# एक बूंद खून से 15 मिनट में 75 मेडिकल जांच, रांची के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव का नया आविष्कार

> रांची के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने एक पोर्टेबल डायग्नोस्टिक डिवाइस तैयार की है, जो सिर्फ एक बूंद खून से 15 मिनट में 75 टेस्ट के नतीजे देती है।

**Type:** article · **Category:** स्वास्थ्य · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/health/eka-bunda-khuna-se-15-minata-men-75-medikala-jancha-ranchi-ke-doktara-shrey-shrivastava-ka-naya-avishkara-41578 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांची, श्रेय श्रीवास्तव, ब्लड टेस्ट, हेल्थकेयर, झारखंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडिकल डिवाइस

झारखंड के रांची निवासी डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य जांच के क्षेत्र में एक नई पोर्टेबल मशीन तैयार की है। यह अत्याधुनिक उपकरण मात्र एक बूंद खून के नमूने से केवल 15 मिनट के भीतर 75 तरह की स्वास्थ्य जांच पूरी करने में सक्षम है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अक्सर महंगे पैथोलॉजी परीक्षणों और लंबी प्रतीक्षा अवधि का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक को बेहद किफायती और सुलभ बनाया गया है, जहां जांच का खर्च मात्र ₹25 से शुरू होता है।

## ग्रामीण इलाकों में जांच को आसान बनाने का लक्ष्य
अक्सर पारंपरिक पैथोलॉजी लैब में जांच कराने पर रिपोर्ट मिलने में 24 घंटे तक का समय लग जाता है, और कई बार परिणामों की सटीकता को लेकर भी संशय रहता है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग आर्थिक तंगी के कारण समय पर जांच नहीं करा पाते। डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार यह मशीन आकार में काफी छोटी है, जिसके कारण इसे किसी भी सुदूर गांव या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आसानी से स्थापित किया जा सकता है। केंद्र सरकार से पूर्ण रूप से प्रमाणित और अनुमोदित इस मशीन का प्रदर्शन नई दिल्ली के भारत मंडपम में भी किया गया, जहां झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस नवाचार का अवलोकन कर इसकी सराहना की।

## आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यूनतम खून के नमूने पर आधारित प्रणाली
आमतौर पर जब कोई व्यक्ति किसी सामान्य लैब में ब्लड टेस्ट के लिए जाता है, तो वहां 2 से 3 सीसी खून का नमूना लिया जाता है। इसके विपरीत, इस नई मशीन में केवल एक बूंद खून ही पर्याप्त होता है। उपकरण के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े कई उन्नत तंत्र मौजूद हैं, जो सभी रिपोर्ट्स को मात्र 10 मिनट में सत्यापित कर देते हैं। इस डिवाइस के जरिए हीमोग्लोबिन और शुगर जैसी महत्वपूर्ण जांचों के परिणाम केवल 30 से 40 सेकंड के अंदर सामने आ जाते हैं। इसके साथ ही कंपलीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, लंग्स फंक्शन टेस्ट के अलावा डेंगू, टाइफाइड और विभिन्न प्रकार की एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों का विश्लेषण भी 10 से 15 मिनट में हो जाता है।

## ओटीपी और डिजिटल परामर्श की प्रक्रिया
इस प्रणाली के संचालन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित रखी गई है। जांच के समय मरीज का नाम और वजन जैसी बुनियादी जानकारियां सिस्टम में दर्ज की जाती हैं। इसके पश्चात संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर एक ओटीपी भेजा जाता है। इस ओटीपी को दर्ज करते ही जांच रिपोर्ट तुरंत जनरेट हो जाती है। यदि रिपोर्ट में शुगर या कोई अन्य पैरामीटर असंतुलित या बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो मरीज को 10 मिनट के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टर का परामर्श भी मिल जाता है। चिकित्सक द्वारा जारी किया गया डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन सीधे मरीज के फोन पर पहुंच जाता है, जिसे डाउनलोड करके वे किसी भी मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह नई पोर्टेबल जांच तकनीक मरीजों को बेहद कम कीमत और बहुत कम समय में सटीक मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराती है।

- **भारत में:** देश भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में पैथोलॉजी जांच का ढांचा सुलभ हो सकेगा। इससे मरीज केवल ₹25 की शुरुआती लागत पर बड़ी लैब के चक्कर काटे बिना तुरंत जांच करा सकेंगे।
- **झारखंड में:** राज्य के दूरदराज इलाकों में रहने वाले निवासियों को पैथोलॉजी रिपोर्ट के लिए 24 घंटे का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर उन्हें 10 मिनट के भीतर फोन पर डॉक्टर का परामर्श और डिजिटल पर्चा भी मिल सकेगा।
- **मरीजों के अनुभव पर:** जांच के लिए 2 से 3 सीसी खून देने के बजाय सिर्फ एक बूंद रक्त की आवश्यकता होगी। हीमोग्लोबिन और शुगर जैसे महत्वपूर्ण नतीजे 30 से 40 सेकंड में हाथ में आ जाएंगे।
- **वित्तीय बचत पर:** ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर महंगे टेस्ट का आर्थिक बोझ काफी कम होगा। समय पर बीमारी पकड़ में आने से इलाज के बड़े खर्चों से भी बचाव होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डायग्नोस्टिक सुविधाओं की कमी और पैथोलॉजी टेस्ट की भारी लागत को देखते हुए इस मशीन का आविष्कार किया गया।

- **महंगी जांच और दूरी की समस्या:** ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक ब्लड टेस्ट काफी महंगे होते हैं और लोगों के पास पैसे का अभाव रहता है। इसी मजबूरी को खत्म करने के लिए ₹25 की शुरुआती लागत वाली मशीन तैयार की गई।
- **रिपोर्ट में अत्यधिक देरी:** सामान्य लैब में जांच कराने पर मरीजों को रिपोर्ट पाने के लिए 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था और दूरदराज में सटीकता पर भी सवाल उठते थे। इस समस्या को 15 मिनट में 75 टेस्ट देने वाली प्रणाली के जरिए हल किया गया।
- **खून के बड़े नमूनों से परेशानी:** पारंपरिक जांच के लिए 2 से 3 सीसी खून निकालना पड़ता है, जो कमजोर या बुजुर्ग मरीजों के लिए असुविधाजनक होता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के उपयोग से केवल एक बूंद खून में संपूर्ण जांच संभव बनाई गई।

## सवाल-जवाब

### 1. इस नई मशीन से कितने टेस्ट कितनी देर में किए जा सकते हैं?
इस मशीन की मदद से मात्र 15 मिनट के अंदर 75 अलग-अलग स्वास्थ्य टेस्ट किए जा सकते हैं।

### 2. जांच के लिए मरीज का कितना खून लिया जाता है?
इस मशीन से पूरी जांच करने के लिए केवल एक बूंद खून की आवश्यकता होती है।

### 3. इस मशीन से टेस्ट की न्यूनतम फीस क्या है?
इस मशीन से जांच की शुरुआत मात्र ₹25 से होती है।

### 4. यह मशीन किसने तैयार की है?
इसे झारखंड की राजधानी रांची के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने तैयार किया है।

### 5. क्या इस मशीन को सरकारी मंजूरी मिली हुई है?
हां, यह मशीन केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से प्रमाणित और अनुमोदित है।

### 6. हीमोग्लोबिन और शुगर की जांच में कितना समय लगता है?
हीमोग्लोबिन और शुगर की जांच रिपोर्ट मात्र 30 से 40 सेकंड में मिल जाती है।

### 7. मरीज को अपनी रिपोर्ट कैसे प्राप्त होती है?
मरीज के मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी को सिस्टम में दर्ज करते ही रिपोर्ट जनरेट हो जाती है।

### 8. रिपोर्ट में किसी बीमारी का पता चलने पर क्या सुविधा मिलती है?
रिपोर्ट में समस्या दिखने पर 10 मिनट में डॉक्टर से परामर्श मिलता है और प्रिस्क्रिप्शन फोन पर आ जाता है।

## प्रेरणा और सबक
डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव की यह खोज दिखाती है कि जमीनी समस्याओं को तकनीक के जरिए कैसे हल किया जा सकता है।

- **समस्या की पहचान:** ग्रामीण क्षेत्रों में महंगे टेस्ट और आर्थिक तंगी के कारण इलाज न करा पाने वाले लोगों की पीड़ा को समझना ही इस नवाचार की नींव बना।
- **किफायती नवाचार:** महंगी स्वास्थ्य सेवाओं को मात्र ₹25 की शुरुआती कीमत पर लाकर यह साबित किया कि उन्नत तकनीक आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए।
- **आधुनिक तकनीक का सही उपयोग:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर उसे गांव-देहात के प्राथमिक स्वास्थ्य सुधार से जोड़ा।

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