रकार का संक्रमण हो, कान से खून या मवाद आ रहा हो, अथवा कान के पर्दे में पहले से छेद होने की शिकायत हो, तो ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सीय परामर्श के कान में तेल, पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ बिल्कुल नहीं डालना चाहिए। ऐसे मामलों में खुद से किया गया कोई भी प्रयोग समस्या को कई गुना बढ़ा सकता है। बाहरी हिस्से की सफाई और डॉक्टर से परामर्श कब जरूरी कान की दैनिक स्वच्छता के लिए केवल उसके बाहरी हिस्से को ही साफ करना पर्याप्त माना जाता है। डॉ. मोहम्मद इकबाल का सुझाव है कि कान के बाहरी हिस्से और मुहाने को पोंछने के लिए एक मुलायम और साफ कॉटन का प्रयोग किया जा सकता है। ध्यान रहे कि कॉटन को कभी भी कान के छेद में बहुत गहराई तक नहीं डालना चाहिए और न ही सफाई करते वक्त बहुत ज्यादा दबाव बनाना चाहिए। ज्यादा जोर लगाने से नाजुक ऊतकों पर खरोंच आ सकती है। यदि कान में मैल की मात्रा बहुत अधिक हो गई है और इसके साथ कान लगातार बंद महसूस हो रहा हो, सुनने में रुकावट आ रही हो, असहनीय दर्द हो, चक्कर आ रहे हों या असहज लक्षण दिख रहे हों, तो खुद इलाज करने से बचना चाहिए। ऐसे हालात में तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना ही बुद्धिमानी है, क्योंकि विशेषज्ञ उपयुक्त चिकित्सीय उपकरणों की मदद से कान को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से साफ कर देते हैं। इसका आप पर असर कान की गलत तरीके से सफाई करने की आदत से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और सुरक्षित तरीका अपनाकर कान के पर्दे को नुकसान से बचाया जा सकता है। • आम लोगों के लिए: रोजमर्रा में कान साफ करने के लिए ईयरबड, माचिस की तीली या पिन का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। यह आदत कान के पर्दे में छेद होने और अंदरूनी चोट के खतरे को पूरी तरह टाल सकती है। • घरेलू देखभाल: सूखे वैक्स को जबरन निकालने के बजाय गुनगुने मिनरल ऑयल या बेबी ऑयल की 2 से 4 बूंदें डालकर कुछ दिन छोड़ना सुरक्षित विकल्प है। इससे मैल नरम होकर अपने आप बाहर आ जाता है और कान में जख्म नहीं होता। • डॉक्टर से जांच: यदि कान में तेज दर्द, मवाद, खून आने या चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस हों तो किसी भी घरेलू प्रयोग से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में सीधे ईएनटी या योग्य चिकित्सक से ही कान की सुरक्षित जांच और सफाई करानी चाहिए। • सफाई का दायरा: कान की सफाई केवल बाहरी हिस्से तक ही सीमित रखनी चाहिए और मुलायम कॉटन से ही साफ करना चाहिए। कान की नली में गहराई तक कोई भी चीज डालना हमेशा नुकसानदेह साबित होता है। ऐसा क्यों हुआ कान में वैक्स का जमा होना और उसकी गलत सफाई से होने वाली परेशानियां लोगों में जागरूकता की कमी के कारण सामने आती हैं। • प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया: कान में वैक्स बनना कोई बीमारी नहीं बल्कि धूल, कीटाणुओं और कीड़ों को रोकने का कुदरती तंत्र है। जब यह अधिक मात्रा में इकट्ठा होकर सूख जाता है, तब लोगों को रुकावट और खुजली महसूस होती है। • ईयरबड का गलत असर: लोग सफाई के लिए ईयरबड का सहारा लेते हैं, जिससे मैल बाहर आने की जगह और गहराई में दब जाता है। इस दबाव और बार-बार खुरचने से आंतरिक त्वचा छिल जाती है और सूजन आ जाती है। • जागरूकता का अभाव: तीली और पिन जैसी नुकीली चीजों से तुरंत राहत पाने की कोशिश पर्दे को नुकसान पहुंचा देती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि सुरक्षित तरीके न अपनाने पर यह छोटी सी गलती बहरेपन का कारण बन सकती है। सवाल-जवाब 1. कान में वैक्स क्यों बनता है? वैक्स कान का एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जो बाहरी धूल, मिट्टी, कीटाणुओं और छोटे कीड़ों को अंदर जाने से रोकता है। 2. ईयरबड से कान साफ करना खतरनाक क्यों है? ईयरबड मैल को बाहर निकालने के बजाय उसे कान के अंदर और गहराई में धकेल देता है, जिससे पर्दे को नुकसान और चोट लग सकती है। 3. सूखा वैक्स निकालने का सुरक्षित तरीका क्या है? हल्के गुनगुने मिनरल ऑयल या बेबी ऑयल की 2 से 4 बूंदें कान में डालकर कुछ दिन छोड़ने से सूखा मैल नरम होकर अपने आप बाहर आ जाता है। 4. किन परिस्थितियों में कान में तेल नहीं डालना चाहिए? यदि कान में दर्द, खून या मवाद आ रहा हो, संक्रमण हो या पर्दे में छेद हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के तेल या पानी बिल्कुल नहीं डालना चाहिए। 5. कान का कौन सा हिस्सा साफ करना सुरक्षित माना जाता है? केवल कान के बाहरी हिस्से को मुलायम और साफ कॉटन से पोंछना चाहिए, कॉटन को कभी भी कान के अंदर गहराई में नहीं ले जाना चाहिए। 6. डॉक्टर के पास कान की सफाई के लिए कब जाना चाहिए? यदि कान में बहुत ज्यादा मैल जमा हो, तेज दर्द हो, कान बंद लगे, कम सुनाई दे या चक्कर आ रहे हों, तो खुद सफाई करने के बजाय डॉक्टर को दिखाना चाहिए। https://trendkia.com/health/earbuds-aura-tili-se-kana-sapha-karane-ki-adata-para-sakati-hai-bhari-doctor-ne-di-surakshita-tarike-se-maila-hatane-ki-salaha-40736 TrendKia — Har trend, sabse pehle.